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Sonipat News: अहोई अष्टमी पर्व को लेकर बाजार में चहल-पहल, व्रत की तैयारी में जुटीं महिलाएं

Sun, 12 Oct 2025 02:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Sun, 12 Oct 2025 02:20 AM IST
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The market is bustling with activity on the occasion of Ahoi Ashtami, with women preparing for the fast.
फोटो 30- सोनीपत की कच्चे क्वार्टर मार्केट में अहोई अष्टमी पर्व को लेकर कपड़े खरीदती महिलाएं। सं - फोटो : संवाद
सोनीपत। अहोई अष्टमी पर्व को लेकर बाजार में खरीदारों की चहल-पहल होने लगी है। महिलाएं अहोई अष्टमी व्रत को लेकर पूजन सामग्री, कपड़ाें व अहोई के चित्रों की खरीदारी करने लगी हैं। बाजार में अहोई अष्टमी के कैलेंडर व पोस्टर की मांग बढ़ गई है। महिलाएं 13 अक्तूबर को संतान की लंबी आयु, कुशलता, सुख-समृद्धि के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखेंगी।
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व्रत को अलसुबह सरगी खाकर रखने की प्राचीन परंपरा है, जो कि सदियों से निभाई जा रही है। रात को तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। दिवाली पूजन से 8 दिन पहले व करवाचौथ के 4 दिन बाद कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है।
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आचार्य डॉ. मनमोहन मिश्रा ने बताया कि इस बार अष्टमी तिथि 13 अक्तूबर को दोपहर 12:24 बजे प्रारंभ होकर 14 अक्तूबर को सुबह 11:09 बजे तक रहेगी। अहोई में तारों को देखकर व्रत का पारण किया जाता है। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार 13 अक्तूबर को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाएगा।
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महिलाएं अष्टमी को संतान की दीर्घायु के लिए व्रत रखकर अहोई माता की पूजा करती हैं। महिलाएं करवाचौथ की भांति निर्जला व्रत रखकर तारों को अर्घ्य देकर उपवास का पारण करती हैं।

यह रहेगा शुभ मुहूर्त
अहोई अष्टमी पूजन : शाम 5:53 से 7:08 बजे तक
तारों के उदय होने का समय : शाम 6:17 बजे
अष्टमी के दिन चंद्रोदय का समय : रात 11:20 बजे
अहोई अष्टमी पर्व की विधि व महत्व
मान्यता है कि अहोई पूजन के लिए शाम के समय घर की उत्तर दिशा की दीवार पर गेरू या पीली मिट्टी से आठ कोष्ठक की एक पुतली बनाई जाती है। उसी के पास सेह व उसके बच्चों की आकृतियां बनाई जाती है। विधिपूर्वक स्नान, तिलक आदि के बाद खाने का भोग लगाया जाता है। समृद्ध परिवार इस दिन चांदी की अहोई बनवाकर भी पूजन करते हैं। कुछ जगह चांदी की अहोई में दो मोती डालकर विशेष पूजा करने का भी विधान है। संतान प्राप्ति के लिए अहोई माता के साथ भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा भी की जाती है। ऐसा करने से अहोई माता प्रसन्न होकर मनोकामना जल्द पूरी करती हैं।

फोटो 30- सोनीपत की कच्चे क्वार्टर मार्केट में अहोई अष्टमी पर्व को लेकर कपड़े खरीदती महिलाएं। सं

फोटो 30- सोनीपत की कच्चे क्वार्टर मार्केट में अहोई अष्टमी पर्व को लेकर कपड़े खरीदती महिलाएं। सं- फोटो : संवाद

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