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Hindi News ›   Haryana ›   Sonipat News ›   The way to stop the looting started

लूट का रास्ता बंद करने का काम शुरू

Sun, 02 Nov 2014 12:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत Updated Sun, 02 Nov 2014 12:08 AM IST
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पुराना बस स्टैंड स्थित पीएनबी की मुख्य शाखा के पास स्थित जर्जर भवन से बैंक के स्ट्रॉन्ग रूम तक बनाई गई सुरंग को शनिवार सायं बंद करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
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गली से गुजरी इस सुरंग को पहले गली से खोद कर बंद किया जाएगा। उसके बाद इस बैंक और जर्जर भवन से इस सुरंग को ईंट व मिट्टी के द्वारा पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। करीब सवा सौ फीट लम्बी सुरंग को पहले बैंक के साथ लगती गली को खोद कर पूरी तरह से ईंट और मिट्टी भर कर बंद किया जाएगा तथा इस सुरंग को पूरी तरह से बैंक के अंदर से लेकर जर्जर भवन तक बंद किया जाएगा। प्रशासन की ओर से लगाए गए मजदूर पुलिस पहरे में सुरंग को बंद करने का काम कर रहे हैं। वहीं, बैंक में बनाई गई सुरंग को देखने के लिए गांव व अन्य क्षेत्रों से भारी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
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बैंक लूट मामला : पीड़ितों के पक्ष में आईं संस्थाएं
 छह दिनों से अपने गहने पाने के लिए बैंक के सामने धरना दे रहे लॉकर धारकों के समर्थन में कई संस्थाएं आगे आई हैं। अभी तक लगभग 25 संस्थाओं ने सहयोग देकर पीड़ितों के दर्द पर मरहम लगाने की कोशिश की है। इनमें लायंस क्लब-गोहाना, लायंस क्लब-गोहाना सिटी, लायंस क्लब-गोहाना डायनमिक, व्यापारिक संगठन फूड गोहाना व्यापार मंडल, भारत विकास परिषद, गोहाना सिटी जेसीज, सीबीएसई स्कूल एसोसिएशन, गायत्री परिवार, गोहाना अग्रवाल महासभा, पंजाबी सेवा समिति, अग्रवाल सभा, जन चेतना मंच, ग्रेन डीलर्स एसोसिएशन, काठमंडी एसोसिएशन, पुरानी अनाजमंडी दुकानदार वेलफेयर एसोसिएशन, न्यू सब्जी मंडी एसोसिएशन, गोहाना स्वर्णकार संघ, गोहाना हलवाई यूनियन, गोहाना क्लॉथ मर्चेंट एसोसिएशन, गोहाना इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन, गोहाना केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन, रेडीमेड गारमेंट्स एसोसिएशन, टेलर मास्टर एसोसिएशन व समाज कल्याण संगठन आदि शामिल हैं।
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कामकाजी महिलाएं भी आंदोलन में साथ
बोलीं, आंदोलन को नहीं होने देंगी कमजोर
पंजाब नेशनल बैंक में की गई लूट के मामले को लेकर महिलाएं अपने परिजनों के साथ धरने पर बैठकर पूरा साथ दे रही हैं। इनमें कई कामकाजी महिलाएं भी हैं, जो दोहपर बाद तक कार्यालय से छुट्टी करने के बाद धरने पर बैठ जाती हैं। किसी महिला के नाम लॉकर है तो किसी का अपने पति के साथ या बेटे के साथ लॉकर है। महिलाओं का कहना है कि आंदोलन कमजोर न हो, इसके लिए वह भी धरने पर अडिग हैं और तब तक न्याय नहीं मिलेगा वे उनका साथ देंगी। धरने पर शिक्षक शकुंतला जुनेजा व अरुणा सिंधवानी के साथ विमला देवी, रोशनी देवी, सुशीला, पुष्पा गौतम, सोनी जुनेजा और रेखा बैठी हुई हैं। उन्होंने कहा कि घरों की चारदीवारी में कैद रह कर बेचैनी और भी ज्यादा बढ़ जाती है। धरने पर बैठने के दौरान मौके पर मिलने वाली सूचनाओं से यह भरोसा पक्का होने लगा है कि मुजरिम पकड़े गए हैं तो उनसे बरामद माल की वापसी भी जरूर होगी।

प्रतिनिधियों की तैयार हो गई नई सूची
करोड़ों की चोरी के मामले में पुलिस और प्रशासन प्रत्येक कदम पर पीड़ित लॉकर ग्राहकों को विश्वास में लेकर चलना चाहते हैं। इसके लिए शनिवार को निर्देश दिए गए कि लिखित रूप से अपने प्रतिनिधियाें को अधिकृत करते हुए उनके नाम दो, ताकि उनके माध्यम से प्रत्येक प्रगति की सूचना संप्रेषित हो सके। शहरी थाना प्रभारी को संबोधित इस पत्र में पीड़ित ग्राहकाें के हस्ताक्षर हैं। साथ ही पीड़ित ग्राहकों के 10 प्रतिनिधियों को अधिकृत किया गया है। इन प्रतिनिधियों में प्रिंसिपल शकुंतला जुनेजा, सरोज मल्होत्रा, राजेश मिगलानी, कृष्ण गोपाल चिंदा, इंद्रजीत विरमानी, डॉ. प्रकाश बल शर्मा, धज्जा राम नरवाल, हरि प्रकाश गुप्ता, रमन सुनेजा और संदीप कालड़ा हैं।

गहने नहीं, बांटे जाएं पैसे : बांगड़
सुरंग बनाकर बैंक मेें की गई लूट के मामले में लॉकर धारकों को गहने वापस दिलाने के लिए तरह-तरह के विकल्प ढूंढे जा रहे हैं। शनिवार को इनेलो प्रवक्ता डॉ. केसी बागड़ ने धरना स्थल पर पहुंचकर मामले को सुलझाने में अपनी राय दी। उन्होंने कहा किसी भी पीड़ित लॉकर मालिक के पास इतने ठोस सबूत नहीं हैं कि वे कोर्ट में गहनों पर अपना हक साबित कर सकें। इसलिए बरामद गहनों को गलाकर बेच दिया जाए और प्रत्येक पीड़ित ग्राहक द्वारा दर्ज करवाए गए नुकसान का उसे बाजार भाव से नकद भुगतान कर दिया जाए। वैसे भी सुपुर्ददारी की प्रक्रिया बैंक स्तर पर पूरी होनी है।


30 साल से नहीं बदला गया लॉकर
 लॉकर पीड़ितों में धरने पर बैठी शिक्षिका शकुंतला ने बैंक प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए लूट की वारदात के लिए बैंक को जिम्मेदार ठहराया है। शिक्षिका ने बताया कि उसका पीएनबी में लॉकर संख्या 232 है। पहले उनका लॉकर भादुरचंद शकुंतला के नाम से था, लेकिन बाद में उन्हें विवेक अपने बेटे को लॉकर से अटैच कर लिया। सन 1984 से उनका लॉकर इस बैंक में है जो तीस साल पुराना है। हालांकि, बीच में बैंक के उच्चाधिकारियों ने जर्जर हो चुके लॉकर के ग्राहकों को शिफ्ट करने के निर्देश यहां के अधिकारियों को दिए थे, लेकिन ग्राहकों को इसकी कोई सूचना नहीं दी गई।
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