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Sonipat News: पॉक्सो और किडनैपिंग केस में आरोपी युवक बरी
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नारनौल। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने पॉक्सो और अपहरण से जुड़े एक गंभीर मामले में आरोपी युवक को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। यह फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हर्षाली चौधरी की अदालत ने सुनाया है।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता पंकज सैनी ने बताया कि अदालत ने मामले में प्रस्तुत उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद आरोपी को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। उक्त मामला नांगल चौधरी थाना क्षेत्र का है, जहां 16 जुलाई 2025 को एक नाबालिग लड़की ने युवक पर किडनैपिंग व पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करवाई थी।
मामले में पुलिस ने आरोपी को 16 जुलाई को ही गिरफ्तार किया था, जिसके उपरांत बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कोर्ट में आरोपी की तरफ से जमानत याचिका दायर की। जिसमें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्पेशल पॉक्सो कोर्ट केपी सिंह ने तथ्यों एवं दलीलों के आधार पर 22 अगस्त 2025 को आरोपी की जमानत याचिका मंजूर कर ली थी। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश किया व इसके बाद मामले की सुनवाई शुरू हुई।
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बचाव पक्ष के अधिवक्ता के अनुसार सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 12 गवाहों के बयान दर्ज कराए व साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। उसके बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हर्षाली चौधरी ने दोनों पक्षों की बहस सुनने और साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को बरी कर दिया।
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बचाव पक्ष के अधिवक्ता पंकज सैनी ने बताया कि अदालत ने मामले में प्रस्तुत उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद आरोपी को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। उक्त मामला नांगल चौधरी थाना क्षेत्र का है, जहां 16 जुलाई 2025 को एक नाबालिग लड़की ने युवक पर किडनैपिंग व पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करवाई थी।
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मामले में पुलिस ने आरोपी को 16 जुलाई को ही गिरफ्तार किया था, जिसके उपरांत बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कोर्ट में आरोपी की तरफ से जमानत याचिका दायर की। जिसमें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्पेशल पॉक्सो कोर्ट केपी सिंह ने तथ्यों एवं दलीलों के आधार पर 22 अगस्त 2025 को आरोपी की जमानत याचिका मंजूर कर ली थी। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश किया व इसके बाद मामले की सुनवाई शुरू हुई।
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बचाव पक्ष के अधिवक्ता के अनुसार सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 12 गवाहों के बयान दर्ज कराए व साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। उसके बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हर्षाली चौधरी ने दोनों पक्षों की बहस सुनने और साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को बरी कर दिया।