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Sonipat News: औद्योगिक क्षेत्र के पास नहीं बचा पीने लायक पानी

Sun, 11 Jan 2026 12:56 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Sun, 11 Jan 2026 12:56 AM IST
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There is no potable water left near the industrial area.
फोटो 24: सोनीपत के गन्नौर की जाट धर्मशाला में दू​षित पानी को लेकर हुई बैठक को संबोधित करते भाकि
सोनीपत। कुंडली, राई, बड़ी, मुरथल के आसपास सरकार ने औद्योगिक क्षेत्र बसा लिए लेकिन फैक्टरियों से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी के समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई। औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास बसे गांवों में पानी पीने लायक नहीं है।
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भूजल खराब हो चुका है। आरोप है कि केमिकल युक्त पानी जमीन के अंदर छोड़ा जा रहा है। शहर में सीवर का पानी राठधना एसटीपी पर भेजने के बजाय सीधे ड्रेन में छोड़ा जा रहा है। नगर निगम क्षेत्र में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के नियमों का उल्लंघन हो रहा है।
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औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास पानी में टीडीएस की मात्रा काफी है। राई व कुंडली क्षेत्र में यह 1400 से 3300 तक है। पानी पीने लायक न होने के कारण लोगों को पानी खरीदकर इस्तेमाल करना पड़ रहा है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नवंबर 2025 में सीईटीपी से पानी के तीन सैंपल लिए थे। दो फेल आए थे।
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प्रशासन ने बेहतर कदम नहीं उठाए। ग्रामीण लंबे समय से स्वच्छ पेयजल की मांग कर रहे हैं लेकिन प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल मुहैया करने के लिए सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है।
पेयजल समस्या के समाधान के लिए भाकियू ने उठाई मांग
बड़ी औद्योगिक क्षेत्र से निकले केमिकल युक्त पानी के कारण चार गांवों का भूजल पीने लायक नहीं बचा है। भारतीय किसान यूनियन (अ) की मासिक बैठक शनिवार को गन्नौर की जाट धर्मशाला में हुई। जिला अध्यक्ष जयभगवान मलिक ने लल्हेड़ी, लड़सौली, पिपली खेड़ा, बड़ी व भोगीपुर गांव में पीने के दूषित हो रहे भूजल की समस्या को उठाते हुए प्रशासन से जरूरी कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि बड़ी औद्योगिक क्षेत्र से निकल दूषित पानी से इन सभी गांवों का पानी भी दूषित होता जा रहा है। इस दिशा में काम नहीं किया गया तो यहां के लोग गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। इस दौरान ब्लाक अध्यक्ष बलजीत मलिक, सत्यवान, राजसिंह, ओमप्रकाश, रणधीर, रामधन, कर्मबीर आदि मौजूद रहे।
सीवर का पानी राठधना एसटीपी तक पहुंचाया
शहर के पूर्वी क्षेत्र में सीवर का पानी राठधना एसटीपी तक पहुंचाया जा रहा है। एसटीपी की शोधन क्षमता कम होने के कारण सीवर का पानी सीधे ड्रेन नंबर छह में डाला जा रहा है। सीवर का पानी बिना शोधन किए सीधे यमुना नदी में डाला जा रहा है। राठधना में 30 एमएलडी का एसटीपी लगा हुआ है। यहां पर पूरे शहर का दूषित पानी आता है, इस कारण गांव के आसपास का भूजल खराब हो चुका है। अब यहां पर 30 एमएलडी का एक अन्य एसटीपी लगाने के लिए सोनीपत महानगर विकास प्राधिकरण की ओर से टेंडर लगा रखा है। टेंडर का आवंटन होने के बाद धरातल पर निर्माण कार्य किया जाएगा।
भोगीपुर, लल्हेड़ी, राजलूगढ़ी, बड़ी व आसपास के कई गांवों के भूजल में कई तत्व तय मानकों से अधिक मिले हैं। विभाग यहां पर दिल्ली ब्रांच से पेयजल सप्लाई की योजना बना रहा है। नहर से पानी लेकर उसे शोधित कर चारों गांवों में सप्लाई करने की योजना है। -गौतम कुमार, कार्यकारी अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग

प्लांट के निर्माण पर 90 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। टेंडर आवंटन की प्रक्रिया जारी है। उसके बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। राठधना में पहले से ही 30 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट चल रहा है। अब आबादी बढ़ने के कारण शहर का पूरा पानी शोधित करने में परेशानी आ रही है। -राजीव गुप्ता, मुख्य अभियंता, एसएमडीए।
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