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खाद्य पदार्थों के दाम में हो रही बढ़ोतरी बिगाड़ रही रसोई का बजट

Mon, 31 Oct 2022 01:09 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 31 Oct 2022 01:09 AM IST
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The increase in the price of food items is spoiling the budget of the kitchen
कच्चे क्वार्टर मार्केट में किराने की दुकान पर खरीदारी करतीं महिलाएं। संवाद - फोटो : Sonipat
खाद्य पदार्थों के दाम में हो रही वृद्धि ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। पिछले छह माह से आए दिन देसी घी, सरसों तेल, रिफाइंड सहित अन्य खाद्य पदार्थों के दामों में वृद्धि हो रही है। जिसके कारण लोगों को भोजन पकाने के लिए पहले ही अपेक्षा ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ रही है।
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खाद्य पदार्थों के साथ खाद्य तेलों के बढ़े दामों के कारण घरों में विभिन्न व्यंजन तैयार करना मुश्किल हो गया है। महिलाओं का कहना है कि सरकार ने पहले गैस सिलिंडर महंगा कर दिया, फिर सब्जियों के दाम बढ़ गए। अब खाद्य पदार्थों के दाम में हो रही वृद्धि के कारण उनकी रसोई का खर्च बढ़ गया है। वहीं महंगाई के कारण मध्यम वर्ग के लोगों का हाल बेहाल है।
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त्योहारी सीजन के कारण खाद्य तेलों व खाद्य पदार्थों की डिमांड बढ़ गई थी। जिसके चलते खाद्य पदार्थों व तेलों के दाम में 5 से 10 फीसदी तक की वृद्धि हुई थी। खाद्य पदार्थों व तेलों के दामों में हो रही वृद्धि के कारण घरों में लजीज व्यंजन तैयार करना महंगा हो गया है। बढ़ती इस महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ कर रख दी है। जिससे खाद्य पदार्थों का वजन रसोई से धीरे-धीरे कम होने लगा है। लोग जहां पहले सामान को एक किलो खरीदते थे। अब लोगों को आधा किलो लेकर ही काम चलाना पड़ रहा है। बढ़ रहे खाद्य पदार्थों के दाम व बजट के कारण लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। दुकानदार अमित दुआ व केतन खुराना ने बताया कि छह माह की तुलना में अब देशी घी के दामों में करीब 100 रुपये, सरसों के तेल में 25 रुपये व रिफाइंड में 35 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। सूखा धनिया 80 से 180 रुपये तक पहुंच गया है। गृहणियों का कहना है कि यही हाल रहा, तो आगे दाल-सब्जी को तड़का लगना भी मुश्किल हो जाएगा। वहीं सभी दालों के दाम में फिलहाल 5 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। राजमा 140 से उछलकर 180 रुपये किलो पहुंच गया है। पिछले छह माह में लाल मिर्च में 50 रुपये व हल्दी में 80 रुपये और जीरे के दाम में 130 रुपये किलो तक की बढ़ोतरी होने से महिलाओं के लिए रसोई का बजट बिगड़ गया है।
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सर्फ व साबुन ने भी निकाला दम
रोजमर्रा की चीजों में सर्फ व साबुन के दाम भी बढ़ते जा रहे हैं। साधारण सर्फ जहां पहले 48 से 55 रुपये (किलो) में मिल रहा था। अब उसी सर्फ के लोगों को 60 से 70 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। ब्रांडेड सर्फ भी धीरे-धीरे 90 रुपये से 130 रुपये किलो तक पहुंच गया है। कपड़े धोने की साबुन के भी दाम 20 रुपये ज्यादा हो गए हैं। नहाने की साबुन के दाम में 50 से 60 रुपये तक की बढ़ोतरी हो गई है। जिसका बोझ लोगों की जेब पर पड़ता दिखाई दे रहा है। गृहिणियों का कहना है कि उन्हें कपड़े धोने के लिए भी बजट देखना पड़ रहा है। सरकार को बढ़ती महंगाई पर रोक लगानी चाहिए।
क्या बोली महिलाएं
गैस सिलिंडर व सब्जियों के बाद खाद्य पदार्थों के दाम भी बढ़ते जा रहे हैं। खाद्य पदार्थों व तेलों में बढ़ोतरी होने से घर में खाना पकाना मुश्किल हो गया है। जिससे रसोई का बजट गड़बड़ा रहा है। यही हाल रहा तो दाल-सब्जी में तड़का लगाना ही मुश्किल हो जाएगा। सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
परमिता दहिया
खाद्य पदार्थों के दाम में बढ़ोतरी होने से रसोई के बजट में बढ़ोतरी हो रही है। खाद्य पदार्थों व तेलों में बढ़ोतरी होने से घर में खाना पकाना भी मुश्किल हो गया है। भूखा व्यक्ति जीवित नहीं रह सकता, यह बात सत्य है, लेकिन सरकार इस बात को नहीं मान रही है। खाद्य पदार्थों के दाम में इजाफा करके आम जनता को परेशानी में डाला जा रहा है।
सुनीता राठी
खाद्य पदार्थों के दाम में बढ़ोतरी किया जाना गलत है। इनके दाम में हो रही बढ़ोतरी के कारण आमजन के लिए जीना मुश्किल हो गया है। रसोई का बजट हर महीने बढ़ रहा है। सरकार को खाद्य पदार्थों के कारण बढ़ रही महंगाई पर रोक लगानी चाहिए। तभी आमजन अपनी रसोई में खाना पका सकेगा। वहीं महंगाई है कि धीरे-धीरे बेकाबू होती जा रही है।
निशा
खाद्य पदार्थों के बढ़ते दाम ने रसोई का बजट बिगाड़कर रख दिया है। सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाए जा रहे। महंगाई के चलते लोगों का जीना मुहाल हो चुका है। खाद्य पदार्थों के बढ़ते दाम के कारण लोगों का बजट बिगड़ता जा रहा है। कई संयुक्त परिवार ऐसे हैं, जहां महीने में आठ से 10 लीटर तक रिफाइंड या तेल लग जाता है। इस तरह से उनका सीधे 350 रुपये का खर्च बढ़ गया है।

वीना
खाद्य पदार्थों के साथ तेल व घी के दाम में बढ़ोतरी होने से सभी चीजें आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही है। खाद्य पदार्थों के दाम में वृद्धि होने से लोगों की रसोई का बजट बिगड़ता जा रहा है। इस महंगाई में लोगों के लिए सामान खरीदना मुश्किल हो रहा है। आज आटे, चावल, दाल से लेकर साबुन व सर्फ तक के दाम में बढ़ोतरी हो रही है। जिससे आमजन ज्यादा परेशान है। सरकार को महंगाई पर थोड़ी लगाम लगानी चाहिए। जिससे लोग दो वक्त की रोटी आराम से खा सके।
नारायण शर्मा, प्रधान, किराना मार्केट एसोसिएशन
छह महीने में इस प्रकार बढ़े खाद्य पदार्थों के दाम (किलो में)
खाद्य पदार्थ पहले अब
देसी घी 440 540
सरसों तेल 120 145
रिफाइंड 120 155
मूंगफली 70 95
आटा 28 33
चीनी 38 40
चावल 60 80
मोटा चावल 25 34
मैदा 25 31
लाल मिर्च 270 320
हल्दी 120 200
सूखा धनिया 80 180
जीरा 170 300
राजमा 140 180
अरहर दाल 100 140
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