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कुंडली बॉर्डर से किसानों का आखिरी जत्था हुआ रवाना, बची हुई झोपड़ी हटवाई

Tue, 14 Dec 2021 12:42 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 14 Dec 2021 12:42 AM IST
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The last batch of farmers left from Kundli border, the remaining hut was removed
कंक्रीट की दीवार को मशीन की सहायता से तोड़ते कर्मचारी। ...संवाद - फोटो : Sonipat
सोनीपत। किसान आंदोलन स्थगित होने के तीसरे दिन कुंडली-सिंघु बॉर्डर पर डटे अन्य किसान अपने घरों की ओर लौट गए। सोमवार को आखिरी जत्था सामान और वाहनों के साथ पंजाब के लिए रवाना हुआ। इससे पहले किसानों की सहायता के लिए चलाए जा रहे अस्पताल को भी समेट लिया गया। एक वैन में मोबाइल अस्पताल चालू रखा गया है जो वापस लौट रहे किसानों के साथ चलेगा। पुलिस-प्रशासन व एनएचएआई ने किसानों द्वारा मौके पर ही छोड़ी गई झोपड़ी व अन्य तंबुओं को जेसीबी की मदद से हटवा दिया। एनएच-44 पर बिखरे मलबे को हटाने का अभियान तीसरे दिन भी जारी रहा। कुंडली में उस क्षेत्र को पूरी तरह से साफ कर दिया गया है जहां पर किसान डेरा डाले हुए थे। अब सिंघु क्षेत्र में भी मलबा हटाया जा रहा है।
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संयुक्त किसान मोर्चा ने 9 दिसंबर को सरकार से बातचीत के बाद आंदोलन को स्थगित कर दिया था। साथ ही 11 दिसंबर से किसानों की घर वापसी का निर्णय लिया था। इसी कड़ी में शनिवार, रविवार के बाद सोमवार को भी किसानों की रवानगी जारी रही। हालांकि, सोमवार करीब 100 किसानों का एक ही जत्था कुंडली बॉर्डर पर बचा था, जो फिलहाल सफाई व मलबा उठाने में प्रशासन का सहयोग कर रहा था। इस जत्थे में शामिल किसानों ने रवाना होने से पहले उन लोगों से मुलाकात की जो आंदोलन के दौरान उनके मददगार रहे। पटियाला के किसान चरणजीत ने बताया कि उनके आंदोलन को हरियाणा के लोगों ने शक्ति दी। यही कारण रहा कि उनमें यहां डटे रहने का जज्बा पैदा हुआ। उन्होंने कहा कि वह सहयोग के लिए हरियाणा के लोगों का कर्ज कभी नहीं चुका सकते। रवाना होने से पहले किसानों ने किसान एकता के नारे भी लगाए।
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पहले दिन बिना दूध की चाय पी थी, अगले दिन दूध डालने को बर्तन कम पड़ गए
किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि हरियाणा के किसानों ने किस कदर मदद की यह बयां किया जा सकता है। जब वह आंदोलन के पहले दिन कुंडली बॉर्डर पर पहुंचे तो पहले दिन उन्होंने बिना दूध की चाय पी थी, लेकिन अगले दिन हरियाणा से इतना दूध आ गया कि उसे डालने के लिए बर्तन कम पड़ गए। यहां से सब्जी से लेकर लस्सी व अन्य राशन बहुत आया। जिसके कारण किसानों में आत्मविश्वास आया और संघर्ष करने की शक्ति पैदा हुई।
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दीप खत्री बोले-अब साबित हो गया किसानों ने नहीं रोका था बॉर्डर
किसान आईटी सेल के सदस्य दीप खत्री ने बताया कि किसानों के जाने के बाद भी कुंडली-सिंघु बॉर्डर बंद है। यदि किसानों ने रास्ता रोका होता तो उनके जाते ही खुल जाता, लेकिन यह रास्ता सरकार ने रोका था। जिसे अब सरकार ही तुड़वा रही है। यहां पर किसानों को रोकने के लिए कंक्रीट की दीवार बनाकर उनमें कीलें लगवाई गई थी। इससे किसानों को ही नहीं बल्कि आम लोगों को भी मुसीबत झेलनी पड़ी।
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