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Sonipat News: अधर्म पर धर्म की जीत, रावण दहन के साथ गूंजे जय श्रीराम के जयघोष

Sun, 13 Oct 2024 04:01 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Sun, 13 Oct 2024 04:01 AM IST
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Victory of religion over unrighteousness, shouts of Jai Shri Ram echoed with Ravana Dahan.
सोनीपत। जिले भर में अधर्म पर धर्म, बुराई पर अच्छाई व असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक दशहरा पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। शहर में करीब 15 विभिन्न स्थानों पर रावण, मेघनाद व कुंभकरण के पुतलों का दहन किया गया। शहर में श्री रामलीला सभा की ओर से सबसे ऊंचा 52 फीट के रावण का पुतला कामी रोड स्थित रामलीला मैदान में जलाया गया। वहीं, कुंभकरण व मेघनाद के 45-45 फीट ऊंचे पुतलों का दहन किया गया।
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इससे पहले शहरभर में धार्मिक संस्थाओं की ओर से बैंड-बाजों के साथ शोभायात्रा निकाली गई। झांकियों को देखने के लिए बाजारों में लोगों की भीड़ उमड़ी। शोभायात्रा के चलते कई जगह जाम की स्थिति भी बनी रही। लोगों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा। दहन से पहले विभिन्न जगह चल रही रामलीला में श्रीराम-रावण के युद्ध का मंचन दिखाया गया। अहंकारी दशानन पर भगवान श्रीराम की विजय के साथ लोगों में खुशी की लहर छा गई। इस बार पुतलों के दहन में ज्यादातर ग्रीन पटाखों का प्रयोग किया गया।
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इन जगह हुआ रावण दहन
कामी रोड स्थित रामलीला मैदान के अलावा रोहतक रोड स्थित नई अनाज मंडी, सेक्टर-23 स्थित हुडा मैदान, सेक्टर 14-15 हुडा मैदान, मॉडल टाउन स्थित फ्रेंड्स पार्क, आईटीआई चौक के पास, सेक्टर-13 पार्क, आठ मरला, गोपीनाथ मंदिर गढ़ी घसीटा, एटलस रोड, कालूपुर चुंगी पर रावण दहन कर दशहरा पर्व मनाया गया। दोपहर को रावण, कुंभकरण व मेघनाद के पुतलों का मंत्रोच्चारण से पूजन किया गया। शाम करीब 6 बजे भगवान श्रीराम ने अग्निबाण से रावण, कुंभकरण व मेघनाद के पुतलाें का दहन किया गया।
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शोभायात्रा के साथ निकले हनुमान जी के स्वरूप
श्री रघुबीर दल माॅडल टाउन की ओर से गीता भवन मंदिर से दोपहर को शोभायात्रा के साथ हनुमान जी के भव्य स्वरूप निकाले गए। शोभायात्रा मॉडल टाउन, सुभाष चौक, ओल्ड डीसी रोड होते हुए आठ मरला एकता पार्क पहुंची, यहां रावण का दहन किया गया। इसके उपरांत गीता भवन मंदिर में भंडारा लगाया गया। शोभायात्रा में श्री रघुबीर दल के प्रधान प्रवीन भारद्वाज, धीरज आहुजा, विपुल नांगिया, विकास पाठक, देवेंद्र शर्मा, हर्ष शर्मा, अनुपम शर्मा व आदर्श कपूर मौजूद रहे।
शोभायात्रा में सुंदर झांकियों ने मोहा मन

धार्मिक संगठनाें की ओर से निकाली गई शोभायात्रा में विभिन्न सुंदर झांकियाें ने लोगाें के मन को मोह लिया। शोभायात्रा में भगवान श्री गणेश, शिव-पार्वती, श्रीकृष्ण-राधा, श्रीराम दरबार, हनुमान जी, भगवान विश्वकर्मा, रावण सहित अन्य मनमोहक झांकियां निकाली गई। झांकियों के पास नृत्य देखने के लिए लोगों भीड़ लगी रही। शहर में विभिन्न स्थानों पर हुए रावण दहन को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। कई जगह मेला लगाया गया। जहां बच्चाें ने खरीदारी की।
रावण के अवशेष उठाने के लिए दौड़े लोग
दशहरा पर्व पर इस बार भी लोग रावण को जलाने व नीचे गिरने के बाद उनकी जली हुई अस्थियां उठाने के लिए दौड़ पड़े। लोगों ने रावण की अस्थियां उठाने के लिए सुरक्षा के घेरे को भी तोड़ दिया। लकड़ियां लेने के बाद लोग अपने गंतव्य को रवाना हो गए। माना जाता है कि रावण की अस्थियों को घर में रखने से बुरी आत्माएं घर में प्रवेश नहीं करती।
खरखौदा में 40 फीट के रावण का किया दहन
खरखौदा। श्री प्राचीन रामलीला कमेटी की ओर से दशहरा पर्व पर रावण, कुंभकरण व मेघनाद के पुतले का दहन किया गया। कार्यक्रम में शहरवासियों सहित आसपास के ग्रामीणों ने भी भाग लिया। इसके अलावा ब्राह्मण मोहल्ले में रामलीला का मंचन किया गया। जैसे ही श्रीराम ने रावण के पुतले पर तीर चलाया, पूरे मैदान में जय श्री राम के नारे गूंज उठे। रामलीला मंचन के बाद शहर में शोभायात्रा निकाली गई। दिल्ली चौक पर शक्ति ठेकेदार ने शोभायात्रा का रिबन काटकर स्वागत किया। शोभायात्रा में राम, लक्ष्मण, सीता व हनुमान के पात्रों के साथ अन्य झांकियां शामिल रही। रोहतक मार्ग स्थित मैदान में शोभायात्रा का समापन किया गया, यहां रावण, कुंभकरण व मेघनाद के 40-40 फीट ऊंचे पुतलों का दहन किया गया।

रावण वध के साथ गूंजा श्रीराम का जयघोष

गोहाना। पुरानी सब्जी मंडी स्थित सनातन धर्म मंदिर व टीटू धर्मशाला रामलीला में शनिवार को रावण वध के दृश्य का मंचन किया गया। भगवान श्री राम के हाथों रावण वध के साथ ही रामलीला का समापन किया गया। श्रीराम के तीर से रावण का वध होते ही पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। रामलीला का पहला दृश्य रावण-कुंभकरण संवाद रहा। इसमें लंका के सैनिक सोए हुए कुंभकरण को जगाने का प्रयास करते हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं होता। अंत में पकवानों की खुशबू आते ही कुंभकरण जाग उठते हैं। रावण उन्हें युद्ध के लिए तैयार रहने के निर्देश देते हैं। युद्ध में राम व लक्ष्मण के हाथों रावण की पूरी सेना मारी जाती है। कुंभकरण तथा मेघनाद भी मौत के घाट उतार दिए जाते हैं। श्रीराम के हाथों रावण की नाभि में तीर लगते ही वह भी धराशायी हो जाते हैं। मौजूद लोग जय श्रीराम का उद्घोष करने लगते हैं।
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