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जल का प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए सोम नदी पर बनाया जाएगा बांध : मुख्यमंत्री

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jan 2025 10:12 PM IST
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A dam will be built on the Som river to ensure the flow of water: Chief Minister
बिलासपुर(व्यासपुर)। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को श्री आदि बद्री में 31 कुंडीय हवन और मंत्रोच्चारण के बीच अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव-2025 का शुभारंभ किया। यह महोत्सव 29 जनवरी से 2 फरवरी, तक चलेगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 54 करोड़ 71 लाख रुपये की लागत की 29 परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास भी किया। इनमें 26 करोड़ 71 लाख रुपये की लागत की 15 परियोजनाओं के उद्घाटन और लगभग 28 करोड़ रुपये की लागत की 14 परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने सरस्वती नदी में जल का बारहमासी प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए हिमाचल प्रदेश के साथ एक समझौता किया है। इसके तहत सोम नदी पर एक बांध का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा सोम-सरस्वती बैराज और जलाशय का निर्माण किया जा रहा है।
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इसके अलावा, सरस्वती नदी के जलग्रहण क्षेत्र में बारिश के पानी को भी नदी में प्रवाहित करने के प्रयास किये जा रहे हैं। सरस्वती नदी की पवित्रता की रक्षा करने के लिए यमुनानगर, कुरुक्षेत्र और कैथल में गंदे पानी के उपचार के लिए 25 तरल अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं का निर्माण किया गया है। इस अवसर पर उन्होंने पौधारोपण भी किया। वहीं बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए और मां सरस्वती पर आयोजित पेंटिंग स्पर्धा में प्रतियोगिता दिखाई। इस दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, कैबिनेट मंत्री श्याम सिंह राणा व कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी ने आदि बद्री गोशाला में 11-11 लाख रुपये के अनुदान राशि प्रदान करने की घोषणा की। महोत्सव के दौरान कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा, सामाजिक न्याय, अधिकारिता, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं अंत्योदय (सेवा) मंत्री कृष्ण कुमार बेदी, हरियाणा के पूर्व कैबिनेट कंवर पाल, हिमाचल के प्रदेश अध्यक्ष भाजपा राजीव बिंदल, सदस्य हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग मुकेश गर्ग ने अपने विचार व्यक्त किये। हरियाणा सरस्वती धरोहर बोर्ड के उपाध्यक्ष धूमन सिंह किरमिच ने मुख्यमंत्री सहित अन्य अतिथियों का महोत्सव में पहुंचने पर स्वागत किया।
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मुख्यमंत्री ने मां सरस्वती की चरण वंदना करते हुए कहा कि आज समय, स्थान और अवसर का अद्भुत संगम है। आज मौनी अमावस्या है। महाकुंभ का शाही स्नान है। ऋतुराज वसंत का आगमन भी हो रहा है। इसी मनमोहक वातावरण में मां सरस्वती नदी के उद्गम स्थल आदि बद्री में अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव का शुभारंभ हो रहा है। इस महोत्सव का उद्देश्य पूरे संसार का ध्यान हमारी महान सभ्यता की ओर आकर्षित करना है। इस महोत्सव के माध्यम से हम अपनी संस्कृति, सभ्यता और मूल्यों को भी अगली पीढ़ी तक पहुंचा सकते हैं।
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उन्होंने कहा कि आज ही मां सरस्वती के किनारे पर स्थित दूसरे तीर्थ स्थलों पर भी यह महोत्सव धूमधाम से शुरू हो रहा है। पेहवा तीर्थ सरस और सांस्कृतिक मेले का शुभारंभ हो रहा है। कैथल पोलड़ एवं पिसोल तीर्थ और जींद के हंस डहर तीर्थ में एक फरवरी को सरस्वती महोत्सव के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नदियों को भारतीय संस्कृति में पूजनीय माना जाता रहा है।

उन्होंने कहा कि सरस्वती नदी के प्रवाह के वैज्ञानिक प्रमाण मिल चुके हैं। सरस्वती नदी का वर्णन ऋग्वेद में बार-बार आया है। यह नदी आज की गंगा की तरह उस समय की विशाल नदियों में से एक थी। वैदिक संस्कृति सरस्वती नदी के किनारे पनपी थी। इस नदी के किनारे ऋषि-मुनियों ने अपने आश्रम बनाकर वैदिक साहित्य की रचना की, जिसका ज्ञान देने के लिए हमें पूरे विश्व में विश्व गुरु के रूप में जाना गया। यह नदी हरियाणा, राजस्थान तथा गुजरात में लगभग 1600 किलोमीटर तक प्रवाहित होते हुए अंत में अरब सागर में मिलती थी लेकिन आज सरस्वती नदी विलुप्त हो गई है।

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2015 में हुई हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की स्थापना
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में जब भाजपा सरकार बनी तो इसके पुनरुद्धार के लिए वर्ष 2015 में हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की स्थापना की गई। मुख्यमंत्री ने विकास बोर्ड को महत्वपूर्ण कार्य के लिए 75 एजेंसियों के साथ मिलकर सरस्वती नदी पर अनुसंधान का कार्य करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार पर यह पुष्टि हुई है कि आदि बद्री एवं घग्गर नदी क्षेत्र में सरस्वती नदी की लुप्त धाराएं अभी भी मौजूद हैं। इसी अनुसंधान के आधार पर सरस्वती को धरातल पर लाने की योजना बनाई है। इस दिशा में कुरुक्षेत्र व यमुनानगर में सरस्वती नदी पर 18 पुलों का निर्माण किया है। आदि बद्री में स्थित सरस्वती सरोवर में सोम नदी से पानी लाने के लिए भूमिगत पाइप लाइन बिछाई गई है।
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