फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sonipat News ›   Yamuna's water became clean in Lockdown

लॉकडाउन में पीने लायक हुआ यमुना का पानी

Fri, 05 Jun 2020 12:18 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jun 2020 12:18 AM IST
विज्ञापन
Yamuna's water became clean in Lockdown
जिले में लगाने के लिए तैयार की गई पीपल की पौध। - फोटो : Sonipat
सोनीपत। कोरोना वायरस संक्रमण रोकने को लागू किए गए लॉकडाउन से जहां परेशानी हुई, वहीं प्रदूषण जरूर कम हो गया है और हर कोई साफ हवा में सांस ले रहा है। यह प्रदूषण भी पिछले साल के इन महीनों के मुकाबले 50 प्रतिशत कम हुआ है, क्योंकि सड़कों पर कोई गाड़ी नहीं दौड़ रही थी तो फैक्टरी भी बंद पड़ी हुई थीं। लॉकडाउन से केवल हवा ही शुद्ध नहीं हुई है, बल्कि यमुना का पानी भी पीने लायक हो गया है और यह हालात 40 साल बाद हुए हैं। हालांकि अनलॉक होते ही धीरे-धीरे प्रदूषण बढ़ना शुरू हो गया है, लेकिन उसमें अभी इतनी बढ़ोतरी नहीं हुई है कि उससे परेशानी हो सके। पर्यावरणविद् व डाक्टरों का मानना है कि पर्यावरण को बेहतर रखने के लिए पौधे जरूर लगाने चाहिए, जिससे हवा शुद्ध मिल सकेगी।
विज्ञापन

हवा में प्रदूषण की जांच के लिए पीएम (परटिक्यूलेट मैटर) 2.5 व पीएम 10 की स्थिति को देखा जाता है। उनका पता करने के बाद दोनों का औसत निकाला जाता है, जिसे औसत एक्यूआई (एअर क्वालिटी इंडेक्स) कहा जाता है। इस एक्यूआई से ही पता चलता है कि हवा में कितना प्रदूषण है। लॉकडाउन से पहले तक यह एक्यूआई 122.29 पर चल रहा था, जबकि लॉकडाउन शुरू होते ही 102.63 पर पहुंच गया था। उसके बाद मार्च, अप्रैल व मई के एक्यूआई का औसत निकाला गया तो वह काफी नीचे मिला। मार्च में जहां एक्यूआई 111.85 था, वह अप्रैल में पूर्ण लॉकडाउन होने पर 83.81 तक आ गया और मई में कुछ छूट मिलने पर यह 91 तक पहुंच गया। इस बार पिछले साल के इन महीनों के मुकाबले एक्यूआई काफी नीचे रहा। अब धीरे-धीरे यह बढ़ रहा है, लेकिन सांस लेने के अनुकूल है।
विज्ञापन

यमुना का पानी 40 साल आरओ के पानी जैसा पीने लायक
लॉकडाउन में यमुना का पानी पीने लायक हो गया था, क्योंकि उसका टीडीएस काफी नीचे पहुंच गया था। एक निजी कंपनी की जांच के अनुसार जहां दिसंबर 2019 में यमुना के पानी का टीडीएस 1900 से ऊपर था, वहीं अप्रैल महीने में यह केवल 134 पर पहुंच गया था। इतने टीडीएस के पानी को पीने के लिए इस्तेमाल किया जाता है और आरओ का पानी भी लगभग इतने टीडीएस का होता है। यह माना जा रहा है कि यमुना का पानी 40 साल बाद इतना शुद्ध हुआ है और इसका असर आसपास के गांवों के पानी पर भी पड़ा है। क्योंकि यमुना के पानी पर वहां का भू जल स्तर निर्भर करता है। यमुना का पानी शुद्ध होने से आसपास के गांवों के पानी पर भी असर पड़ गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

जिले में 7 हजार फैक्टरी बंद रहीं तो 2.5 लाख वाहन नहीं चले
लॉकडाउन में सबकुछ पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। जहां जिले में लगभग 7 हजार फैक्टरी है तो वह सभी बंद पड़ी हुई थी। जितनी भी फैक्टरी चल रही थी, उनमें प्रदूषण का कोई काम नहीं होता है। इस तरह फैक्टरी से प्रदूषण फैलना बंद हो गया थरा। वहीं जिले में लगभग 2.5 लाख वाहन है और वह भी सड़कों पर नहीं चल रहे थे। इसके अलावा दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे पर रोजाना लगभग एक लाख वाहन दौड़ते हैं और वह भी बंद थे। जिसका जिले में प्रदूषण कम होने का बड़ा कारण है। मई में जरूर कुछ प्रदूषण गेहूं की थ्रेसिंग व फांस जलाने के कारण हुआ था, लेकिन उसका भी कम ही असर रहा।

प्रदूषण की कब कितनी गुणवत्ता
वर्ष 2019 2020
मार्च 122.03 111.85
अप्रैल 176.37 83.81
मई 184 91
उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संदीप लठवाल ने बताया कि जिस तरह प्रदूषण बढ़ता है, उससे सांस व गले के रोग बढ़ सकते हैं। वहीं पहले से सांस के रोगियों को हार्टअटैक का खतरा होता है। प्रदूषण के कारण त्वचा रोग भी होने लगते हैं, लेकिन सांस व गले के रोग सबसे ज्यादा होते हैं। ऐसे में किसी जरूरी काम से बाहर जाना पड़े तो मास्क लगाकर या मुंह पर कपड़ा बांधकर बाहर निकला जाए। लेकिन लॉकडाउन में प्रदूषण कम रहा और इस तरह के रोगी भी कम रहे। इसके साथ ही मास्क पहले ही सभी के लिए जरूरी हो गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed