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नाम गजल खान, रोल सीता मैय्या का
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Fri, 03 Oct 2014 12:29 AM IST
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भले ही देश में समय-समय पर लोगों के बीच धर्म की दीवार नफरत की खाई बनकर देश के माहौल को गर्मा देती हो, लेकिन हमारे तीज-त्योहार हर स्थिति में लोगों के बीच शांति का संदेश देने का काम करते हैं।
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ऐसा ही कुछ नरेला में आयोजित रामलीला मंचन के दौरान भी देखने को मिल रहा है। जहां पर अलीगढ़ निवासी एक मुस्लिम युवती गजल खान माता सीता के रोल में खूब वाहवाही बटोर रही हैं।
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बताते हैं कि यहां की रामलीला में पहली बार किसी अन्य समुदाय की युवती द्वारा माता सीता का रोल किया जा रहा है।
सहज में नहीं मिली अभिनय की इजाजत
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से चिकित्सा क्षेत्र में स्नातक गजल को दिल्ली में आकर रामलीला में अभिनय करने की इजाजत सहज में ही नहीं मिली। चार भाई-बहनों में सबसे छोटी 21 साल की गजल को माता-पिता की तरफ से भारी विरोध झेलना पड़ा।
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घर से इजाजत मिलने के बाद मंगेतर इमरान खान ने उसका हौसला बढ़ाया और साथ दिया। गजल ने बताया कि उसे बचपन से ही अभिनय का शौक है। कुछ एक सीरियल में भी वह काम कर चुकी है।
कुछ महीने पहले जब उसे रामलीला में काम करने के लिए ऑडिशन के दौर से गुजरना पड़ा तो वह डरी-डरी सी थी। बकौल गजल, उसे हिंदू धर्म के बारे में और खासकर राम-सीता के चरित्र के बारे में कोई खास जानकारी नहीं थी। मंच पर आने से पहले रिहर्सल के लिए भी कम समय मिला।
जिंदगी भर याद रहेगा अनुभव
माता सीता का चरित्र निभाना उसके लिए जिंदगी भर याद रहने वाली घटना होगी। गजल का कहना है कि हर उम्र की महिलाएं, युवक और पुरुष जब उसके चरण छूते हैं तो उसे इन चरित्रों की महानता का अनुभव होता है।
उस दौरान महसूस की जाने वाली अनुभूति को वह बयां नहीं कर सकती है। वह कहती हैं कि लोग राम-सीता को जितना सम्मान देते हैं, वह हैरान कर देने वाला है।
गजल इसे एकदम से नया और अनपेक्षित अनुभव बताती हैं। वह कहती हैं कि उसने कभी सोचा भी नहीं था कि उसे कभी हिंदू धर्म के प्राण भगवान राम-सीता में देवी सीता के चरित्र के मंचन का मौका मिलेगा।
गजल बताती हैं कि अभिनय करते हुए वह वास्तव में रोने और हंसने लगती है। दिल में सिर्फ सीता के जीवन में घटित घटनाओं का ही ध्यान रहता है।
आयोजक रखते हैं ख्याल
उसने बताया कि साथी कलाकार और रामलीला के आयोजक उसका बहुत ख्याल रखते हैं। काम करते हुए उसे इस बात का अहसास ही नहीं होता कि वह अपने घर से बहुत दूर अजनबी लोगों और भारी भीड़ के बीच है।
गजल खान का कहना है कि आज के समाज खासकर युवाओं को सीता मां के चरित्र से सबक सीखना चाहिए। उन्हें अपने देश की संस्कृति के बारे में गहराई से जानना चाहिए और स्वस्थ परंपराओं का जिंदगी में उतारने की कोशिश करनी चाहिए।