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कन्या विद्यालयों में नहीं पढ़ाएंगे युवा गुरुजी
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Wed, 13 Jul 2016 12:08 AM IST
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आयेदिन कन्या विद्यालयों में छात्राओं के साथ छेड़छाड़ के मामले सामने आते हैं। इससे स्कूल की छवि पर तो असर पड़ता ही है साथ ही गुरु जैसे पवित्र शब्द की साख पर भी बट्टा लगता है। ऐसे मामलों को देखते हुए अब शिक्षा विभाग ने अपने नियमों में बदलाव किया है। खासकर स्थानांतरण नियमों में। अब उन प्राध्यापकों का स्थानांतरण कन्या विद्यालयों में नहीं होगा, जिनकी उम्र 50 वर्ष से कम होगी। स्पष्ट किया गया है कि 30 जून तक जो प्राध्यापक 50 वर्ष की उम्र पूरी नहीं कर सके हैं, वह स्थानांतरण के विकल्प के तौर पर कन्या विद्यालयों का चयन न करें। ऐसे आवेदनों पर कोई गौर नहीं किया जाएगा। स्थानांतरण को लेकर सरकार की ओर से हाल में ही जारी इंटर डिस्ट्रिक्ट के नए नियमों को लेकर ही यह निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों से प्रदेश भर के सैकड़ों प्राध्यापक प्रभावित होंगे। इसके अलावा प्राध्यापकों को अपने विकल्प जांचने का अंतिम मौका दिया गया है, साथ ही विकल्प भरने की अंतिम तिथि भी बढ़ा दी गई है। सेकेंडरी शिक्षा के निदेशक द्वारा 11 जुलाई को भेजे गए पत्र में स्थानांतरण के लिए 13 जुलाई की आधी रात तक का समय बढ़ाया गया है। पत्र क्रमांक 1/88 के तहत यह निर्देश जारी किए गए हैं।
प्राध्यापकों के लिए खोले विकल्प
निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि एकल सेक्शन उच्च विद्यालयों के अलावा प्राध्यापकों की सभी रिक्तियां स्थानांतरण विकल्पों के लिए उपलब्ध रहेगी। जो प्राध्यापक पहले ही विकल्प दे चुके हैं, उनके विकल्प संशोधन के लिए खोले जा रहे हैं। उन्हें परामर्श दिया जाता है कि वह अपने विकल्प की पुन: जांच कर लें और सुविधानुसार विकल्पों का चयन उपरोक्त बढ़ी हुई अवधि में सुनिश्चित कर लें।
50 हजार से अधिक हैं छात्राएं
बता दें कि जिले में कुल 1260 स्कूल हैं। इनमें से 641 सरकारी स्कूल हैं। जो कुल स्कूलों के लगभग आधी संख्या है। जिले भर में वर्ष 2015-16 में 1 लाख 35 हजार 643 छात्राएं पढ़ती थी। इसमें से लगभग 40 प्रतिशत छात्राएं सरकारी स्कूलों की हैं। अनुमान के अनुसार 50 हजार से अधिक छात्राएं मौजूदा समय में सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर रही हैं।
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कई हो चुके हैं छेड़छाड़ के मामले
बता दें कि सोनीपत जिले के कई स्कूलों में छात्राओं के साथ छेड़छाड़ के मामले सामने आ चुके हैं। गन्नौर के गांव तेवड़ी में कुछ ही समय पहले एक स्कूल के अध्यापक के खिलाफ एक छात्रा के परिजनों ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। हंगामा भी हुआ था और मामला भी दर्ज किया गया था। आरोपी अध्यापक फरार है। इस तरह से कई मामले विभिन्न स्कूलों में हो चुके हैं, जिनमेें से अधिकतर में बाद में समझौते हो गए थे।
वैसे तो 50 वर्ष से कम आयु के प्राध्यापकों को कन्या विद्यालयों में नियुक्ति ही नहीं दी जाती। स्थानांतरण नियमों में फेरबदल के बाद कुछ प्राध्यापकों ने विकल्प के तौर पर कन्या विद्यालयों को चुना था। उन्हें अपनी उम्र के हिसाब से अब विकल्प बदलने के लिए मौका दिया गया है। जो प्राध्यापक विकल्प भर चुके हैं, उनको भी दोबारा विकल्प चुनने का समय दिया गया है।
-जिले सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी, सोनीपत।
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प्राध्यापकों के लिए खोले विकल्प
निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि एकल सेक्शन उच्च विद्यालयों के अलावा प्राध्यापकों की सभी रिक्तियां स्थानांतरण विकल्पों के लिए उपलब्ध रहेगी। जो प्राध्यापक पहले ही विकल्प दे चुके हैं, उनके विकल्प संशोधन के लिए खोले जा रहे हैं। उन्हें परामर्श दिया जाता है कि वह अपने विकल्प की पुन: जांच कर लें और सुविधानुसार विकल्पों का चयन उपरोक्त बढ़ी हुई अवधि में सुनिश्चित कर लें।
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50 हजार से अधिक हैं छात्राएं
बता दें कि जिले में कुल 1260 स्कूल हैं। इनमें से 641 सरकारी स्कूल हैं। जो कुल स्कूलों के लगभग आधी संख्या है। जिले भर में वर्ष 2015-16 में 1 लाख 35 हजार 643 छात्राएं पढ़ती थी। इसमें से लगभग 40 प्रतिशत छात्राएं सरकारी स्कूलों की हैं। अनुमान के अनुसार 50 हजार से अधिक छात्राएं मौजूदा समय में सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर रही हैं।
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कई हो चुके हैं छेड़छाड़ के मामले
बता दें कि सोनीपत जिले के कई स्कूलों में छात्राओं के साथ छेड़छाड़ के मामले सामने आ चुके हैं। गन्नौर के गांव तेवड़ी में कुछ ही समय पहले एक स्कूल के अध्यापक के खिलाफ एक छात्रा के परिजनों ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। हंगामा भी हुआ था और मामला भी दर्ज किया गया था। आरोपी अध्यापक फरार है। इस तरह से कई मामले विभिन्न स्कूलों में हो चुके हैं, जिनमेें से अधिकतर में बाद में समझौते हो गए थे।
वैसे तो 50 वर्ष से कम आयु के प्राध्यापकों को कन्या विद्यालयों में नियुक्ति ही नहीं दी जाती। स्थानांतरण नियमों में फेरबदल के बाद कुछ प्राध्यापकों ने विकल्प के तौर पर कन्या विद्यालयों को चुना था। उन्हें अपनी उम्र के हिसाब से अब विकल्प बदलने के लिए मौका दिया गया है। जो प्राध्यापक विकल्प भर चुके हैं, उनको भी दोबारा विकल्प चुनने का समय दिया गया है।
-जिले सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी, सोनीपत।