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यूक्रेन में संकट: भारतीय छात्रों ने कहा- स्ट्रीट वॉर शुरू होने से सील किए मेट्रो स्टेशन, बाहर न निकलने के निर्देश
Sun, 27 Feb 2022 11:01 PM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Sun, 27 Feb 2022 11:01 PM IST
सार
बंकर में फंसे विद्यार्थियों ने कहा कि गोलीबारी और बम के धमाकों से दिल दहल उठता है। बिगड़े हालातों के बीच यूक्रेन में फंसे बच्चों के परिजन परेशान है। सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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यूक्रेन के रोमानिया बॉर्डर पर साथियों के साथ फंसा खरखौदा निवासी सिद्धार्थ।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए हमले के कारण हरियाणा के सोनीपत जिले के कई विद्यार्थी यूक्रेन में ही फंसे हुए हैं। परिजनों से फोन पर संपर्क करते हुए विद्यार्थियों ने बताया कि खारकीव में स्ट्रीट वॉर शुरू होने से सभी मेट्रो स्टेशन सील कर दिए गए हैं। जिस कारण सैकड़ों विद्यार्थी बंकरों में ही फंस गए हैं। सेना ने सख्त निर्देश दिए हैं कि कोई भी विद्यार्थी बाहर न निकलें। विद्यार्थियों ने बताया कि गोलीबारी और बम के धमाकों की आवाज से दिल दहल उठता है।
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यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों के परिजनों की चिंता समय के साथ बढ़ती जा रही है। परिजनों ने भारत सरकार से मांग की है कि सभी विद्यार्थियों को जल्द से जल्द देश में वापसी के सार्थक प्रयास किए जाएं। रूस की सेना यूक्रेन पर लगातार बमबारी कर रही है। यूक्रेन की राजधानी कीव पर कब्जे की कार्रवाई तेज हो गई है।
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जिस कारण यहां फंसे अपने बच्चों की कुशलता के लिए परिजन लगातार प्रार्थनाएं कर रहे हैं। रविवार को एयर इंडिया की फ्लाइट से विद्यार्थियों के अपने देश पहुंचने के बाद अन्य परिजनों को भी अपने बच्चों के सकुशल लौटने की उम्मीद जगी है। बंकरों में फंसे विद्यार्थियों को भी जल्द सकुशल निकलवाने के लिए परिजन सरकार से ठोस कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं। परिजनों से फोन पर संपर्क करते हुए वहां फंसे विद्यार्थी अपनी कुशलता के बारे में परिजनों को बता रहे हैं।
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खुद ही हंगरी बॉर्डर तक पहुंचे कुछ विद्यार्थी
बंकरों में फंसे विद्यार्थियों ने बताया कि रूस द्वारा हमला तेज करने के बाद विद्यार्थियों की बेचैनी बढ़ रही है। यूनिवर्सिटी व किराये के भवनों में रहने वाले विद्यार्थी खुद ही हंगरी बॉर्डर पर पहुंच रहे हैं। जहां अपना पासपोर्ट दिखाते हुए बॉर्डर पार किया है। हालांकि दूतावास द्वारा विद्यार्थियों को खुद ही इस प्रकार का कदम उठाने से मना किया जा रहा है।
रोमानिया बॉर्डर पर फंसा खरखौदा का सिद्धार्थ
खरखौदा। यूक्रेन व रूस के बीच छिड़े युद्ध में खरखौदा वासी एक परिवार भी अपने बेटे को लेकर परेशान है। शहरवासी डॉ. राजबीर सैनी का कहना है कि उसका बेटा सिद्धार्थ सैनी रोमानिया बॉर्डर पर फंसा हुआ है। भारतीय दूतावास के सुझाव पर वह साथियों के साथ वहां पहुंचा था, लेकिन अब उन्हें बार्डर पार नहीं करने दिया जा रहा। न ही बॉर्डर पर रहने की सुविधा दी जा रही है। ऐसे में सभी छात्र -8 डिग्री की सर्दी में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
डॉ. राजबीर सैनी की माने तो उनके बेटे ने उन्हें बताया कि भारतीय नागरिकों को वहां भेदभाव का सामना तक करना पड़ रहा है। उन्हें कैफे या शेल्टर में प्रवेश तक की अनुमति नहीं है, केवल यूक्रेन के लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर जाने की अनुमति है और भारतीयों को अत्यधिक ठंड में बाहर ही समय बीताना पड़ रहा है।
ऐसे में दो दिन पहले जहां डॉ. राजबीर बेटे सिद्धार्थ को सकुशल घर लाने की मांग को लेकर जिला उपायुक्त से मिल चुके हैं, वहीं रविवार को उन्होंने एसडीएम संजय बिश्नोई से बेटे की वतन वापसी की मांग की और एक मांगपत्र भी दिया है। जिसमें सरकार से अनुरोध किया है कि जब तक विद्यार्थी वहां पर फंसे हुए हैं। कम से कम वहां जीवित रहने के लिए न्यूनतम आवश्यकताएं प्रदान करवाई जाएं और जल्द से जल्द बच्चों को वापस लाया जाए।
उच्चधिकारियों को भेज दिया गया है पत्र : एसडीएम
खरखौदा एसडीएम संजय बिश्नोई ने कहा कि छात्र के पिता द्वारा मांगपत्र दिया गया था, जिसे तत्काल पूर्व विवरण सहित उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। भारत सरकार यूक्रेन से छात्रों को देश लाने में तत्परता दिखा रही है, जल्द ही सभी विद्यार्थियों की घर वापसी करवा ली जाएगी।