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किसानों का जमीन लेने से इंकार, बोले- बर्बाद करने पर तुली है सरकार
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दादूपुर नलवी नहर पर कैबिनेट के ताजा फैसले का यमुनानगर के किसानों ने विरोध किया है। किसानों ने साफ कर दिया है कि वे जमीन वापस लेने की स्थिति में नहीं हैं। उपजाऊ जमीन बंजर हो चुकी है और यहां 10 से 30 फीट गहरे गड्ढे बने हुए हैं। दादूपुर नलवी संघर्ष समिति के वाइस प्रेसिडेंट ईश्वर सिंह का कहना है कि डि-नोटिफिकेशन के खिलाफ हाई कोर्ट में मुकदमा किया हुआ है। कोर्ट ने सरकार को नोटिस देकर जवाब मांगा था, लेकिन अब सरकार ने नोटिस का जवाब देने की बजाय कैबिनेट की मीटिंग में इस नहर के डि-नोफिकेशन पर मुहर लगा दी। यह जमीन पूरी तरह से खराब है और यहां गहरे गड्ढे हैं। इसलिए क्षेत्र का कोई भी किसान जमीन को वापस नहीं लेगा।
उन्होंने कहा कि किसानों के पास मुआवजे की धनराशि भी नहीं बची, जो सरकार को वापस की जा सके। सरकार सभी किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा देकर जमीन अपने पास रखे, चाहे यहां नहर बनाए या किसी अन्य काम के लिए प्रयोग करे। ऊबड़-खाबड़ जमीन पर न खेती तो हो ही नहीं सकती, क्योंकि इस जमीन की उपजाऊ क्षमता खत्म हो चुकी है। अगर सरकार ने जबरदस्ती की तो किसानों को कड़े फैसले लेने को मजबूर होना पड़ सकता है।
कब क्या हुआ
-यमुनानगर, कुरुक्षेत्र और अंबाला जिलों में सिंचाई और भू-जल की रिचार्जिंग के लिए दादूपुर नलवी योजना 1985 में शुरू की गई थी।
-1987-90 के दौरान 190.67 एकड़ जमीन एक्वायर हुई थी।
-साल 2004 और उसके बाद 860 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई।
-22 अगस्त 2017 को किसानों ने लघु सचिवालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया, जो अभी भी जारी है।
-27 सितंबर 2017 को कैबिनेट की मीटिंग में दादूपुर नलवी नहर की जमीन को डि-नोटिफाई करने का नोटिफिकेशन जारी करने का अप्रूवल दिया गया।
-कैबिनेट की मीटिंग के बाद जो नोटिफिकेशन 25 दिसंबर 2017 को होनी थी। वह दस महीने यानि 311 दिन बाद तीन अगस्त 2018 को हुई।
-राज्यपाल ने राइट टू फेयर कंपनसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी एन लैंड एक्वीजिशन, रिहैबीलिटेशन एंड रिसेटलमेंट एक्ट 2013 की सेक्शन 101-ए की पावर का इस्तेमाल करते हुए गजट डि-नोटिफिकेशन किया।
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उन्होंने कहा कि किसानों के पास मुआवजे की धनराशि भी नहीं बची, जो सरकार को वापस की जा सके। सरकार सभी किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा देकर जमीन अपने पास रखे, चाहे यहां नहर बनाए या किसी अन्य काम के लिए प्रयोग करे। ऊबड़-खाबड़ जमीन पर न खेती तो हो ही नहीं सकती, क्योंकि इस जमीन की उपजाऊ क्षमता खत्म हो चुकी है। अगर सरकार ने जबरदस्ती की तो किसानों को कड़े फैसले लेने को मजबूर होना पड़ सकता है।
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कब क्या हुआ
-यमुनानगर, कुरुक्षेत्र और अंबाला जिलों में सिंचाई और भू-जल की रिचार्जिंग के लिए दादूपुर नलवी योजना 1985 में शुरू की गई थी।
-1987-90 के दौरान 190.67 एकड़ जमीन एक्वायर हुई थी।
-साल 2004 और उसके बाद 860 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई।
-22 अगस्त 2017 को किसानों ने लघु सचिवालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया, जो अभी भी जारी है।
-27 सितंबर 2017 को कैबिनेट की मीटिंग में दादूपुर नलवी नहर की जमीन को डि-नोटिफाई करने का नोटिफिकेशन जारी करने का अप्रूवल दिया गया।
-कैबिनेट की मीटिंग के बाद जो नोटिफिकेशन 25 दिसंबर 2017 को होनी थी। वह दस महीने यानि 311 दिन बाद तीन अगस्त 2018 को हुई।
-राज्यपाल ने राइट टू फेयर कंपनसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी एन लैंड एक्वीजिशन, रिहैबीलिटेशन एंड रिसेटलमेंट एक्ट 2013 की सेक्शन 101-ए की पावर का इस्तेमाल करते हुए गजट डि-नोटिफिकेशन किया।
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