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सभी मानव प्रकृति और परमात्मा की संतान : साध्वी
Wed, 14 Jan 2026 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 14 Jan 2026 12:18 AM IST
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लोहड़ी मनाने के लिए जुटे दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के श्रद्धालु। आयोजक
- फोटो : बागपुरवा में पेड़ पर चढ़ा तेंदुआ।
संवाद न्यूज एजेंसमे
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में लोहड़ी पर दिव्य गुरु आशुतोष महाराज के तत्वाधान में संतुलन प्रकल्प के अंतर्गत जन-जागृति महोत्सव का आयोजन किया गया। साध्वी बहन ने कहा कि सभी मानव प्रकृति और परमात्मा की संतान हैं, फिर भी पुत्र जन्म पर खुशियां और पुत्री जन्म पर सांत्वना देना समाज की विकृत मानसिकता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि प्रकृति ने नर और नारी के कार्यक्षेत्र स्वयं निर्धारित किए हैं, लेकिन अहंकार और भ्रमित बुद्धि के कारण हम उसमें हस्तक्षेप कर रहे हैं, जिसके दुष्परिणाम आज समाज के सामने हैं। भारतीय सनातन परंपरा में नारी को देवी, अर्धांगिनी, जननी और अन्नपूर्णा जैसे सम्मानित नाम दिए गए हैं, जो उसकी गरिमा और कर्तव्यों को परिभाषित करते हैं।
दिव्य गुरु आशुतोष महाराज के विचारों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि कर्तव्यों को बोझ समझकर मनमानी करना स्वतंत्रता नहीं, बल्कि स्वच्छंदता है, जिसका परिणाम पीड़ा और पश्चाताप होता है। समाज में नारी को पुनः पूजनीय स्थान दिलाने के लिए ब्रह्मज्ञान के माध्यम से उसकी वास्तविक पहचान को जागृत करना आवश्यक है।कार्यक्रम के अंत में लोहड़ी की अग्नि प्रज्वलित कर खाद्य पदार्थों की आहुतियां दी गईं। साथ ही मन के विकारों को त्यागने का संकल्प लिया गया और विश्व शांति की प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में लोहड़ी पर दिव्य गुरु आशुतोष महाराज के तत्वाधान में संतुलन प्रकल्प के अंतर्गत जन-जागृति महोत्सव का आयोजन किया गया। साध्वी बहन ने कहा कि सभी मानव प्रकृति और परमात्मा की संतान हैं, फिर भी पुत्र जन्म पर खुशियां और पुत्री जन्म पर सांत्वना देना समाज की विकृत मानसिकता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि प्रकृति ने नर और नारी के कार्यक्षेत्र स्वयं निर्धारित किए हैं, लेकिन अहंकार और भ्रमित बुद्धि के कारण हम उसमें हस्तक्षेप कर रहे हैं, जिसके दुष्परिणाम आज समाज के सामने हैं। भारतीय सनातन परंपरा में नारी को देवी, अर्धांगिनी, जननी और अन्नपूर्णा जैसे सम्मानित नाम दिए गए हैं, जो उसकी गरिमा और कर्तव्यों को परिभाषित करते हैं।
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दिव्य गुरु आशुतोष महाराज के विचारों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि कर्तव्यों को बोझ समझकर मनमानी करना स्वतंत्रता नहीं, बल्कि स्वच्छंदता है, जिसका परिणाम पीड़ा और पश्चाताप होता है। समाज में नारी को पुनः पूजनीय स्थान दिलाने के लिए ब्रह्मज्ञान के माध्यम से उसकी वास्तविक पहचान को जागृत करना आवश्यक है।कार्यक्रम के अंत में लोहड़ी की अग्नि प्रज्वलित कर खाद्य पदार्थों की आहुतियां दी गईं। साथ ही मन के विकारों को त्यागने का संकल्प लिया गया और विश्व शांति की प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

लोहड़ी मनाने के लिए जुटे दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के श्रद्धालु। आयोजक- फोटो : बागपुरवा में पेड़ पर चढ़ा तेंदुआ।
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