{"_id":"57892a504f1c1b010513de81","slug":"sonipat-news-hindi-news-education-teacher","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्थानांतरण के फेर में परेशान हो रहे गुरुजी, बच्चों की पढ़ाई हो रही प्रभावित ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्थानांतरण के फेर में परेशान हो रहे गुरुजी, बच्चों की पढ़ाई हो रही प्रभावित
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Fri, 15 Jul 2016 11:54 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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शिक्षा के मंदिरों में इन दिनों पुजारी काफी व्यस्त हैं। व्यस्तता अपने स्थानांतरण को लेकर है। दौड़धूप भी बहुत कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं जिले भर के लगभग 750 सरकारी स्कूलों और उनके 5 हजार से अधिक शिक्षकों की। शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर प्रदेश सरकार की नई योजना का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। बता दें कि स्थानांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। इनकी अंतिम तारीख बढ़ते-बढ़ते 15 जुलाई तक पहुंच गई। स्थिति यह है कि गुरुजी का ध्यान स्कूलों में पढ़ाने की अपेक्षा अब अपने स्थानांतरण पर ज्यादा है। हर स्कूल में स्थानांतरण को लेकर ही चर्चाएं चलते हैं। जिनके ट्रांसफर होने हैं वे भी मानसिक तौर पर स्कूल में पढ़ाई को ज्यादा समय नहीं पा रहे। खास बात ये है कि अभी तक तो पीजीटी के स्थानांतरण के लिए अप्लाई कराया गया है। अब जेबीटी, टीजीटी और फिर प्राचार्यों को भी स्थानांतरण के लिए मौका मिलेगा। अब अप्लाई के दौरान ही पढ़ाई प्रभावित हो रही है तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि जब ट्रांसफर ऑर्डर जारी करेंगे तो किस हद तक पढ़ाई प्रभावित होगी।
ये है सोनीपत की स्थिति
जिले की बात करें तो यहां कुल 1216 स्कूल हैं। इसमें कुल 729 स्कूल सरकारी है। जिसमें 434 प्राइमरी, 83 हाई, 129 सीनियर सेकेंडरी, 81 अपर प्राइमरी, 2 प्राइमरी से सीनियर सेकेंडरी तक के स्कूल हैं। वहीं 664 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जोकि ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। अध्यापकों की बात करें तो जिले भर में साढ़े 5 हजार के करीब सरकारी अध्यापक हैं। इसमें जेबीटी, टीजीटी, पीजीटी और प्राचार्य शामिल हैं।
ये हैं पढ़ाई प्रभावित होने के कारण
कंप्यूटर का ज्ञान न होना: आज भी अधिकतर प्राध्यापक ऐसे हैं, जिन्हें कंप्यूटर का ज्ञान नहीं है। इसी वजह से वे स्कूल टाइम में ही ऑपरेटर से कंप्यूटर के जरिए ऑनलाइन स्थानांतरण भराने में व्यस्त रहते हैं।
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मानसिक स्थिति: जिनके भी ट्रांसफर होने हैं वे मानसिक रूप से स्कूल में शिक्षा पर अधिक ध्यान नहीं दे पा रहे। क्योंकि ऑप्शन के तौर पर 10-10 विकल्प भरे गए हैं। सारा दिन इसी उधेड़बुन और बातचीत में चला जाता है कि ट्रांसफर होगा कहां।
चर्चाएं : पीजीटी के ट्रांसफर के लिए कई बार नए ऑप्शन मिले, जिसके चलते स्कूलों में बस ट्रांसफर को लेकर ही चर्चा चलती रहती हैं। बता दें कि ट्रांसफर की अंतिम तारीख पहले 8 जुलाई फिर 11 जुलाई और अब 15 जुलाई की गई थी।
भविष्य में होगी और दिक्कत
पीजीटी के ट्रांसफर की प्रक्रिया खत्म होने के बाद क्रमश: जेबीटी, टीजीटी और प्राचार्य की ट्रांसफर की जाएगी। जिन्हें एक ही जगह नौकरी करते हुए पांच साल हो गए हैं, उन्हें तथा इच्छा रखने वालों को ही ट्रांसफर के ऑप्शन मिलेंगे। ऐसे में अध्यापकों का एक बहुत बड़ा वर्ग प्रभावित होगा। जब ट्रांसफर ऑर्डर जारी किए जाएंगे, तब भी सभी स्कूलों का सिस्टम गड़बड़ाएगा। कोई जाएगा तो कोई नया आएगा। किसी के पास चार्ज होगा तो वह चार्ज भी देगा। अगर कोई रिलीव न हुआ तो उसकी जगह आने वाले अध्यापक को दिक्कत होगी। जिसका सीधा-सीधा प्रभाव बच्चों की पढ़ाई पर ही होगा।
क्या कहते हैं अधिकारी
अगर कोई प्राध्यापक स्कूल टाइम में फार्म भरने में समय गंवाता है तो गलत है। कंप्यूटर नहीं चलाना आता तो ऑपरेटर को बायोडाटा दे सकते हैं। इसके अलावा 2 बजे स्कूलों की छुट्टी हो जाती है उसके बाद ही ऑनलाइन आवेदन करने की हिदायत पहले भी दी जा चुकी है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए हम प्रयासरत हैं।
-जिले सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी, सोनीपत।
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ये है सोनीपत की स्थिति
जिले की बात करें तो यहां कुल 1216 स्कूल हैं। इसमें कुल 729 स्कूल सरकारी है। जिसमें 434 प्राइमरी, 83 हाई, 129 सीनियर सेकेंडरी, 81 अपर प्राइमरी, 2 प्राइमरी से सीनियर सेकेंडरी तक के स्कूल हैं। वहीं 664 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जोकि ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। अध्यापकों की बात करें तो जिले भर में साढ़े 5 हजार के करीब सरकारी अध्यापक हैं। इसमें जेबीटी, टीजीटी, पीजीटी और प्राचार्य शामिल हैं।
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ये हैं पढ़ाई प्रभावित होने के कारण
कंप्यूटर का ज्ञान न होना: आज भी अधिकतर प्राध्यापक ऐसे हैं, जिन्हें कंप्यूटर का ज्ञान नहीं है। इसी वजह से वे स्कूल टाइम में ही ऑपरेटर से कंप्यूटर के जरिए ऑनलाइन स्थानांतरण भराने में व्यस्त रहते हैं।
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मानसिक स्थिति: जिनके भी ट्रांसफर होने हैं वे मानसिक रूप से स्कूल में शिक्षा पर अधिक ध्यान नहीं दे पा रहे। क्योंकि ऑप्शन के तौर पर 10-10 विकल्प भरे गए हैं। सारा दिन इसी उधेड़बुन और बातचीत में चला जाता है कि ट्रांसफर होगा कहां।
चर्चाएं : पीजीटी के ट्रांसफर के लिए कई बार नए ऑप्शन मिले, जिसके चलते स्कूलों में बस ट्रांसफर को लेकर ही चर्चा चलती रहती हैं। बता दें कि ट्रांसफर की अंतिम तारीख पहले 8 जुलाई फिर 11 जुलाई और अब 15 जुलाई की गई थी।
भविष्य में होगी और दिक्कत
पीजीटी के ट्रांसफर की प्रक्रिया खत्म होने के बाद क्रमश: जेबीटी, टीजीटी और प्राचार्य की ट्रांसफर की जाएगी। जिन्हें एक ही जगह नौकरी करते हुए पांच साल हो गए हैं, उन्हें तथा इच्छा रखने वालों को ही ट्रांसफर के ऑप्शन मिलेंगे। ऐसे में अध्यापकों का एक बहुत बड़ा वर्ग प्रभावित होगा। जब ट्रांसफर ऑर्डर जारी किए जाएंगे, तब भी सभी स्कूलों का सिस्टम गड़बड़ाएगा। कोई जाएगा तो कोई नया आएगा। किसी के पास चार्ज होगा तो वह चार्ज भी देगा। अगर कोई रिलीव न हुआ तो उसकी जगह आने वाले अध्यापक को दिक्कत होगी। जिसका सीधा-सीधा प्रभाव बच्चों की पढ़ाई पर ही होगा।
क्या कहते हैं अधिकारी
अगर कोई प्राध्यापक स्कूल टाइम में फार्म भरने में समय गंवाता है तो गलत है। कंप्यूटर नहीं चलाना आता तो ऑपरेटर को बायोडाटा दे सकते हैं। इसके अलावा 2 बजे स्कूलों की छुट्टी हो जाती है उसके बाद ही ऑनलाइन आवेदन करने की हिदायत पहले भी दी जा चुकी है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए हम प्रयासरत हैं।
-जिले सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी, सोनीपत।