{"_id":"578295734f1c1b6f0c7fdec9","slug":"sonipat-news-hindi-news-free-education-child","type":"story","status":"publish","title_hn":"बच्चों का भविष्य बिगाड़ रहा प्रवेश में देरी का साइड इफेक्ट ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बच्चों का भविष्य बिगाड़ रहा प्रवेश में देरी का साइड इफेक्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Mon, 11 Jul 2016 12:05 AM IST
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- फोटो : thebetterindia.com
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कहते हैं दुघर्टना से देर भली, लेकिन उस देरी का क्या करें जिसकी वजह से ही दुघर्टना हो जाए। पिछली कक्षा में 85 प्रतिशत अंक लाने वाला विद्यार्थी देरी की वजह से ही फेल हो जाता है। जिसका ग्रेड भी ए हो, वह बच्चा भी दो पेपरों में फेल हो जाए, वो भी सिर्फ देरी के कारण। ऐसे में ये देरी किस काम की है। हम बात कर रहे हैं नियम 134-ए की। पिछले साल भी अबकी बार की तरह निजी स्कूल संचालकों और अभिभावकों के बीच दाखिलों को लेकर जद्दोजहद थी। अंत में 4 हजार के करीब बच्चों को स्कूल तो मिला, लेकिन अगस्त तक का इंतजार करने के बाद। नतीजा यह निकला कि मेधावी और गरीब होने की शर्त में अधिकतर बच्चे अपना मेधावी होने का तमगा ही खो बैठे। 2 हजार के करीब बच्चे और उनके अभिभावक इस बार ऐसा न होने की उम्मीद में हैं।
पिछले साल भड़क गया था मामला
बता दें कि पिछले वर्ष लगभग चार हजार बच्चों के दाखिले हुए थे। लेकिन उससे पहले चार माह तक लंबी खींचातान जारी रही। एक स्कूल में तोड़फोड़ भी हो गई थी। जिसके बाद 40 अभिभावकों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया था। इसके अलावा धरने-प्रदर्शन तो कई दिनों तक लगातार जारी रहे थे। अगस्त में प्रशासन ने निजी स्कूल संचालकों को किसी तरह से दाखिलों के लिए मना लिया था।
इस बार 2 हजार कर रहे हैं इंतजार
इस बार नियम 134-ए के तहत दाखिले के लिए लगभग 2 हजार बच्चे आधिकारिक रूप से इंतजार कर रहे हैं। इसमें से 1753 बच्चे तो 5 मई को आए ड्रा में, वहीं 434 बच्चे 8 जुलाई को आए ड्रा में क्वालीफाई हुए हैं। इस तरह से लगभग 2 हजार बच्चे अभी से दाखिले की इंतजार में हैं। हालांकि 6 हजार से अधिक बच्चों ने आवेदन किया था।
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पिछले साल की देरी का साइड इफेेक्ट
केस नंबर 1
मेरी बेटी रुचि का पिछले वर्ष नियम 134-ए के तहत अगस्त में हिंदू विद्यापीठ की 11वीं कक्षा में दाखिला हुआ था। 11वीं में दो विषयों में पास नहीं हो पाई। 11वीं का इस साल रिजल्ट ही नहीं आया। जबकि उसके 10वीं में 8 सीजीपीए और ग्रेड ए-2 आया था।
-रमन, निवासी जनता कालोनी
केस नंबर 2
मेरी बेटी ज्योति का पिछले साल 12वीं में साउथ प्वाइंट स्कूल में दाखिला हुआ था। दाखिला अगस्त माह में जाकर हुआ था। इसी वजह से पढ़ाई में पीछे रह गई और फेल हो गई। 11वीं में उसके 85 प्रतिशत अंक आए थे, इसके पहले भी हर कक्षा में अच्छे नंबर आते रहे हैं।
-शकुंतला, निवासी गीता भवन
जल्दी आना चाहिए था मैदान में : विमल किशोर
प्रशासन को इस मामले में काफी पहले हस्तक्षेप करना चाहिए था। देर आए दुरुस्त आए, अब जल्दी-जल्दी बच्चों को दाखिले दिलवाएं जाएं, ताकि उनकी पढ़ाई किसी तरह से प्रभावित न हो। अगर कोई स्कूल संचालक नहीं मानता तो उसके खिलाफ प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए।
-विमल किशोर, संयोजक, छात्र अभिभावक संघ
पात्र बच्चों को जरूर देंगे दाखिला : अजमेर सिंह
हम भी पात्र बच्चों की ही लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसा क्या हो गया जो बच्चे आराम से फीस दे रहे थे, वे एकदम से गरीब हो गए। हम चाहते हैं कि ऐसे लोगों की जांच की जाए। सरकार से हमारी मांग है कि हमें बच्चों को पढ़ाने के लिए फीस दी जाए। यही दो बातें मुख्य हैं, इन्हें पूरा किया जाए।
-प्रधान, हरियाणा संयुक्त विद्यालय संघ।
बच्चों के दाखिले इस महीने करा दिए जाएंगे। अब और ज्यादा समय व्यर्थ नहीं गंवाया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारी इस मामले में काम कर रहे हैं, उनके निर्देशों मिलते हैं तो निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
-जिले सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी, सोनीपत।
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पिछले साल भड़क गया था मामला
बता दें कि पिछले वर्ष लगभग चार हजार बच्चों के दाखिले हुए थे। लेकिन उससे पहले चार माह तक लंबी खींचातान जारी रही। एक स्कूल में तोड़फोड़ भी हो गई थी। जिसके बाद 40 अभिभावकों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया था। इसके अलावा धरने-प्रदर्शन तो कई दिनों तक लगातार जारी रहे थे। अगस्त में प्रशासन ने निजी स्कूल संचालकों को किसी तरह से दाखिलों के लिए मना लिया था।
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इस बार 2 हजार कर रहे हैं इंतजार
इस बार नियम 134-ए के तहत दाखिले के लिए लगभग 2 हजार बच्चे आधिकारिक रूप से इंतजार कर रहे हैं। इसमें से 1753 बच्चे तो 5 मई को आए ड्रा में, वहीं 434 बच्चे 8 जुलाई को आए ड्रा में क्वालीफाई हुए हैं। इस तरह से लगभग 2 हजार बच्चे अभी से दाखिले की इंतजार में हैं। हालांकि 6 हजार से अधिक बच्चों ने आवेदन किया था।
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पिछले साल की देरी का साइड इफेेक्ट
केस नंबर 1
मेरी बेटी रुचि का पिछले वर्ष नियम 134-ए के तहत अगस्त में हिंदू विद्यापीठ की 11वीं कक्षा में दाखिला हुआ था। 11वीं में दो विषयों में पास नहीं हो पाई। 11वीं का इस साल रिजल्ट ही नहीं आया। जबकि उसके 10वीं में 8 सीजीपीए और ग्रेड ए-2 आया था।
-रमन, निवासी जनता कालोनी
केस नंबर 2
मेरी बेटी ज्योति का पिछले साल 12वीं में साउथ प्वाइंट स्कूल में दाखिला हुआ था। दाखिला अगस्त माह में जाकर हुआ था। इसी वजह से पढ़ाई में पीछे रह गई और फेल हो गई। 11वीं में उसके 85 प्रतिशत अंक आए थे, इसके पहले भी हर कक्षा में अच्छे नंबर आते रहे हैं।
-शकुंतला, निवासी गीता भवन
जल्दी आना चाहिए था मैदान में : विमल किशोर
प्रशासन को इस मामले में काफी पहले हस्तक्षेप करना चाहिए था। देर आए दुरुस्त आए, अब जल्दी-जल्दी बच्चों को दाखिले दिलवाएं जाएं, ताकि उनकी पढ़ाई किसी तरह से प्रभावित न हो। अगर कोई स्कूल संचालक नहीं मानता तो उसके खिलाफ प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए।
-विमल किशोर, संयोजक, छात्र अभिभावक संघ
पात्र बच्चों को जरूर देंगे दाखिला : अजमेर सिंह
हम भी पात्र बच्चों की ही लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसा क्या हो गया जो बच्चे आराम से फीस दे रहे थे, वे एकदम से गरीब हो गए। हम चाहते हैं कि ऐसे लोगों की जांच की जाए। सरकार से हमारी मांग है कि हमें बच्चों को पढ़ाने के लिए फीस दी जाए। यही दो बातें मुख्य हैं, इन्हें पूरा किया जाए।
-प्रधान, हरियाणा संयुक्त विद्यालय संघ।
बच्चों के दाखिले इस महीने करा दिए जाएंगे। अब और ज्यादा समय व्यर्थ नहीं गंवाया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारी इस मामले में काम कर रहे हैं, उनके निर्देशों मिलते हैं तो निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
-जिले सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी, सोनीपत।