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अब एसएलसी ने अटकाए प्रवेश, पुराने स्कूल मांग रहे पैसेे

Mon, 25 Jul 2016 12:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत Updated Mon, 25 Jul 2016 12:09 AM IST
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Women in Study room
नियम 134-ए अबूझ पहेली सा हो गया है। कभी ड्रा निकालने की कोशिश होती है तो कभी लर्निंग लेवल टेस्ट लिया जाता है। टेस्ट के बाद लिस्ट में शामिल बच्चों के दाखिले नहीं होते तो जद्दोजहद के बाद निजी स्कूल संचालक दाखिलों के लिए तैयार होेते हैं। अब अभिभावकों के सामने स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (एसएलसी) नाम की एक नई मुसीबत सामने आ खड़ी हुई है। दरअसल, टेस्ट के बाद रिजल्ट के आधार पर अधिकतर बच्चों के स्कूल बदल गए। नए स्कूल में दाखिला लेने के लिए वे बच्चे जाते हैं तो उनसे पुराने स्कूल का एसएलसी मांगा जाता है। जब यह दोबारा से पुराने स्कूल में एसएलसी लेने जाते हैं तो इनसे तीन से चार महीनों की फीस मांगी जाती है। गौर करने वाली बात यह है कि जो अभिभावक आर्थिक रूप से कमजोर हैं उनके बच्चों को ही नियम 134-ए के तहत दाखिला दिया जा रहा है। वे एक माह की फीस भरने में समर्थ नहीं है तो तीन से चार महीने की फीस कैसे भरेंगे। हालांकि एडीसी ने हाल ही में एसएलसी के बिना भी दाखिला देने के निर्देश दिए हैं, लेकिन साथ यह भी कहा था कि एसएलसी बाद में देनी होगी। ऐसी स्थिति में अभिभावक असमंजस में हैं कि अभी एसएलसी लेकर पिंड छुड़वाए या फिर एक-आध महीने का और इंतजार करें। दूसरी ओर पढ़ाई को लेकर छात्र परेशान हैं, क्योंकि पिछला स्कूल एक तरह से छूट गया है और नए में दाखिला नहीं हुआ है।
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1400 के करीब बच्चे हैं इंतजार में
मौजूदा समय में तकरीबन 1400 बच्चे दाखिलों के इंतजार में हैं। चार दिन पहले की रिपोर्ट के अनुसार जिले के कुल 2438 पात्र बच्चों में से केवल 717 बच्चों का दाखिला हो पाया था। चार दिनों में कुल 1 हजार बच्चों के दाखिले हो पाएं हैं। बता दें कि इस साल 5 मई और 8 जुलाई को नियम 134-ए के तहत लर्निंग लेवल टेस्ट लिए गए थे। जिसमें क्रमश: 1753 और 685 बच्चों ने क्वालीफाई किया था। जबकि 6 हजार से अधिक ने आवेदन किया था। गत वर्ष कुल 4 हजार बच्चों को दाखिला दिलवाया गया था।
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क्यों जरूरी है एसएलसी
नियमों के अनुसार नए स्कूल में दाखिले के लिए एसएलसी जरूरी होता है। इससे कंफर्म हो जाता है कि एक बच्चा एक ही जगह पढ़ रहा है। विशेष तौर पर 9वीं से 12वीं कक्षा के बच्चों के लिए बेहद जरूरी होती है। क्योंकि कई बार एसएलसी न लेने पर दोनों स्कूलों में एक ही बच्चे अलग-अलग एनरोलमेंट चालू होते हैं। जिसकी वजह से रिजल्ट के अलावा अन्य तथ्यात्मक आंकड़ों पर फर्क पड़ता है।
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एसएलसी जरूरी तो है, लेकिन जो स्कूल इसके लिए चार्ज ले रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अभिभावकों को चाहिए कि वे कार्यालय में शिकायत दें। विभाग उनका पूरा साथ देगा।
-जिले सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी, सोनीपत।
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