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Yamuna Nagar News: सेंट्रल एसी की देखरेख का 60 लाख में करार, फिर भी मरीज बेहाल

Sun, 07 Jul 2024 06:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Sun, 07 Jul 2024 06:42 AM IST
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Agreement for maintenance of central AC for Rs 60 lakh, yet patients are in distress
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। इसी साल मई माह में स्वास्थ्य विभाग ने मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में सेंट्रल एसी लगाने वाली कंपनी के साथ एएमसी (एनुअल मेंटेनेंस कॉट्रैक्ट) किया था। कंपनी के साथ यह करार करीब 60 लाख रुपये में हुआ है। इसके बावजूद जिला अस्पताल का सेंट्रल एसी ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है।
सेंट्रल एसी के सभी डॉक्टरों व स्टाफ के कार्यालयों में कनेक्शन तक नहीं हैं। सेंट्रल एसी के न चलने का खामियाजा मरीज और यहां उपचार कर रहे डॉक्टर भुगत रहे हैं। सेंट्रल एसी के न चलने की वजह से अस्पताल में डॉक्टरों व स्टाफ को अलग से एसी लगवाने पड़े। इससे अस्पताल का बिजली बिल भी बढ़ गया है।
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करीब 105 करोड़ रुपये से बने 200 बेड के जिला नागरिक अस्पताल और सिविल सर्जन कार्यालय का उद्घाटन पिछले साल 11 मई को हुआ था। अस्पताल के दोनों ब्लॉक के अलावा सिविल सर्जन कार्यालय में सेंट्रल एसी लगाया गया है। एक साल तक सेंट्रल एसी को चलाने से लेकर इसके रखरखाव की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की थी। इसी साल मई माह में एक साल पूरा हो गया था।
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आने वाले दिनों में एसी चलाने में कोई दिक्कत न आए इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने सेंट्रल एसी लगाने वाली कंपनी के साथ एएमसी किया था। जिसके तहत इसे चलाने की जिम्मेदारी कंपनी की ही है। परंतु कंपनी इसे चलाने में पूरी तरह से फेल रही है। सेंट्रल एसी कभी ए ब्लॉक में चलता है तो कभी बी ब्लॉक में बंद हो जाता है।
यहां तक की सी ब्लॉक में जहां पर सिविल सर्जन, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, डिप्टी सिविल सर्जन के कार्यालय हैं वहां भी सेंट्रल एसी नहीं चल रहा। इतना ही नहीं सिविल सर्जन व पीएमओ के कार्यालय में तो सेंट्रल एसी का कनेक्शन ही नहीं है। इन दोनों के कार्यालय में दो-दो एसी लगवाए गए हैं। अन्य डिप्टी सिविल सर्जन के कार्यालय में भी एसी लगवाए हैं। इसके अलावा इनका स्टाफ भी गर्मी से बेहाल हो रहा है। ऑपरेशन थियेटरों में डॉक्टरों को सर्जरी करने में दिक्कत आ रही है।
वहीं सेंट्रल ऐसी लगाने से रखरखाव करने वाली कंपनी पर स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। उल्टा अब सेंट्रल एसी का चिलर प्लांट चलाने के लिए कहीं आरओ का पानी मांगा जा रहा है तो कभी नई टंकियां अस्पताल के भवन में रखवाई जा रही हैं। इससे अस्पताल का खर्च तो बढ़ा ही है साथ में बजट भी गड़बड़ा गया है। यह मामला अमर उजाला की ओर से लगातार प्रमुखता से उठाया जा रहा है। इस पर डीसी ने सिविल सर्जन व पीएमओ से जवाब मांगा। साथ ही पीडब्ल्यूडी के अधिकारी भी जांच करने के लिए अस्पताल में पहुंचे।
एक साल की जिम्मेदारी विभाग की : रामरतन पंवार
पीडब्ल्यूडी इलेट्रिकल विंग के एसडीओ रामरतन पंवार का कहना है कि अस्पताल का भवन हैंडओवर होने के बाद एक साल तक सेंट्रल एसी को चलाने की जिम्मेदारी हमारी थी। वह समय पूरा हो चुका है। हम यह देखने के लिए अस्पताल में गए थे कि सेंट्रल एसी होने के बावजूद अलग से एसी क्यों लगाए गए हैं और बिल ज्यादा आने की वजह क्या है।


अस्पताल ने सेंट्रल एसी लगाने वाली कंपनी के साथ करीब 60 लाख रुपये में एएमसी साइन किया है। अब एसी चलाने की जिम्मेदारी कंपनी की है। एसी ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है। - डॉ. दिव्या मंगला, पीएमओ जिला नागरिक अस्पताल।
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