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Sonipat News: विवि प्रशासन पर महिला शिक्षकों के सांविधानिक अधिकार छीनने का आरोप
Thu, 05 Feb 2026 12:45 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Thu, 05 Feb 2026 12:45 AM IST
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सोनीपत। दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पर महिला शिक्षकों का सांविधानिक अधिकार छीनने का आरोप लगा है। विश्वविद्यालय की टीचिंग यूनियन (डीक्रूटा) ने कहा कि विवि प्रशासन अपने रिश्तेदारों को विभागाध्यक्ष बनाने के लिए 15 दिन पहले पत्र जारी कर रहा है। सक्षम महिलाओं के विभागाध्यक्ष बनने की बारी को जान-बूझकर लटकाया जा रहा है।
डीक्रूटा ने बताया कि कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी और केमिकल इंजीनियरिंग विभागों में पूर्व विभागाध्यक्षों का कार्यकाल पूरे होने के बावजूद नई नियुक्तियां नहीं की जा रहीं हैं। 1 और 9 दिसंबर 2025 को कुलपति को लिखित प्रतिवेदन सौंपकर इस ओर ध्यान आकर्षित किया गया था।
दो माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 21(1) के अनुसार हर शिक्षण विभाग में विभागाध्यक्ष की नियुक्ति तीन वर्ष की अवधि के लिए वरिष्ठता और रोटेशन के आधार पर की जानी अनिवार्य है।
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कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग और केमिकल इंजीनियरिंग विभागों में दो योग्य महिला शिक्षकों की विभागाध्यक्ष पद पर नियुक्ति बनती है। इसके बावजूद समय पर नियुक्ति आदेश जारी न होना अधिनियम की भावना के विपरीत है। डीक्रूटा ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर चयनात्मक और पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया है।
डीक्रूटा के अनुसार जब कुलपति के एक निकट संबंधी की विभागाध्यक्ष के रूप में नियुक्ति की बात आई तो पिछले विभागाध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त होने से लगभग 15 दिन पूर्व ही नियुक्ति आदेश जारी कर दिया गया। इस प्रकरण में कुलाधिपति से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की जाती है। मांगपत्र की प्रति मुख्यमंत्री को भी भेजी गई है।
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डीक्रूटा ने बताया कि कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी और केमिकल इंजीनियरिंग विभागों में पूर्व विभागाध्यक्षों का कार्यकाल पूरे होने के बावजूद नई नियुक्तियां नहीं की जा रहीं हैं। 1 और 9 दिसंबर 2025 को कुलपति को लिखित प्रतिवेदन सौंपकर इस ओर ध्यान आकर्षित किया गया था।
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दो माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 21(1) के अनुसार हर शिक्षण विभाग में विभागाध्यक्ष की नियुक्ति तीन वर्ष की अवधि के लिए वरिष्ठता और रोटेशन के आधार पर की जानी अनिवार्य है।
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कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग और केमिकल इंजीनियरिंग विभागों में दो योग्य महिला शिक्षकों की विभागाध्यक्ष पद पर नियुक्ति बनती है। इसके बावजूद समय पर नियुक्ति आदेश जारी न होना अधिनियम की भावना के विपरीत है। डीक्रूटा ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर चयनात्मक और पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया है।
डीक्रूटा के अनुसार जब कुलपति के एक निकट संबंधी की विभागाध्यक्ष के रूप में नियुक्ति की बात आई तो पिछले विभागाध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त होने से लगभग 15 दिन पूर्व ही नियुक्ति आदेश जारी कर दिया गया। इस प्रकरण में कुलाधिपति से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की जाती है। मांगपत्र की प्रति मुख्यमंत्री को भी भेजी गई है।