समाधान: हरियाणा-यूपी के बीच सीमा विवाद निपटाने के लिए लगाए जाएंगे 70 फुट के विशेष खंभे, पानी में भी नहीं होंगे खराब
इससे पहले भी दोनों प्रदेशों का सीमा विवाद निपटाने को वर्ष 1974 में दीक्षित अवॉर्ड के तहत यमुना में सीमा निर्धारण के लिए खंभे लगाए गए थे। इस समय ज्यादातर पिलर्स गायब हो चुके हैं।
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यमुना नदी की भूमि को लेकर पांच दशकों से हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बीच सीमा विवाद को निपटाने के लिए भारतीय सर्वेक्षण विभाग (सर्वे ऑफ इंडिया) ने बॉर्डर लाइन तय करनी शुरू कर दी है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत बॉर्डर लाइन पर 70 फुट के विशेष रूप से डिजाइन किए गए खंभे लगाए जा रहे हैं, जो भविष्य के लिए दोनों प्रदेशों की हद होंगे।
हरियाणा ने अपने खंभे का डिजाइन विशेष रूप से पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से तैयार कराया है। इन खंभों की खास बात ये है कि ये वर्षों पानी में रहने के बावजूद खराब नहीं होंगे। इससे पहले भी दोनों प्रदेशों का सीमा विवाद निपटाने को वर्ष 1974 में दीक्षित अवॉर्ड के तहत यमुना में सीमा निर्धारण के लिए खंभे लगाए गए थे। इस समय ज्यादातर पिलर्स गायब हो चुके हैं।
हर साल होने वाले झगड़ों को देखते हुए दोनों प्रदेशों की मुख्यमंत्री की रुचि से इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ। प्रोजेक्ट के तहत उत्तर प्रदेश के शामली के चकबड़ी और हरियाणा के करनाल के बड़ी गांव को शामिल किया गया। बड़ी गांव में 12 खंभे लगाए जा चुके हैं, अब यूपी प्रशासन की तरफ से कार्य होना शेष है।
हरियाणा के 102 और यूपी के 132 गांवों का है विवाद
यमुना नदी के साथ हरियाणा के छह जिलों यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद और पलवल के 102 गांव और यूपी के पांच जिलों सहारनपुर, शामली, बागपत, गौतमबुद्ध नगर, अलीगढ़ के 132 गांव लगते हैं। करीब 312 किलोमीटर लंबे इस क्षेत्र में 5 हजार एकड़ से अधिक जमीन पर विवाद है। हर साल यमुना नदी अपनी धारा मोड़ लेती है। ऐसे में जमीन को लेकर किसानों में कई बार खूनी संघर्ष भी हो चुका है। जमीन को लेकर सैकड़ों की संख्या में अदालतों में मामले पेंडिंग हैं।
ऑड-ईवन फार्मूले पर लगेंगे खंभे
सीमा पर ऑड ईवन फार्मूले से खंभे लगाए जाएंगे। एक हरियाणा से तो दूसरा यूपी से होगा। 70 फुट के खंभे को 50 फुट नीचे जमीन में गाड़ा जाएगा, ताकि यमुना में पानी के बहाव से उखड़ न सके या फिर कोई उसे उखाड़ न सके। गोलाकार खंभा पूरी तरह से सीमेंट-बजरी से तैयार किया है। एक खंभे पर करीब दो लाख रुपये खर्च आ रहा है।
सीमा विवाद सुलझाने को दोनों प्रदेश के अधिकारियों की कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। सीमा तय करने के लिए सर्वे ऑफ इंडिया को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। पायलेट प्रोजेक्ट के तहत गांव बड़ी में पिलर्स लगाए गए हैं। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने पर वर्षों से चला आ रहा यह विवाद खत्म हो जाएगा। - संजीव कौशल, एसीएस, राजस्व विभाग।