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Sonipat News: एचवीएसी मरम्मत में अग्रिम भुगतान के बावजूद काम अधूरा, कर्मचारी को अंतरिम जमानत मिली

Fri, 04 Sep 2026 07:48 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Fri, 04 Sep 2026 07:48 PM IST
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Work left incomplete despite advance payment for HVAC repairs; employee granted interim bail.
संवाद न्यूज एजेंसी
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सोनीपत। दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में एचवीएसी प्रणाली की मरम्मत का काम अधूरा रह गया। कंपनी को 28 लाख 45 हजार 576 रुपये का अग्रिम भुगतान किया गया था। इस मामले में आरोपी कंपनी के कर्मचारी सुभाषचंद्र डी. महेंद्रकर को अदालत से राहत मिली है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सरताज बसवाना ने उन्हें अंतरिम अग्रिम जमानत दी।
अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह विवाद अनुबंध संबंधी दायित्व पूरा न करने से जुड़ा है। आरोपी की कोई स्पष्ट या प्रत्यक्ष भूमिका सामने नहीं आई है। उससे किसी तरह की बरामदगी भी नहीं होनी है। विश्वविद्यालय के अधिकारी डॉ. अमित कुमार की शिकायत पर 13 अगस्त 2025 को प्राथमिकी दर्ज हुई थी। विश्वविद्यालय ने 18 जुलाई 2024 से 17 जुलाई 2025 तक एचवीएसी मरम्मत का काम एक निजी कंपनी को सौंपा था। कंपनी ने 19 सितंबर 2024 को निरीक्षण के बाद अतिरिक्त मरम्मत के लिए अनुमान दिया। विश्वविद्यालय ने 13 नवंबर 2024 को पत्र भेजकर तीन सप्ताह में काम पूरा करने को कहा। पूरी राशि का अग्रिम भुगतान होने के बावजूद निर्धारित समय में काम पूरा नहीं हुआ। कंपनी ने काम पूरा न करने के अलग-अलग कारण बताए।
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विश्वविद्यालय ने राशि की व्यवस्था कर कंपनी को कई बार पत्र और ई-मेल भेजे। हालांकि, काम आगे नहीं बढ़ा और विश्वविद्यालय को दूसरी कंपनी से काम करवाना पड़ा। एचवीएसी प्रणाली के अतिरिक्त पुर्जों के लिए कंपनी ने 6.15 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग की थी। इसके लिए विश्वविद्यालय को 6.15 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ा। इस तरह विश्वविद्यालय को अतिरिक्त आर्थिक भार उठाना पड़ा।
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अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता आशीष वत्स ने दलील दी। उन्होंने कहा कि यह मामला मूलरूप से दीवानी और अनुबंध संबंधी विवाद है। इसे आपराधिक रूप दे दिया गया है। बचाव पक्ष ने बताया कि सुभाषचंद्र कंपनी का केवल वेतनभोगी कर्मचारी है। उसकी संबंधित कारोबारी लेनदेन में कोई व्यक्तिगत भूमिका नहीं थी। उसे न तो अनुबंध करने का अधिकार था और न ही कोई व्यक्तिगत लाभ मिला।


अदालत का निर्णय
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना निर्णय सुनाया। उसने माना कि कंपनी को काम सौंपा गया था, पर अग्रिम भुगतान के बावजूद काम पूरा नहीं हुआ। विश्वविद्यालय को आर्थिक नुकसान होने का आरोप है। याचिकाकर्ता कंपनी का कर्मचारी है, उसके अधिकृत होने या लाभ मिलने का कोई तथ्य नहीं मिला। उसका कोई आपराधिक पूर्व इतिहास नहीं है और उससे बरामदगी भी नहीं होनी है, इसलिए हिरासत में पूछताछ का आधार नहीं बनता। अदालत ने सुभाषचंद्र को तीन दिन में मुरथल थाने में जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर 2026 को होगी।
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