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Yamuna Nagar News: 70 प्रतिशत सरकारी एंबुलेंस जर्जर, आपातकालीन सेवा पर बढ़ा संकट

Sat, 07 Mar 2026 12:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Sat, 07 Mar 2026 12:58 AM IST
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70% of government ambulances are in dilapidated condition, increasing crisis on emergency services
जिला नागरिक अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। जिले में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली सरकारी एंबुलेंस व्यवस्था बदहाल हालत में पहुंच चुकी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से संचालित एंबुलेंस में से करीब 70 प्रतिशत जर्जर हो चुकी हैं।
जिले में कुल 20 एंबुलेंस संचालित हैं। इनमें से 13 निर्धारित मियाद पूरी कर चुकी हैं। इसके बावजूद इन्हीं जर्जर वाहनों के सहारे आपातकालीन सेवाएं चलाई जा रही हैं, जिससे मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में दिक्कतें बढ़ रही हैं। जर्जर स्थिति का सीधा असर एंबुलेंस सेवा के रिस्पॉन्स टाइम पर भी पड़ा है। पहले कॉल आने के बाद एंबुलेंस औसतन 10 मिनट में मौके पर पहुंच जाती थी, लेकिन अब यह समय बढ़कर करीब 12 मिनट तक पहुंच गया है।
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जर्जर हालते में पहुंची सभी वर्ष 2018 मॉडल की हैं। सरकारी नियमों के मुताबिक कोई भी वाहन तीन लाख किलोमीटर चलने के बाद निस्प्रयोज्य की श्रेणी में आ जाता है। लेकिन जिले में 13 एंबुलेंस तीन लाख किलोमीटर से भी अधिक दूरी बहुत पहले ही तय कर चुकी हैं। इनमें से कई एंबुलेंस साढ़े तीन लाख से लेकर साढ़े चार लाख किलोमीटर तक चल चुकी हैं।
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किसी न किसी एंबुलेंस में खराबी आने के कारण उसे मरम्मत के लिए मैकेनिक के पास खड़ा करना पड़ता है। किसी की चेचिस डैमेज हो चुकी है तो किसी की लाइट तो कभी इंजन से जुड़ी समस्या सामने आती है तो कभी अन्य पार्ट खराब हो जाते हैं, जिससे सेवा प्रभावित होती है। फोन करने के बाद भी उन्हें कई बार समय पर वाहन उपलब्ध नहीं हो पाता। सड़क हादसे के घायलों और गर्भवतियों को अस्पताल पहुंचाने में भी देरी होती है।
सालभर में 20 हजार से ज्यादा कॉल
स्वास्थ्य विभाग के कंट्रोल रूम में सरकारी एंबुलेंस के लिए रोजाना औसतन 50 से 60 कॉल आती हैं। इनमें सबसे ज्यादा कॉल गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के लिए घर से अस्पताल लाने-ले जाने से संबंधित होती हैं। सालभर में कंट्रोल रूम में करीब 20 हजार कॉल दर्ज होती हैं, जिनमें लगभग एक तिहाई कॉल गर्भवतियों को अस्पताल पहुंचाने से जुड़ी होती हैं। इसके बाद सड़क हादसों में घायल लोगों को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस बुलाई जाती है। आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 में कंट्रोल रूम में 1561 कॉल दर्ज की गई थीं, जबकि जनवरी 2026 में 1432 कॉल प्राप्त हुईं।
सरकार से मांगी 20 एमडीटीएस एंबुलेंस

स्वास्थ्य विभाग ने सरकार से नई एंबुलेंस उपलब्ध कराने की मांग की है। विभाग की ओर से 13 नई एंबुलेंस के साथ-साथ 20 आधुनिक मोबाइल डाटा टर्मिनल सिस्टम (एमडीटीएस) से लैस एंबुलेंस की भी मांग भेजी गई है। इन एंबुलेंस में आधुनिक तकनीक और जीपीएस आधारित सिस्टम होगा, जिससे मरीजों तक समय पर पहुंचना आसान हो सकेगा।

जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास कुल 20 एंबुलेंस हैं। इनमें से 13 एंबुलेंस तीन लाख किलोमीटर से ज्यादा चल चुकी हैं। इनके बदले में 13 नई एंबुलेंस की डिमांड भेजी हुई है। नई एंबुलेंस के आते ही पुरानी को हटा दिया जाएगा। - डॉ. सुशीला सैनी, नोडल ऑफिसर आपातकालीन सेवाएं।

जिला नागरिक अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस। संवाद

जिला नागरिक अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस। संवाद

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