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सड़क को किसानों ने नहीं, बल्कि पुलिस ने अवरुद्ध कर रखा था : एसकेएम
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संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने कहा कि पुलिस टीम स्वयं ही टिकरी बॉर्डर और गाजीपुर मोर्चे पर बैरिकेड हटा रही है। इससे किसान सही साबित हुए हैं कि पुलिस ने ही सड़कों को अवरुद्ध कर रखा था। आंदोलनकारियों ने पहले भी यातायात की जगह दी थी और अब भी ऐसा ही किया जा रहा है। किसानों ने कहीं रोड जाम नहीं कर रखा है।
एसकेएम समन्वय समिति के सदस्य डॉ. दर्शन पाल सिंह ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली पुलिस प्रदर्शनकारी किसानों के खिलाफ सड़कों पर लगाए गए बैरिकेड और अन्य बाधाओं को हटाने में स्वयं लगी है। ऐसा टिकरी मोर्चा के साथ गाजीपुर मोर्चा पर भी हो रहा है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ ऐसा व्यवहार किया है, जैसे कि वह भारत के विरोधी हैं और देश की सुरक्षा के लिए खतरा है। पुलिस ने सीमेंट के टुकड़े, धातु के बैरिकेड की नौ परतें, सड़कों पर रेत के ट्रक लगाकर और कीलों की कई परतों को ठोक कर मोर्चा स्थलों की किलेबंदी कर रखी थी। एसकेएम इन घटनाओं पर नजर रखे हुए है और भाजपा सरकार के युद्धाभ्यास को देख रहा है।
सर्वोच्च न्यायालय की देखरेख में हो लखीमपुर कांड की जांच
एसकेएम ने कहा कि लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड की संवेदनशील जांच धीमी गति से चल रही है। उच्चतम न्यायालय ने भी यह नोट किया है। उत्तर प्रदेश सरकार प्रमुख अधिकारियों के तबादले कर रही है। राजनीतिक कारणों से हो रहे यह तबादले शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे किसानों के बर्बर नरसंहार में जांच और न्याय को प्रभावित कर सकते हैं। एसकेएम उम्मीद करता है कि सुप्रीम कोर्ट इन तबादलों और उनके कारणों पर भी गौर करेगा। साथ ही मांग करते हैं कि इस मामले में न्याय सुनिश्चित करने के लिए पूरी जांच की निगरानी सीधे उच्चतम न्यायालय द्वारा की जानी चाहिए।
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एसकेएम समन्वय समिति के सदस्य डॉ. दर्शन पाल सिंह ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली पुलिस प्रदर्शनकारी किसानों के खिलाफ सड़कों पर लगाए गए बैरिकेड और अन्य बाधाओं को हटाने में स्वयं लगी है। ऐसा टिकरी मोर्चा के साथ गाजीपुर मोर्चा पर भी हो रहा है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ ऐसा व्यवहार किया है, जैसे कि वह भारत के विरोधी हैं और देश की सुरक्षा के लिए खतरा है। पुलिस ने सीमेंट के टुकड़े, धातु के बैरिकेड की नौ परतें, सड़कों पर रेत के ट्रक लगाकर और कीलों की कई परतों को ठोक कर मोर्चा स्थलों की किलेबंदी कर रखी थी। एसकेएम इन घटनाओं पर नजर रखे हुए है और भाजपा सरकार के युद्धाभ्यास को देख रहा है।
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सर्वोच्च न्यायालय की देखरेख में हो लखीमपुर कांड की जांच
एसकेएम ने कहा कि लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड की संवेदनशील जांच धीमी गति से चल रही है। उच्चतम न्यायालय ने भी यह नोट किया है। उत्तर प्रदेश सरकार प्रमुख अधिकारियों के तबादले कर रही है। राजनीतिक कारणों से हो रहे यह तबादले शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे किसानों के बर्बर नरसंहार में जांच और न्याय को प्रभावित कर सकते हैं। एसकेएम उम्मीद करता है कि सुप्रीम कोर्ट इन तबादलों और उनके कारणों पर भी गौर करेगा। साथ ही मांग करते हैं कि इस मामले में न्याय सुनिश्चित करने के लिए पूरी जांच की निगरानी सीधे उच्चतम न्यायालय द्वारा की जानी चाहिए।
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