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Sonipat News: रामलीला व रासलीला के मंचन में गुजर गई वृंदावन के द्विवेदी की सात पीढि़यां
Fri, 11 Oct 2024 06:29 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 11 Oct 2024 06:29 AM IST
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सोनीपत। वृंदावन के आचार्य सौरभ द्विवेदी की सात पीढि़यां रामलीला व रासलीला का मंचन करती आ रही हैं। सौरभ द्विवेदी का परिवार करीब दस दशक से ज्यादा समय में उत्तर व दक्षिण भारत के विभिन्न प्रांतों में प्रभु श्रीराम व भगवान श्रीकृष्ण की लीला का मंचन कर चुका है। इनके सभी पारिवारिक सदस्य मंचन में एक साथ कई भूमिका अदा करने में माहिर हो चुके हैं।
आचार्य सौरभ द्विवेदी अब तक हरियाणा, महाराष्ट्र, तमिलनाडू, केरल, कर्नाटक, ओडिशा व बिहार जैसे राज्यों में लीलाओं का मंचन कर अपनी पीढि़यों से चली आ रही प्रभु भक्ति में लीन हैं। श्रीरामलीला सभा की ओर से कामी रोड स्थित रामलीला मैदान में रामलीला मंचन का आयोजन किया गया है। वृंदावन से मंचन करने पहुंचे स्वामी शिव दयाल शर्मा व स्वामी गिरिराज प्रसाद शर्मा ग्रुप के 30 सदस्य अपना बखूबी किरदार निभाकर लोगों के दिलों में छाप छोड़ रहे हैं। सौरभ द्विवेदी ने बताया कि वह वर्ष 2011 से रामलीला व रासलीला का मंचन संभाल रहे हैं। इससे पहले उनके पिता स्वामी शिव दयाल शर्मा व दादा स्वामी गिरिराज प्रसाद शर्मा के कंधाें पर मंचन का कार्यभार था। सभी सदस्य श्रीराम की भक्ति में इतना लीन हो चुके हैं कि कोरोना जैसी बाधा भी उनकी श्रीराम भक्ति के बीच रूकावट नहीं बन सकी। उन्होंने कोरोना काल में भी ठाकुरजी के सामने रामलीला का मंचन कर अपनी कला को बरकरार रखा। वह रामलीला व रासलीला मंचन के माध्यम से लोगों के मन में प्रभु की अलख जगाने का प्रयास कर रहे हैं।
दशहरा के बाद राजस्थान व दिवाली पश्चात अयोध्या में करेंगे मंचन
आचार्य सौरभ द्विवेदी ने कहा कि उनका कार्य विभिन्न राज्यों में जाकर रामलीला का मंचन करना है। वह एक के बाद दूसरी जगह रामलीला का मंचन करते हैं। मंचन के बीच कुछ दिनों के लिए घर पर रहते हैं। घर की व्यवस्था संभालने के बाद वह फिर किसी अन्य जगह जाकर रामलीला मंचन का प्रभार संभालते हैं। मंचन मंडली में पारिवारिक व ब्राह्मण समाज से ही कलाकारों को शामिल किया गया है। दशहरा के बाद राजस्थान के जिला हनुमानगढ़ के भादरा और दिवाली के बाद अयोध्या जाकर अपनी टीम के साथ रामलीला का मंचन करेंगे।
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आचार्य सौरभ द्विवेदी अब तक हरियाणा, महाराष्ट्र, तमिलनाडू, केरल, कर्नाटक, ओडिशा व बिहार जैसे राज्यों में लीलाओं का मंचन कर अपनी पीढि़यों से चली आ रही प्रभु भक्ति में लीन हैं। श्रीरामलीला सभा की ओर से कामी रोड स्थित रामलीला मैदान में रामलीला मंचन का आयोजन किया गया है। वृंदावन से मंचन करने पहुंचे स्वामी शिव दयाल शर्मा व स्वामी गिरिराज प्रसाद शर्मा ग्रुप के 30 सदस्य अपना बखूबी किरदार निभाकर लोगों के दिलों में छाप छोड़ रहे हैं। सौरभ द्विवेदी ने बताया कि वह वर्ष 2011 से रामलीला व रासलीला का मंचन संभाल रहे हैं। इससे पहले उनके पिता स्वामी शिव दयाल शर्मा व दादा स्वामी गिरिराज प्रसाद शर्मा के कंधाें पर मंचन का कार्यभार था। सभी सदस्य श्रीराम की भक्ति में इतना लीन हो चुके हैं कि कोरोना जैसी बाधा भी उनकी श्रीराम भक्ति के बीच रूकावट नहीं बन सकी। उन्होंने कोरोना काल में भी ठाकुरजी के सामने रामलीला का मंचन कर अपनी कला को बरकरार रखा। वह रामलीला व रासलीला मंचन के माध्यम से लोगों के मन में प्रभु की अलख जगाने का प्रयास कर रहे हैं।
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दशहरा के बाद राजस्थान व दिवाली पश्चात अयोध्या में करेंगे मंचन
आचार्य सौरभ द्विवेदी ने कहा कि उनका कार्य विभिन्न राज्यों में जाकर रामलीला का मंचन करना है। वह एक के बाद दूसरी जगह रामलीला का मंचन करते हैं। मंचन के बीच कुछ दिनों के लिए घर पर रहते हैं। घर की व्यवस्था संभालने के बाद वह फिर किसी अन्य जगह जाकर रामलीला मंचन का प्रभार संभालते हैं। मंचन मंडली में पारिवारिक व ब्राह्मण समाज से ही कलाकारों को शामिल किया गया है। दशहरा के बाद राजस्थान के जिला हनुमानगढ़ के भादरा और दिवाली के बाद अयोध्या जाकर अपनी टीम के साथ रामलीला का मंचन करेंगे।
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