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बैंक कर्मचारियों की हड़ताल से तीन सौ करोड़ का कारोबार ठप
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निजीकरण के विरोध में बैंकों की हड़ताल से वीरवार को करीब 300 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ। इससे सबसे अधिक परेशानी व्यापारियों को हुई। इसके अलावा जमा-निकासी सहित अन्य कार्य से पहुंचे उपभोक्ताओं को बैरंग लौटना पड़ा। वहीं बैंककर्मियों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और निजीकरण के खिलाफ आवाज बुलंद की।
बैंक कर्मचारियों की दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के पहले दिन जिले में वीरवार को सभी बैंक के अधिकारी व कर्मचारी सुबह 11 बजे नगर निगम के सामने स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा पर एकत्र हुए। इसके अलावा वर्कशॉप रोड स्थित बैंक ऑफ इंडिया के पास भी कर्मचारी जमा हुए। यहां पर कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बैंक ऑफ इंडिया पर एकत्रित कर्मचारी नारेबाजी करते हुए रेलवे रोड स्थित भारतीय स्टेट बैंक पर पहुंचे। दोनों ही स्थानों पर संगठन नेताओं ने कर्मचारियों को संबोधित किया।
धरना स्थल पर यूनियन प्रधान नरोत्तम अग्रवाल ने बताया कि यह दो दिन की हड़ताल पूरे देश भर में की गई है। उनकी मांग है कि सरकारी बैंकों का निजीकरण तुरंत प्रभाव से रोके। चूंकि यह न तो जनता और न ही कर्मचारियों के हित में है। बैंकों का निजीकरण होने से पूंजीपतियों का देश की जनता के धन पर अधिकार हो जाएगा। अधिकांश जनता बैंकिंग सेवा से दूर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की जनहित योजनाएं सरकारी बैंकों से चलाई जा रही हैं। देशभर में 43 करोड़ जन धन योजना के खाते खोले गए हैं। जिसमें से लगभग 40 करोड़ खाते केवल सरकारी बैंक के कर्मचारियों ने खोले हैं। इसी तरह अटल पेंशन योजना, नोटबंदी, स्वनिधि ऋण योजना, बुढ़ापा पेंशन, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा इत्यादि योजनाएं भी सरकारी बैंकों द्वारा सफलतापूर्वक चलाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि देश में 12 सरकारी बैंक कार्यरत हैं और 22 निजी बैंक हैं। इसमें करीब 80 प्रतिशत जनता के खाते सरकारी बैंकों में हैं, तो सरकारी बैंकों को निजी हाथों में दिया जाना बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा कि ऐसा करके सरकार पूंजीवाद को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के बैंक संशोधन बिल 2021 जो संसद में लाया जा रहा है, उसका वे पुरजोर विरोध करते हैं। यदि सरकार ने उनकी मांग नहीं मानी तो बैंक बंद करके कर्मचारी बड़ा आंदोलन करेंगे।
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शहर भर में निकाला जुलूस
भारतीय स्टेट बैंक की शाखा पर कर्मचारियों ने धरना दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद कर्मचारियों ने शहर भर में जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारी रेलवे रोड, आनंद मार्केट, महावीर चौक से होते हुए वापस न्यू मार्केट चौक, पेपर मिल गेट से धरना स्थल पर पहुंचे।
जिले में 162 शाखाओं पर लटके रहे ताले
बैंकों की हड़ताल से 12 सरकारी बैंक की 162 शाखाओं पर ताला लटका रहा। हड़ताल के पहले दिन करीब तीन सौ करोड़ का कारोबार ठप रहा। इस दौरान जमा, निकासी, चेक क्लीयरेंस, डिमांड ड्रॉफ्ट, ऋण स्वीकृति सहित तमाम सेवाएं प्रभावित रही, जिससे लोगों को भारी परेशानी उठानी चाहिए। सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को हुई। हड़ताल के दौरान सभी एटीएम पर लोगों की भीड़ लगी रही।
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बैंक कर्मचारियों की दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के पहले दिन जिले में वीरवार को सभी बैंक के अधिकारी व कर्मचारी सुबह 11 बजे नगर निगम के सामने स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा पर एकत्र हुए। इसके अलावा वर्कशॉप रोड स्थित बैंक ऑफ इंडिया के पास भी कर्मचारी जमा हुए। यहां पर कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बैंक ऑफ इंडिया पर एकत्रित कर्मचारी नारेबाजी करते हुए रेलवे रोड स्थित भारतीय स्टेट बैंक पर पहुंचे। दोनों ही स्थानों पर संगठन नेताओं ने कर्मचारियों को संबोधित किया।
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धरना स्थल पर यूनियन प्रधान नरोत्तम अग्रवाल ने बताया कि यह दो दिन की हड़ताल पूरे देश भर में की गई है। उनकी मांग है कि सरकारी बैंकों का निजीकरण तुरंत प्रभाव से रोके। चूंकि यह न तो जनता और न ही कर्मचारियों के हित में है। बैंकों का निजीकरण होने से पूंजीपतियों का देश की जनता के धन पर अधिकार हो जाएगा। अधिकांश जनता बैंकिंग सेवा से दूर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की जनहित योजनाएं सरकारी बैंकों से चलाई जा रही हैं। देशभर में 43 करोड़ जन धन योजना के खाते खोले गए हैं। जिसमें से लगभग 40 करोड़ खाते केवल सरकारी बैंक के कर्मचारियों ने खोले हैं। इसी तरह अटल पेंशन योजना, नोटबंदी, स्वनिधि ऋण योजना, बुढ़ापा पेंशन, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा इत्यादि योजनाएं भी सरकारी बैंकों द्वारा सफलतापूर्वक चलाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि देश में 12 सरकारी बैंक कार्यरत हैं और 22 निजी बैंक हैं। इसमें करीब 80 प्रतिशत जनता के खाते सरकारी बैंकों में हैं, तो सरकारी बैंकों को निजी हाथों में दिया जाना बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा कि ऐसा करके सरकार पूंजीवाद को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के बैंक संशोधन बिल 2021 जो संसद में लाया जा रहा है, उसका वे पुरजोर विरोध करते हैं। यदि सरकार ने उनकी मांग नहीं मानी तो बैंक बंद करके कर्मचारी बड़ा आंदोलन करेंगे।
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शहर भर में निकाला जुलूस
भारतीय स्टेट बैंक की शाखा पर कर्मचारियों ने धरना दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद कर्मचारियों ने शहर भर में जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारी रेलवे रोड, आनंद मार्केट, महावीर चौक से होते हुए वापस न्यू मार्केट चौक, पेपर मिल गेट से धरना स्थल पर पहुंचे।
जिले में 162 शाखाओं पर लटके रहे ताले
बैंकों की हड़ताल से 12 सरकारी बैंक की 162 शाखाओं पर ताला लटका रहा। हड़ताल के पहले दिन करीब तीन सौ करोड़ का कारोबार ठप रहा। इस दौरान जमा, निकासी, चेक क्लीयरेंस, डिमांड ड्रॉफ्ट, ऋण स्वीकृति सहित तमाम सेवाएं प्रभावित रही, जिससे लोगों को भारी परेशानी उठानी चाहिए। सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को हुई। हड़ताल के दौरान सभी एटीएम पर लोगों की भीड़ लगी रही।