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Sonipat News: धान की पौध तैयार करने से पहले बीज उपचार जरूरी
Fri, 22 May 2026 08:53 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 22 May 2026 08:53 PM IST
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धान की पौध तैयार करने से पहले बीज उपचार की जानकारी देते कृषि अधिकारी राजेन्द्र सिंह मेहरा। संवा
गोहाना। कृषि विभाग ने किसानों को धान की पौध तैयार करने से पहले बीज उपचार करने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि बीज उपचार करने से धान की फसल को कई बीज जनित बीमारियों से बचाया जा सकता है। साथ ही फसल में बकानी रोग का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाता है।
कृषि विभाग ने पहले ही 15 मई के बाद धान की पौध तैयार करने की तारीख तय की थी ताकि फसल पर मौसम का प्रतिकूल असर कम पड़े और पानी की भी बचत हो सके।
कृषि विभाग के एसडीओ राजेंद सिंह मेहरा ने बताया कि किसान कार्बेन्डाजिम 10 ग्राम और स्ट्रेप्टोसाइक्लीन 1 ग्राम को 10 लीटर पानी में घोलकर उसका घोल तैयार करें। इसके बाद 10 से 12 किलो धान के बीज को इस घोल में 24 घंटे तक भिगोकर रखें। यही बीज उपचार की सही विधि है। किसान अधिक जानकारी के लिए कृषि विभाग से संपर्क कर सकते हैं।
एसडीओ राजेंद्र सिंह मेहरा के अनुसार किसान प्रमाणित और साफ बीज का ही प्रयोग करें। समय पर पौध तैयार करने और सही विधि अपनाने से फसल में रोगों का खतरा कम होता है और उत्पादन बेहतर मिलता है। धान में बकानी रोग लगने पर पौधे लंबे और कमजोर हो जाते हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। समय रहते बीज उपचार करने से इस बीमारी से बचाव संभव है।
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कृषि विभाग ने पहले ही 15 मई के बाद धान की पौध तैयार करने की तारीख तय की थी ताकि फसल पर मौसम का प्रतिकूल असर कम पड़े और पानी की भी बचत हो सके।
कृषि विभाग के एसडीओ राजेंद सिंह मेहरा ने बताया कि किसान कार्बेन्डाजिम 10 ग्राम और स्ट्रेप्टोसाइक्लीन 1 ग्राम को 10 लीटर पानी में घोलकर उसका घोल तैयार करें। इसके बाद 10 से 12 किलो धान के बीज को इस घोल में 24 घंटे तक भिगोकर रखें। यही बीज उपचार की सही विधि है। किसान अधिक जानकारी के लिए कृषि विभाग से संपर्क कर सकते हैं।
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एसडीओ राजेंद्र सिंह मेहरा के अनुसार किसान प्रमाणित और साफ बीज का ही प्रयोग करें। समय पर पौध तैयार करने और सही विधि अपनाने से फसल में रोगों का खतरा कम होता है और उत्पादन बेहतर मिलता है। धान में बकानी रोग लगने पर पौधे लंबे और कमजोर हो जाते हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। समय रहते बीज उपचार करने से इस बीमारी से बचाव संभव है।
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