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Yamuna Nagar News: मरीजों का इलाज करने के साथ दे रहे सेहत का संदेश
Tue, 30 Jun 2026 11:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 30 Jun 2026 11:54 PM IST
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डॉ. शरद अग्रवाल। स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। एक चिकित्सक का दायित्व केवल रोगों का उपचार करना ही नहीं, बल्कि समाज को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना भी है। डॉक्टर्स डे पर चिकित्सक लोगों को स्वस्थ्य रहने का मूल मंत्र बता रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि उनके पास आने वाले मरीजों व लोगों को नियमित व्यायाम व पर्याप्त नींद लेने की सलाह देते हैं।
चिकित्सकों ने कहा कि यह दोनों आवश्यकताएं पूरी न होने से व्यक्ति बहुत जल्द बीमार पड़ता है। इसके साथ संतुलित आहार शरीर के लिए अमृत बूटी है। भागदौड़, तनाव और अनियमित खानपान के दौर में नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद संजीवनी बूटी की तरह काम करते हैं। इन दिनों के होने से दवा का असर कई गुना बढ़ जाता है।
स्वस्थ शरीर और अनुशासित दिनचर्या ही बेहतर समाज की मजबूत नींव है। वह स्वयं प्रतिदिन अपने स्वास्थ्य के लिए समय निकालते हैं। सुबह की सैर और योग उनकी दिनचर्या का नियमित हिस्सा हैं, जबकि फुटबॉल और बैडमिंटन जैसे खेल उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से ऊर्जावान बनाए रखते हैं।
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डॉ. शरद अग्रवाल अपने जिम के प्रति इतने समर्पित हैं कि अपनी आय का लगभग आधा हिस्सा उसके रखरखाव और आधुनिक सुविधाओं पर खर्च करते हैं, ताकि अधिक से अधिक युवा बेहतर वातावरण में अभ्यास कर सकें। उनका मानना है कि स्वस्थ रहने के लिए महंगी दवाओं से अधिक जरूरी नियमित दिनचर्या और आत्म अनुशासन है।
डॉ. हर्षित कांबोज ने कहा कि व्यस्त जिंदगी में हमने अपने स्वास्थ्य से समझौता कर लिया है। इसमें सबसे ज्यादा बुरा हाल युवाओं का है। युवा पौष्टिक आहार से दूर हो गए हैं और अन्य खाद्य पदार्थों की ओर बढ़ रहे हैं। इससे छोटी आयु में लोगों को बड़ी-बड़ी बीमारियां लग रही है। स्वस्थ रहने का सबसे बड़ा मूल मंत्र नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद है।
नियमित व्यायाम करना बेहद जरूरी
डॉ. उज्ज्वल ने कहा कि संतुलित आहार, आदर्श दिनचर्या, नियमित व्यायाम इन दिन नियमों का जो व्यक्ति अनुशरण करता है, वह जल्द बीमार नहीं होता है। उसकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती रहती है। हमारा आधुनिकता की तरफ बढ़ना ही हमें बीमार कर रहा है। ऐसे में लोगों को चाहिए कि वे नशे से दूर रहे और आदर्श दिनचर्या का पालन करें।
डॉ. शिवानी अग्रवाल ने कहा कि चिकित्सा केवल बीमारी का इलाज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा देना भी डॉक्टरों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। भागदौड़ भरी जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या, असंतुलित खानपान और शारीरिक निष्क्रियता से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और हृदय रोग जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही है।
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जगाधरी। एक चिकित्सक का दायित्व केवल रोगों का उपचार करना ही नहीं, बल्कि समाज को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना भी है। डॉक्टर्स डे पर चिकित्सक लोगों को स्वस्थ्य रहने का मूल मंत्र बता रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि उनके पास आने वाले मरीजों व लोगों को नियमित व्यायाम व पर्याप्त नींद लेने की सलाह देते हैं।
चिकित्सकों ने कहा कि यह दोनों आवश्यकताएं पूरी न होने से व्यक्ति बहुत जल्द बीमार पड़ता है। इसके साथ संतुलित आहार शरीर के लिए अमृत बूटी है। भागदौड़, तनाव और अनियमित खानपान के दौर में नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद संजीवनी बूटी की तरह काम करते हैं। इन दिनों के होने से दवा का असर कई गुना बढ़ जाता है।
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स्वस्थ शरीर और अनुशासित दिनचर्या ही बेहतर समाज की मजबूत नींव है। वह स्वयं प्रतिदिन अपने स्वास्थ्य के लिए समय निकालते हैं। सुबह की सैर और योग उनकी दिनचर्या का नियमित हिस्सा हैं, जबकि फुटबॉल और बैडमिंटन जैसे खेल उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से ऊर्जावान बनाए रखते हैं।
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डॉ. शरद अग्रवाल अपने जिम के प्रति इतने समर्पित हैं कि अपनी आय का लगभग आधा हिस्सा उसके रखरखाव और आधुनिक सुविधाओं पर खर्च करते हैं, ताकि अधिक से अधिक युवा बेहतर वातावरण में अभ्यास कर सकें। उनका मानना है कि स्वस्थ रहने के लिए महंगी दवाओं से अधिक जरूरी नियमित दिनचर्या और आत्म अनुशासन है।
डॉ. हर्षित कांबोज ने कहा कि व्यस्त जिंदगी में हमने अपने स्वास्थ्य से समझौता कर लिया है। इसमें सबसे ज्यादा बुरा हाल युवाओं का है। युवा पौष्टिक आहार से दूर हो गए हैं और अन्य खाद्य पदार्थों की ओर बढ़ रहे हैं। इससे छोटी आयु में लोगों को बड़ी-बड़ी बीमारियां लग रही है। स्वस्थ रहने का सबसे बड़ा मूल मंत्र नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद है।
नियमित व्यायाम करना बेहद जरूरी
डॉ. उज्ज्वल ने कहा कि संतुलित आहार, आदर्श दिनचर्या, नियमित व्यायाम इन दिन नियमों का जो व्यक्ति अनुशरण करता है, वह जल्द बीमार नहीं होता है। उसकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती रहती है। हमारा आधुनिकता की तरफ बढ़ना ही हमें बीमार कर रहा है। ऐसे में लोगों को चाहिए कि वे नशे से दूर रहे और आदर्श दिनचर्या का पालन करें।
डॉ. शिवानी अग्रवाल ने कहा कि चिकित्सा केवल बीमारी का इलाज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा देना भी डॉक्टरों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। भागदौड़ भरी जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या, असंतुलित खानपान और शारीरिक निष्क्रियता से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और हृदय रोग जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही है।

डॉ. शरद अग्रवाल। स्वयं

डॉ. शरद अग्रवाल। स्वयं

डॉ. शरद अग्रवाल। स्वयं