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यहां पढ़ाई के साथ सिखाया जाता है स्वच्छता और देशभक्ति का पाठ
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एंकर
बच्चों, शिक्षकों और ग्रामीणों की मेहनत से प्रदेश के सबसे खूबसूरत स्कूलों की कतार में खड़ा हुआ गुमथला का प्राइमरी स्कूल
-मिल चुका है ब्लॉक के सबसे खूबसूरत स्कूल का अवार्ड
यमुनानगर
भारी-भरकम शुल्क और भरपूर आर्थिक मदद से आधुनिक सुविधायुक्त स्कूल खड़ा करना तो आसान है, लेकिन ग्रामीण परिवेश में सहयोग के बगैर एक सरकारी स्कूल का शहर के बड़े प्राइवेट स्कूलों के समान सौंदर्यकरण कर गुणवत्ता युक्त शिक्षा उपलब्ध कराना किसी चुनौती से कम नहीं है। गुमथला राव स्थित प्राथमिक पाठशाला के स्टाफ ने ग्रामीणों की मदद से स्कूल की ऐसी तस्वीर बदली कि उनके स्कूल ने ब्लॉक के सबसे सुंदर स्कूल का खिताब अपने नाम किया। इससे उत्साहित स्टाफ सदस्यों व बच्चों स्कूल परिसर को इतना सुंदर बना दिया कि अब यह जिले के सबसे खूबसूरत स्कूलों की कतार में सबसे आगे खड़ा है। मुख्यमंत्री स्कूल सौंदर्य करण योजना की टीम यहां चार बार दौरा कर चुकी है और टीम के सदस्य भी तारीफ कर चुके हैं। इस स्कूल से प्रेरणा लेकर जिले के अन्य सरकारी स्कूलों ने भी अपने परिसर का सौंदर्य करण करना शुरू कर दिया है।
बॉक्स
प्राकृतिक छटा बिखेरती इको फ्रेंडली बिल्डिंग
चारों तरफ खेतों की हरियाली के बीच बनी स्कूल की बिल्डिंग रिसॉर्ट की तरह नजर आती है। मेन गेट के सामने रंग बिरंगे फूल खिले हुए हैं। स्कूल में इंट्री करते ही खूबसूरत पार्क, जहां तरह-तरह के पौधे लगे हैं। इन पर खिले फूलों पर तितली मंडराती नजर आती हैं। चाहरदीवारी और मुख्य बिल्डिंग को बेहतरीन पेंट से सजाया गया है। स्कूल में पीने का पानी, शौचालय, पार्क, इको फ्रेंडली बिल्डिंग, दीवारों पर वॉल पेंटिंग, खेल मैदान, गलियारों को पक्का करने सहित विभिन्न कार्य किए गए हैं।
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हर बच्चे के नाम का पौधा
स्कूल में पढ़ने वाला प्रत्येक बच्चा अपने जन्म दिन पर पौधा लगाता है और उसकी रोजाना देखभाल करता है। प्राइमरी स्कूल होने की वजह से छोटे-छोटे बच्चे पौधों की देखभाल खुद करते हैं। यहां पर सफाई से लेकर पढ़ाई तक पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। विद्यार्थियों को मिडे-डे मील को लेकर रसोई घर को धुआं रहित बनाकर गैस चूल्हों की व्यवस्था की गई है।
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शहीदों को प्रणाम करके शुरू करते हैं पढ़ाई
विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों की भी जानकारी दी जा रही है, ताकि विद्यार्थियों को संस्कारवान बनाया जा सके। स्कूल परिसर में इंकलाब मंदिर की तरफ से भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु समेत तमाम शहीदों की प्रतिमाएं लगाई गई हैं। बच्चे सुबह देश के शहीदों और भारत माता को प्रणाम कर अपनी पढ़ाई की शुरुआत करते हैं। छुट्टी के वक्त भी सभी बच्चे यहां नतमस्तक होकर घर जाते हैं। यहां जिले का सबसे ऊंचा तिरंगा भी स्थापित है।
एनएसजी के कमांडो ने की सराहना
-मुंबई ताज हमला और कारगिल योद्धा एनएसजी कमांडो रामेश्वर श्योराण हाल ही में इंकलाब मंदिर पहुंचे तो उन्होंने भी स्कूल की खूबसूरती की तारीफ की। उन्होंने कहा कि मैंने कई देशों का दौरा किया, लेकिन इस तरह का स्कूल कहीं नहीं देखा, जहां खूबसूरती के साथ देशभक्ति का जज्बा हो। उनका कहना था कि प्रदेश के सभी सरकारी स्कूल ऐसे हो जाएं तो सबकुछ बदल जाएगा।
कोट्स
-हमने अपनी जिम्मेदारी निभाई है। देश को सुंदर बनाने की पहल अपने घर से ही करनी होगी। स्कूल हमारा घर है और जब घर सुंदर होगा तो मन और दिमाग भी सुंदर होगा। इसी सोच के साथ सभी स्टाफ सदस्यों ने स्कूल को बेहतर से बेहतर बनाने का एक छोटा प्रयास किया है। इस प्रयास में गांव के महिला-पुरूष भी अब हमारा साथ देने लगे हैं। हमारे लिए तो गर्व की बात यह है कि हमारे स्कूल की व्यवस्था देख आस-पड़ोस के स्कूलों में भी सौंदर्यकरण का काम शुरू किया गया है। -रतन सिंह कश्यप, मुख्य अध्यापक
फोटो नंबर 07, 08, 09
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बच्चों, शिक्षकों और ग्रामीणों की मेहनत से प्रदेश के सबसे खूबसूरत स्कूलों की कतार में खड़ा हुआ गुमथला का प्राइमरी स्कूल
-मिल चुका है ब्लॉक के सबसे खूबसूरत स्कूल का अवार्ड
यमुनानगर
भारी-भरकम शुल्क और भरपूर आर्थिक मदद से आधुनिक सुविधायुक्त स्कूल खड़ा करना तो आसान है, लेकिन ग्रामीण परिवेश में सहयोग के बगैर एक सरकारी स्कूल का शहर के बड़े प्राइवेट स्कूलों के समान सौंदर्यकरण कर गुणवत्ता युक्त शिक्षा उपलब्ध कराना किसी चुनौती से कम नहीं है। गुमथला राव स्थित प्राथमिक पाठशाला के स्टाफ ने ग्रामीणों की मदद से स्कूल की ऐसी तस्वीर बदली कि उनके स्कूल ने ब्लॉक के सबसे सुंदर स्कूल का खिताब अपने नाम किया। इससे उत्साहित स्टाफ सदस्यों व बच्चों स्कूल परिसर को इतना सुंदर बना दिया कि अब यह जिले के सबसे खूबसूरत स्कूलों की कतार में सबसे आगे खड़ा है। मुख्यमंत्री स्कूल सौंदर्य करण योजना की टीम यहां चार बार दौरा कर चुकी है और टीम के सदस्य भी तारीफ कर चुके हैं। इस स्कूल से प्रेरणा लेकर जिले के अन्य सरकारी स्कूलों ने भी अपने परिसर का सौंदर्य करण करना शुरू कर दिया है।
बॉक्स
प्राकृतिक छटा बिखेरती इको फ्रेंडली बिल्डिंग
चारों तरफ खेतों की हरियाली के बीच बनी स्कूल की बिल्डिंग रिसॉर्ट की तरह नजर आती है। मेन गेट के सामने रंग बिरंगे फूल खिले हुए हैं। स्कूल में इंट्री करते ही खूबसूरत पार्क, जहां तरह-तरह के पौधे लगे हैं। इन पर खिले फूलों पर तितली मंडराती नजर आती हैं। चाहरदीवारी और मुख्य बिल्डिंग को बेहतरीन पेंट से सजाया गया है। स्कूल में पीने का पानी, शौचालय, पार्क, इको फ्रेंडली बिल्डिंग, दीवारों पर वॉल पेंटिंग, खेल मैदान, गलियारों को पक्का करने सहित विभिन्न कार्य किए गए हैं।
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हर बच्चे के नाम का पौधा
स्कूल में पढ़ने वाला प्रत्येक बच्चा अपने जन्म दिन पर पौधा लगाता है और उसकी रोजाना देखभाल करता है। प्राइमरी स्कूल होने की वजह से छोटे-छोटे बच्चे पौधों की देखभाल खुद करते हैं। यहां पर सफाई से लेकर पढ़ाई तक पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। विद्यार्थियों को मिडे-डे मील को लेकर रसोई घर को धुआं रहित बनाकर गैस चूल्हों की व्यवस्था की गई है।
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शहीदों को प्रणाम करके शुरू करते हैं पढ़ाई
विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों की भी जानकारी दी जा रही है, ताकि विद्यार्थियों को संस्कारवान बनाया जा सके। स्कूल परिसर में इंकलाब मंदिर की तरफ से भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु समेत तमाम शहीदों की प्रतिमाएं लगाई गई हैं। बच्चे सुबह देश के शहीदों और भारत माता को प्रणाम कर अपनी पढ़ाई की शुरुआत करते हैं। छुट्टी के वक्त भी सभी बच्चे यहां नतमस्तक होकर घर जाते हैं। यहां जिले का सबसे ऊंचा तिरंगा भी स्थापित है।
एनएसजी के कमांडो ने की सराहना
-मुंबई ताज हमला और कारगिल योद्धा एनएसजी कमांडो रामेश्वर श्योराण हाल ही में इंकलाब मंदिर पहुंचे तो उन्होंने भी स्कूल की खूबसूरती की तारीफ की। उन्होंने कहा कि मैंने कई देशों का दौरा किया, लेकिन इस तरह का स्कूल कहीं नहीं देखा, जहां खूबसूरती के साथ देशभक्ति का जज्बा हो। उनका कहना था कि प्रदेश के सभी सरकारी स्कूल ऐसे हो जाएं तो सबकुछ बदल जाएगा।
कोट्स
-हमने अपनी जिम्मेदारी निभाई है। देश को सुंदर बनाने की पहल अपने घर से ही करनी होगी। स्कूल हमारा घर है और जब घर सुंदर होगा तो मन और दिमाग भी सुंदर होगा। इसी सोच के साथ सभी स्टाफ सदस्यों ने स्कूल को बेहतर से बेहतर बनाने का एक छोटा प्रयास किया है। इस प्रयास में गांव के महिला-पुरूष भी अब हमारा साथ देने लगे हैं। हमारे लिए तो गर्व की बात यह है कि हमारे स्कूल की व्यवस्था देख आस-पड़ोस के स्कूलों में भी सौंदर्यकरण का काम शुरू किया गया है। -रतन सिंह कश्यप, मुख्य अध्यापक
फोटो नंबर 07, 08, 09