भीषण गर्मी में प्यासी यमुना: सूखी रेत के बीच सिमट रही नदी की जलधारा, जलस्तर कम होने से जलीय जीवों पर संकट पैदा
यमुना नदी की जलधारा किनारों को छाेड़कर बीच में सिमट गई है। जिससे आस-पास के किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है। किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए पंप लगाने पड़ रहे हैं। कुृछ किसानों ने नदी क्षेत्र में ही पंप लगा लिए हैं। जिससे खेतों की सिंचाई की जा सके।
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विस्तार
हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए जीवन रेखा मानी जाने वाली यमुना नदी भीषण गर्मी में अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, नदी सूखी रेत के बीच बहती पतली जलधारा में सिमटी जा रही है। हथिनीकुंड बैराज से नदी में मात्र 352 क्यूसेक पानी जल छोड़ा जाता है ताकि प्रवाह बना रहे। उधर, नदी में जलस्तर कम होने से जलीय जीवों पर भी संकट पैदा हो गया। वहीं, आस-पास के किसानों को भी सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा।
यमुना नदी यूपी और हरियाणा की सीमा पर यमुनानगर के पास मैदानी क्षेत्रों में प्रवेश करती है। जहां पर हथिनीकुंड बैराज से नदी के जल का यूपी, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तराखंड के बीच बंटवारा होता है। वर्तमान में पड़ रही भीषण गर्मी में यमुना नदी का जलस्तर काफी तेजी से गिर रहा है। वर्तमान समय में हथिनीकुंड बैराज पर नदी का जलस्तर औसतन 3200 क्यूसेक के आसपास दर्ज किया जा रहा है। जल का बड़ा हिस्सा औसतन 2341 क्यूसेक जल पश्चिमी यमुना नहर और 560 क्यूसेक पानी पूर्वी यमुना नहर में छोड़ा जा रहा है। वहीं, मुख्य नदी में मात्र 352 क्यूसेक पानी ही छोड़ा जा रहा है।
वीरवार सुबह आठ बजे हथिनीकुंड बैराज में मात्र 2520 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। जिसमें से 1884 क्यूसेक पानी पश्चिमी यमुना नहर, 284 क्यूसेक पानी पूर्व यमुना नहर और 352 क्यूसेक पानी मुख्य नदी में छोड़ा गया। नदी में छोडा जाने वाला पानी यमुनानगर, सहारनपुर, करनाल से होता हुआ पानीपत तक पहुंचता है। भीषण गर्मी में तपती रेत के कारण नदी का जलस्तर लगातार कम होता जाता है। पानीपत के सनौली पुल के पास यमुना नदी मात्र एक पतली सी जलधारा में सिमट गई। इससे नदी में जलसंकट खड़ा हो गया है। जलीय जीवों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। वहीं, नदी में पानी कम होने से प्रदूषण भी बढ़ रहा है।
हथिनीकुंड बैराज में हर घंटे बदल रही स्थिति
हथिनीकुंड बैराज में यमुना नदी का जलस्तर प्रत्येक दो घंटे में दर्ज किया जाता है। रात और दिन में जलस्तर में काफी अंतर है। दिन में नदी का पानी 2200 क्यूसेक तक सिमट रहा है।
सुबह 10 बजे- 2417 क्यूसेक
दोपहर 12 बजे-2559
दोपहर दो बजे-2516
शाम चार बजे-2419
शाम छह बजे-2300
शाम आठ बजे-2221
रात 10 बजे -4934
रात 12 बजे-4720
वीरवार
रात दो बजे-4759
सुबह 4 बजे-4816
सुबह छह बजे-2377
सुबह आठ बजे-2520
सुबह 10 बजे-2258 क्यूसेक
नदी में कम पानी छोड़ने पर लोगों में रोष
यमुना सुधार समिति के प्रदेशाध्यक्ष रतन सिंह रावल ने कहा कि नदी में प्रवाह कम होने से लोगों जलसंकट का सामना करना पड़ रहा है। यमुना नदी में स्नान के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और आस-पास के किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने नदी का प्रवाह बनाए रखने के लिए पानी छोड़ने की मांग की है।
किसानों को सिंचाई के लिए लगाने पड़ रहे पंप
यमुना नदी की जलधारा किनारों को छाेड़कर बीच में सिमट गई है। जिससे आस-पास के किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है। किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए पंप लगाने पड़ रहे हैं। कुृछ किसानों ने नदी क्षेत्र में ही पंप लगा लिए हैं। जिससे खेतों की सिंचाई की जा सके।
यमुना नदी में हथिनीकुंड बैराज से पानी कम छोड़ा जा रहा है। गर्मी में जलस्तर कम हो जाता है। नदी में प्रदूषित पानी छोड़ने पर भी नजर रखी जा रही है। जहां शिकायत मिलती है इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सूचित किया जा रहा है। -सुरेश सैनी, कार्यकारी अभियंता सिंचाई विभाग।