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Sonipat News: जिला पार्षद ने अर्धनग्न होकर व स्वयं को बेड़ियों में बांधकर सरकार से की ग्रांट देने की मांग
Fri, 24 Jan 2025 01:18 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 24 Jan 2025 01:18 AM IST
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फोटो 05: सोनीपत के अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय स्थित डीआरडीए हॉल के बाहर अर्धनग्न व स्वयं को बेड
सोनीपत। जिला पार्षद संजय बड़वासनी ने वीरवार को सरकार से ग्रांट मुहैया करवाने की मांग को लेकर अनोखा प्रदर्शन निकाला। जिला पार्षद संजय बड़वासनी अर्धनग्न होकर और स्वयं को बेड़ियों में बांधकर रोष जताते हुए अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय स्थित डीआरडीए हॉल तक पहुंचे। उन्होंने साथी पार्षदों के साथ दो मिनट के लिए सांकेतिक धरना भी दिया। साथ ही चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
जिला पार्षद संजय बड़वासनी ने कहा कि जिला पार्षदों पर उनके क्षेत्र के 16 से 20 गांवों में विकास कार्य कराने का बोझ है। उन्हें इन गांवों में विकास के लिए सांसद व विधायक की तर्ज पर वर्ष में एक बार कोटा दिया जाए, जिससे वह गांवाें में विकास कार्य करवा सकें। विकास कार्यों के लिए सरकार की ओर से बहुत कम ग्रांट दी जा रही है। उनकी सरकार से मांग है कि प्रत्येक पार्षद को ग्रांट के अतिरिक्त एक करोड़ रुपये मुहैया करवाया जाए। नगर निगम पार्षद करोड़ों रुपये प्रति वर्ष लगा रहे हैं। वहीं, जिला पार्षद दो वर्ष में 40 से 45 लाख रुपये ही लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गले में बंधी बेड़ियां इस बात की सूचक है कि हमारे हाथ बांध दिए गए हैं। जिन लोगों ने भरोसा कर हमें वोट दिया था, हम उस भरोसे पर खरा नहीं उतर पा रहे। सरकार ने जिला पार्षदों के हाथ बांधने का काम किया है। ऐसे में वह विकास कार्य करवाने में समर्थ नहीं हैं।
जिला पार्षद ने कहा कि वह अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री से भी मिले थे, लेकिन कोई समाधान नहीं हो पाया। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि जिला प्लान कमेटी का गठन किया जाए। महात्मा गांधी आवास योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) परिवारों को 100-100 गज के प्लाट दिए जाएं। उन्होंने मांग उठाई कि उन प्लाटों पर पक्की गलियां, पानी व बिजली की बेहतर व्यवस्था की जानी चाहिए। जिला पार्षद का विधायक व सांसद की भांति टोल फ्री किया जाना चाहिए।
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जिला पार्षद संजय बड़वासनी ने कहा कि जिला पार्षदों पर उनके क्षेत्र के 16 से 20 गांवों में विकास कार्य कराने का बोझ है। उन्हें इन गांवों में विकास के लिए सांसद व विधायक की तर्ज पर वर्ष में एक बार कोटा दिया जाए, जिससे वह गांवाें में विकास कार्य करवा सकें। विकास कार्यों के लिए सरकार की ओर से बहुत कम ग्रांट दी जा रही है। उनकी सरकार से मांग है कि प्रत्येक पार्षद को ग्रांट के अतिरिक्त एक करोड़ रुपये मुहैया करवाया जाए। नगर निगम पार्षद करोड़ों रुपये प्रति वर्ष लगा रहे हैं। वहीं, जिला पार्षद दो वर्ष में 40 से 45 लाख रुपये ही लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गले में बंधी बेड़ियां इस बात की सूचक है कि हमारे हाथ बांध दिए गए हैं। जिन लोगों ने भरोसा कर हमें वोट दिया था, हम उस भरोसे पर खरा नहीं उतर पा रहे। सरकार ने जिला पार्षदों के हाथ बांधने का काम किया है। ऐसे में वह विकास कार्य करवाने में समर्थ नहीं हैं।
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जिला पार्षद ने कहा कि वह अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री से भी मिले थे, लेकिन कोई समाधान नहीं हो पाया। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि जिला प्लान कमेटी का गठन किया जाए। महात्मा गांधी आवास योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) परिवारों को 100-100 गज के प्लाट दिए जाएं। उन्होंने मांग उठाई कि उन प्लाटों पर पक्की गलियां, पानी व बिजली की बेहतर व्यवस्था की जानी चाहिए। जिला पार्षद का विधायक व सांसद की भांति टोल फ्री किया जाना चाहिए।
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