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कुश्ती के दांवपेच में इंजेक्शन का दम

Wed, 11 Jan 2017 12:41 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, सोनीपत
ब्यूरो/ अमर उजाला, सोनीपत Updated Wed, 11 Jan 2017 12:41 AM IST
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sonipat, The effect of the injection of wrestling tactics
सुभाष स्टेडियम में आयोजित कुश्ती प्रतियोगिता के दौरान में मिले इंजेक्शन को लेकर बाहर जाता एक व्यक्ति - फोटो : sonipat
खेल को भले ही खेल भावना से निष्पक्ष होकर खेलने की हर कोई सीख देता हो, लेकिन यह सीख मंगलवार को सुभाष स्टेडियम में चल रही सब जूनियर कुश्ती प्रतियोगिता में हवा में उड़ा दी गई। अपने शुरुआती दौर के खेल में कुछ पहलवानों ने अपनी नशों में इंजेक्शन लगाकर कुश्ती के दांवपेंच दिखाए। यह खेल कोई छुपकर नहीं चला, बल्कि इस खेल को खुलेआम खेला गया। वहां मौजूद पदाधिकारियों व कोच ने इसका विरोध भी नहीं किया और वहां पहलवानों के साथ आए लोग खुलेआम हाथों में इंजेक्शन लेकर घूमते रहे। उनको खिलाड़ियों की नसों में लगाया भी गया और स्टेडियम के अंदर फेंका भी गया।
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यहां से खिलाड़ी पहुंचते हैं स्टेट लेवल पर
सोनीपत के सुभाष स्टेडियम में नौ जनवरी को दो दिवसीय सब जूनियर कुश्ती प्रतियोगिता शुरू कराई गई जो मंगलवार को भी जारी रही। इस प्रतियोगिता जिले भर के पहलवानों ने हिस्सा लिया और वहां 100 से ज्यादा पहलवान हिस्सा लेने के लिए आए थे। जिला कुश्ती संघ की ओर से यह प्रतियोगिता कराई जा रही थी, क्योंकि इसमें जीत दर्ज करने वाले पहलवानों को स्टेट कुश्ती प्रतियोगिता में खेलने का मौका मिलेगा। उसके बाद जीतने वाले नेशनल तो फिर जीत मिलती है तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक भी पहुंचने की उम्मीद रहती है। इस उम्मीद को रखने वाले पहलवानों ने मंगलवार को सुभाष स्टेडियम में जिस तरह की कुश्ती लड़ी, उससे हर अच्छा खिलाड़ी शर्मसार हो जाएगा। स्टेडियम के रेसलिंग हॉल में कुश्ती प्रतियोगिता चल रही थी और उसी जगह पहलवान अपनी नसों में इंजेक्शन लगाकर दांवपेंच दिखाने के लिए मैट पर उतर रहे थे। वह इंजेक्शन भी कोई दूसरा नहीं, बल्कि पहलवानों के साथ आए लोग ही लगा रहे थे।
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फोटो खिंचते ही छुपाए इंजेक्शन
अमर उजाला की टीम मंगलवार को जब रेसलिंग हॉल में पहुंची तो उसी समय एक व्यक्ति अपने हाथ में खुलेआम इंजेक्शन लेकर जा रहा था। उसने जब फोटो खिंचते देखे तो इंजेक्शन को तुरंत छुपा लिया। उसके बाद रेसलिंग हॉल के बाहर देखा गया तो वहां खाली सीरिंज भी पड़ी हुई थी, जिससे साफ हो गया कि वहां नसों में इंजेक्शन लगाकर कुछ पहलवान दांवपेंच दिखाने के लिए उतरे थे। यह केवल विपक्षी पहलवान को किसी भी तरह हराकर आगे बढने के लिए इस्तेमाल किया गया। इस बारे में जिला खेल अधिकारी से लेकर संघ के पदाधिकारियों तक के पास कोई जवाब नहीं था और वह किसी तरह मामले से पल्ला झाड़ने में लगे रहे।
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इस कारण लगाते हैं इंजेक्शन 
किसी भी खेल प्रतियोगिता में खिलाड़ी शरीर की ताकत बढ़ाने के लिए इंजेक्शन लगाता है। इसके लिए एनर्जी से लेकर स्टेयराइड तक के इंजेक्शन लिए जाते हैं जो केवल डोपिंग टेस्ट में सामने आते हैं। इस श्रेणी में काफी स्टेयराइड आते हैं, जिनका इंजेक्शन लगाने या सेवन करने से शरीर में कुछ समय के लिए एनर्जी आ जाती है। उसे खिलाड़ी अपनी फाइट होने से कुछ समय पहले लगाते हैं, क्योंकि उसका असर कुछ समय के लिए होता है। उस कारण ही ऐसा करने वाले खिलाड़ी के सामने विपक्षी टिक नहीं पाता है और वह चंद मिनटों में दूसरे को हरा सकता है। 
यह होते हैं इंजेक्शन के नुकसान
खिलाड़ी जब किसी स्टेयराइड या एनर्जी इंजेक्शन का इस्तेमाल करते है तो शुरुआती समय में उनको उसके दुष्प्रभाव दिखाई नहीं देते है, लेकिन कुछ समय बाद उसके दुष्प्रभाव शुरू हो जाते है। उससे शरीर के हारमोन्स बिगड़ जाते हैं और उसको तरह-तरह की बीमारियां होने लगती हैं। उससे उस खिलाड़ी का कैरियर खत्म होने के कगार पर पहुंच जाता है। इस कारण ही समय-समय पर खिलाड़ियों को जागरूक करने के लिए एंटी डोपिंग सेमिनार में लेकर जाते हैं, जिससे वे इसके दुष्प्रभावों की जानकारी ले सकें और इस तरह के स्टेयराइड व एनर्जी इंजेक्शन से दूर रहे।
जिला व प्रदेश स्तर पर नहीं होता टेस्ट
जिला व प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं में डोपिंग टेस्ट के लिए सैंपल नहीं लिया जाता है। इस कारण ही खिलाड़ियों ने इन प्रतियोगिताओं में स्टेयराइड व एनर्जी इंजेक्शन लेने शुरू कर दिए हैं। इससे वे नेशनल तक पहुंच जाते हैं और उनको नेशनल तक जाने के लिए काफी समय भी प्रैक्टिस करने को मिल जाता है। एक कोच ने बताया कि इस कारण ही शुरुआती दौर में इन चीजों का खिलाड़ी इस्तेमाल करने लगे हैं और अधिकतर खिलाड़ी जिला व प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं में ऐसा करने लगे है जो पूरी तरह से गलत है।
यह प्रतियोगिता कुश्ती संघ की ओर से कराई जा रही है। इस बारे में हम कुछ नहीं कह सकते। यह सुभाष स्टेडियम में हो रही है, जिसमें विभाग की ओर से किसी की ड्यूटी भी नहीं लगी है।

-प्रेम सिंह हुड्डा, जिला खेल अधिकारी
खिलाड़ियों पर काफी निगरानी रखी जाती है, लेकिन उसके बावजूद वह छुपकर इस तरह की हरकत करते हैं। यह पूरी तरह से गलत है और खिलाड़ियों को ऐसा नहीं करने की सलाह भी दी जाती है। जिला व प्रदेश स्तर पर टेस्ट नहीं होने के कारण भी खिलाड़ी ऐसी हरकत करते हैं।
-कुलदीप मलिक, जिला सचिव कुश्ती संघ
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