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नियम 134ए : शीतलहर के बीच शिक्षा का अधिकार मांगने सड़क पर उतरे बच्चे और अभिभावक हो रहे बीमार
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नियम 134ए के तहत शिक्षा का अधिकार मांगने के लिए सड़क पर उतरने वाले बच्चे व उनके अभिभावक अब बीमारियों की चपेट मेें आने लगे हैं। सड़क पर पाठशाला लगाकर शीतलहर के बीच पढ़ने व नारे लगाने वाले कई बच्चे व उनके अभिभावक खांसी, जुकाम व बुखार की चपेट में आ गए हैं। बीमारी के बावजूद भी ये अभिभावक बच्चों की पढ़ाई को लेकर चिंतित हैं। अभिभावकों ने सरकार, प्रशासन व शिक्षा अधिकारियों से बच्चों का दाखिला सुनिश्चित करवाने की मांग की है।
नियम 134ए के तहत जिले में 2542 विद्यार्थियों को पहले ड्रॉ के तहत स्कूल अलॉट किए गए थे। इन विद्यार्थियों को 24 दिसंबर तक निजी स्कूलों में उपस्थिति दर्ज करवाने की बात कही गई। लेकिन निजी स्कूलों ने दाखिला देने से साफ इनकार कर दिया। तीन बार तिथि बढ़ाने के बाद भी निजी स्कूलों ने दाखिला देने की हामी नहीं भरी। जिस कारण अभिभावक छात्र अभिभावक संघ के नेतृत्व में रोजाना सड़कों पर उतरकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। शीतलहर के बीच बच्चों की पाठशाला लगा रहे हैं।
अभिभावकों का कहना है कि ठंडी हवाओं के थपेड़ों के बीच अब वे और उनके बच्चे बीमार हो रहे हैं। लेकिन अधिकारी और शिक्षा विभाग बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाने में नाकाम हैं। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा अधिकारियों ने अब सभी पात्र विद्यार्थियों के आय प्रमाणपत्रों की जांच के आदेश दिए हैं, जो सिर्फ समय की बर्बादी और अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ाने का काम है।
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एक सप्ताह में 198 के दाखिले निरस्त
अभिभावकों का कहना है कि नियम 134ए के तहत दाखिले की अंतिम तिथि 15 जनवरी निर्धारित थी। अंतिम तिथि तक पात्र 2542 विद्यार्थियों मेें से 1013 विद्यार्थियों के दाखिले हुए थे। जबकि 309 विद्यार्थियों के दाखिले निरस्त किए गए थे। उसके बाद से अब तक अभिभावक लगातार बच्चों के दाखिले करवाने के लिए भटक रहे हैं। स्कूलों ने दाखिले तो नहीं दिए। लेकिन शिक्षा विभाग की छूट के बाद दाखिले निरस्त करने में तेजी दिखा रहे हैं। पिछले 6 दिनों में 198 विद्यार्थियों को दाखिला निरस्त किया गया है। जबकि महज 86 विद्यार्थियों का ही दाखिला सुनिश्चित किया है।
यह है वर्तमान स्थिति
पहले ड्रॉ में कुल पात्र विद्यार्थी-2542
अब तक दाखिले मिले-1099
दाखिले निरस्त हुए-507
दाखिले से वंचित विद्याथी-936
दूसरे ड्रा में शामिल विद्यार्थी-544
बोले अभिभावक
मेरा बेटा नैतिक दूसरी कक्षा में है। मूल्यांकन परीक्षा के बाद उसे लिटल एंजल्स स्कूल अलॉट किया गया था। पुराने स्कूल से एसएलसी निकलवा लिया। लेकिन नए स्कूल ने दाखिला ही नहीं लिया। दाखिले के लिए कड़ाके की सर्दी के बीच रोजाना बच्चों को साथ लेकर अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। सड़क किनारे बच्चों की पाठशाला लगा रहे हैं। दाखिले तो नहीं मिले। लेकिन शीतलहरों से पहले बेटा और अब मैं भी बीमारी हो गई। अधिकारियों से मांग है कि बच्चों को जल्द दाखिला दिलवाया जाए। -मालती, अभिभावक।
मेरा बेटा दिशांत पांचवीं कक्षा में पढ़ता है। उसे विवेकानंद स्कूल अलॉट हुआ था। सभी प्रमाणपत्र लेकर जब बेटे को दाखिला दिलवाने गए तो स्कूल वालों ने दाखिला देने से मना कर दिया। इस बारे में शिक्षा अधिकारियों को शिकायत दी, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। उस दिन से अब तक रोजाना शीतलहर के बीच धरने-प्रदर्शन कर रहे हैं। बच्चों को साथ लेकर सड़क किनारे पाठशाला लगा रहे हैं। जिससे कई बच्चे और अभिभावक बीमार हो चुके हैं। मैं भी कई दिन से बीमार हूं। अधिकारी आय ही नहीं, सभी प्रमाणपत्रों की भले दोबारा जांच करवा लें, लेकिन पात्र विद्यार्थियों को जल्द दाखिला दे दें। सुनील, अभिभावक।
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नियम 134ए के तहत जिले में 2542 विद्यार्थियों को पहले ड्रॉ के तहत स्कूल अलॉट किए गए थे। इन विद्यार्थियों को 24 दिसंबर तक निजी स्कूलों में उपस्थिति दर्ज करवाने की बात कही गई। लेकिन निजी स्कूलों ने दाखिला देने से साफ इनकार कर दिया। तीन बार तिथि बढ़ाने के बाद भी निजी स्कूलों ने दाखिला देने की हामी नहीं भरी। जिस कारण अभिभावक छात्र अभिभावक संघ के नेतृत्व में रोजाना सड़कों पर उतरकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। शीतलहर के बीच बच्चों की पाठशाला लगा रहे हैं।
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अभिभावकों का कहना है कि ठंडी हवाओं के थपेड़ों के बीच अब वे और उनके बच्चे बीमार हो रहे हैं। लेकिन अधिकारी और शिक्षा विभाग बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाने में नाकाम हैं। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा अधिकारियों ने अब सभी पात्र विद्यार्थियों के आय प्रमाणपत्रों की जांच के आदेश दिए हैं, जो सिर्फ समय की बर्बादी और अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ाने का काम है।
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एक सप्ताह में 198 के दाखिले निरस्त
अभिभावकों का कहना है कि नियम 134ए के तहत दाखिले की अंतिम तिथि 15 जनवरी निर्धारित थी। अंतिम तिथि तक पात्र 2542 विद्यार्थियों मेें से 1013 विद्यार्थियों के दाखिले हुए थे। जबकि 309 विद्यार्थियों के दाखिले निरस्त किए गए थे। उसके बाद से अब तक अभिभावक लगातार बच्चों के दाखिले करवाने के लिए भटक रहे हैं। स्कूलों ने दाखिले तो नहीं दिए। लेकिन शिक्षा विभाग की छूट के बाद दाखिले निरस्त करने में तेजी दिखा रहे हैं। पिछले 6 दिनों में 198 विद्यार्थियों को दाखिला निरस्त किया गया है। जबकि महज 86 विद्यार्थियों का ही दाखिला सुनिश्चित किया है।
यह है वर्तमान स्थिति
पहले ड्रॉ में कुल पात्र विद्यार्थी-2542
अब तक दाखिले मिले-1099
दाखिले निरस्त हुए-507
दाखिले से वंचित विद्याथी-936
दूसरे ड्रा में शामिल विद्यार्थी-544
बोले अभिभावक
मेरा बेटा नैतिक दूसरी कक्षा में है। मूल्यांकन परीक्षा के बाद उसे लिटल एंजल्स स्कूल अलॉट किया गया था। पुराने स्कूल से एसएलसी निकलवा लिया। लेकिन नए स्कूल ने दाखिला ही नहीं लिया। दाखिले के लिए कड़ाके की सर्दी के बीच रोजाना बच्चों को साथ लेकर अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। सड़क किनारे बच्चों की पाठशाला लगा रहे हैं। दाखिले तो नहीं मिले। लेकिन शीतलहरों से पहले बेटा और अब मैं भी बीमारी हो गई। अधिकारियों से मांग है कि बच्चों को जल्द दाखिला दिलवाया जाए। -मालती, अभिभावक।
मेरा बेटा दिशांत पांचवीं कक्षा में पढ़ता है। उसे विवेकानंद स्कूल अलॉट हुआ था। सभी प्रमाणपत्र लेकर जब बेटे को दाखिला दिलवाने गए तो स्कूल वालों ने दाखिला देने से मना कर दिया। इस बारे में शिक्षा अधिकारियों को शिकायत दी, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। उस दिन से अब तक रोजाना शीतलहर के बीच धरने-प्रदर्शन कर रहे हैं। बच्चों को साथ लेकर सड़क किनारे पाठशाला लगा रहे हैं। जिससे कई बच्चे और अभिभावक बीमार हो चुके हैं। मैं भी कई दिन से बीमार हूं। अधिकारी आय ही नहीं, सभी प्रमाणपत्रों की भले दोबारा जांच करवा लें, लेकिन पात्र विद्यार्थियों को जल्द दाखिला दे दें। सुनील, अभिभावक।