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आरओ, डस्टबिन खरीद घोटाले में पांच बीडीपीओ दोषी, दर्ज होगा केस
ब्यूरो/ अमर उजाला, सोनीपत
Updated Sat, 24 Dec 2016 11:59 PM IST
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वाटर कूलर व डस्टबिन खरीद घोटाले में जांच के बाद उपायुक्त ने पांच बीडीपीओ को दोषी पाया है। परिवेदना समिति की बैठक में उठाए गए मामले की जांच के बाद उपायुक्त के. मकरंद पांडुरंग ने रिपोर्ट तैयार कर कार्रवाई को संबंधित विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव को भेज दी है। इसमें पांच बीडीपीओ को दोषी ठहराते हुए इन पर भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की अनुशंसा की गई है। साथ ही इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी होगी। अमर उजाला ने 26 मई के अंक में इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
सवा दो करोड़ का सामान साढ़े तीन करोड़ का दिखाया
मामले की जांच में उपायुक्त ने पाया कि पांचों अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए गड़बड़झाला किया है। खरीद उस समय की गई थी, जब प्रदेश सरकार ने पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने की वजह से इन्हें भंग कर दिया था। इस अवधि में पंचायतों का पूरा कामकाज संबंधित इलाके के बीडीपीओ देख रहे थे। जांच में पाया गया है कि अधिकारियों ने करीब एक करोड़ 12 लाख 72 हजार रुपये की गड़बड़ी की है। जांच में उपायुक्त ने पाया है कि यह सामान बाजार भाव से दोगुनी कीमत पर खरीदा दिखाया गया है, जो सामान करीब सवा दो करोड़ की कीमत का होना चाहिए था, उसकी कीमत करीब साढ़े तीन करोड़ बताई गई।
भाजपा नेता ने उठाया था मामला
हरियाणा पिछड़ा वर्ग एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग वेलफेयर बोर्ड के चेयरमैन रामचंद्र जांगड़ा ने जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में यह मामला उठाया था। जांगड़ा ने बताया था कि 14वें वित्त आयोग के फंड से गांवों के लिए वाटर कूलर, डस्टबिन, आरओ सिस्टम तथा स्टेबलाइजर खरीदने के आदेश दिए गए थे। इसके लिए भारी-भरकम बजट भी जारी किया गया था। वित्त आयोग की ओर से 209 करोड़ रुपये पूरे हरियाणा में पंचायतों के खाते में आए थे, जिसमें से सोनीपत जिले को छह करोड़ रुपये मिले थे। इस दौरान संबंधित बीडीपीओ ने वित्त आयोग की ओर से जारी पंचायतों के खातों में जमा करोड़ों रुपये निकालकर भारी संख्या में डस्टबिन व वाटर कूलर खरीदे गए। इनकी कीमत लाखों में दिखाई गई थी, लेकिन वास्तव में कीमत हजारों में है। बाजार में उस समय प्रति डस्टबिन की कीमत 900 रुपये थी, जबकि खरीद कीमत 3500 रुपये दिखाई गई थी।
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वहीं, बाजार में प्रति वाटर कूलर की कीमत 35 हजार रुपये है, जबकि अधिकारियों द्वारा इसकी कीमत 1 लाख 40 हजार रुपये दर्शाई गई थी। कष्ट निवारण समिति के चेयरमैन एवं भूगर्भ राज्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मामले की जांच उपायुक्त को दी थी।
डीसी मकरंद पांडुरंग ने शुक्रवार को यह जांच पूरी कर ली है। जांच के आधार पर सोनीपत, राई, खरखौदा, गन्नौर व गोहाना के तत्कालीन बीडीपीओ (इनमें कई अभी भी तैनात हैं) दोषी पाए गए हैं। वहीं, आरोपियों से भी इस संबंध में पूछताछ की गई थी, लेकिन वह अपने बचाव में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाए। ऐसे में उपायुक्त ने अब जांच रिपोर्ट के आधार पर विकास एवं पंचायत विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव नवराज संधु को पत्र लिखकर पांचों ब्लाकों के तत्कालीन बीडीपीओ के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज करवाने व विभागीय कार्रवाई बकिए जाने की अनुशंसा की है।
इन पर साबित हुए आरोप
जांच में जिन अधिकारियों पर कार्रवाई की अनुशंसा की गई है, इनमें गन्नौर की मौजूदा बीडीपीओ पूनम चंदा का नाम भी शामिल है। जांच रिपोर्ट के अनुसार गन्नौर ब्लाक में 31 ग्राम पंचायतों के लिए 84 आरओ सिस्टम, वाटर कूलर व स्टेबलाइजर के सेट तथा 218 डस्टबिन खरीदे गए। ये सामान 99 लाख 78 हजार 255 रुपये में खरीदा गया बताया गया है। इस कीमत में टैक्स भी शामिल है, जबकि जांच में पाया गया इस सामान की बाजार में कीमत 59 लाख 72 हजार 736 रुपये है।
-खरखौदा ब्लॉक के तत्कालीन बीडीपीओ सुमित बख्शी पर ब्लाक की 19 ग्राम पंचायतों के लिए एक वाटर कूलर सैट व 833 डस्टबिन खरीदे थे। इनकी खरीद कीमत 62 लाख 98 हजार 277 रुपए बताई गई थी, जबकि बाजार में इनकी कीमत मात्र 34 लाख 24 हजार 549 रुपए मिली है।
-गोहाना के तत्कालीन बीडीपीओ इकबाल राठी ने गोहाना ब्लाक की 31 पंचायतों के लिए 39 वाटर कूलर सैट व 1871 डस्टबिनों की खरीद की। इनकी कीमत एक करोड़, आठ लाख 45 हजार 340 रुपये बताई गई थी, जबकि इनका बाजार भाव जांच में 72 लाख 14 हजार 27 रुपये मिला है।
-सोनीपत ब्लॉक के तत्कालीन बीडीपीओ राजेश कुमार पर 23 ग्राम पंचायतों के लिए 706 डस्टबिन खरीद थे। इनकी बाजार कीमत 55 लाख 77 हजार 237 रुपये पाई गई है, जबकि इनकी खरीद उस समय 66 लाख 64 हजार रुपये में बताई गई थी।
-राई के तत्कालीन बीडीपीओ राम सिंह ने एक पंचायत के लिए 70 डस्टबिन खरीदे और इनकी कीमत पांच लाख 74 हजार 700 रुपये बताई गई थी। इनकी वास्तविक कीमत पांच लाख 45 हजार रुपये मिली है।
जांच के बाद कार्रवाई के लिए लिखा पत्र
मामले में छह माह की जांच कर रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। रिपोर्ट में सोनीपत, राई, गोहाना, गन्नौर व खरखौदा के तत्कालीन बीडीपीओ को दोषी पाया गया है। बाजार भाव से कहीं अधिक कीमत पर सामान खरीदकर घोटाला किया गया है। इसके लिए पत्र लिखकर कार्रवाई की अनुशंसा की है।
-के मकरंद पांडुरंग, उपायुक्त सोनीपत।
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सवा दो करोड़ का सामान साढ़े तीन करोड़ का दिखाया
मामले की जांच में उपायुक्त ने पाया कि पांचों अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए गड़बड़झाला किया है। खरीद उस समय की गई थी, जब प्रदेश सरकार ने पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने की वजह से इन्हें भंग कर दिया था। इस अवधि में पंचायतों का पूरा कामकाज संबंधित इलाके के बीडीपीओ देख रहे थे। जांच में पाया गया है कि अधिकारियों ने करीब एक करोड़ 12 लाख 72 हजार रुपये की गड़बड़ी की है। जांच में उपायुक्त ने पाया है कि यह सामान बाजार भाव से दोगुनी कीमत पर खरीदा दिखाया गया है, जो सामान करीब सवा दो करोड़ की कीमत का होना चाहिए था, उसकी कीमत करीब साढ़े तीन करोड़ बताई गई।
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भाजपा नेता ने उठाया था मामला
हरियाणा पिछड़ा वर्ग एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग वेलफेयर बोर्ड के चेयरमैन रामचंद्र जांगड़ा ने जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में यह मामला उठाया था। जांगड़ा ने बताया था कि 14वें वित्त आयोग के फंड से गांवों के लिए वाटर कूलर, डस्टबिन, आरओ सिस्टम तथा स्टेबलाइजर खरीदने के आदेश दिए गए थे। इसके लिए भारी-भरकम बजट भी जारी किया गया था। वित्त आयोग की ओर से 209 करोड़ रुपये पूरे हरियाणा में पंचायतों के खाते में आए थे, जिसमें से सोनीपत जिले को छह करोड़ रुपये मिले थे। इस दौरान संबंधित बीडीपीओ ने वित्त आयोग की ओर से जारी पंचायतों के खातों में जमा करोड़ों रुपये निकालकर भारी संख्या में डस्टबिन व वाटर कूलर खरीदे गए। इनकी कीमत लाखों में दिखाई गई थी, लेकिन वास्तव में कीमत हजारों में है। बाजार में उस समय प्रति डस्टबिन की कीमत 900 रुपये थी, जबकि खरीद कीमत 3500 रुपये दिखाई गई थी।
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वहीं, बाजार में प्रति वाटर कूलर की कीमत 35 हजार रुपये है, जबकि अधिकारियों द्वारा इसकी कीमत 1 लाख 40 हजार रुपये दर्शाई गई थी। कष्ट निवारण समिति के चेयरमैन एवं भूगर्भ राज्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मामले की जांच उपायुक्त को दी थी।
डीसी मकरंद पांडुरंग ने शुक्रवार को यह जांच पूरी कर ली है। जांच के आधार पर सोनीपत, राई, खरखौदा, गन्नौर व गोहाना के तत्कालीन बीडीपीओ (इनमें कई अभी भी तैनात हैं) दोषी पाए गए हैं। वहीं, आरोपियों से भी इस संबंध में पूछताछ की गई थी, लेकिन वह अपने बचाव में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाए। ऐसे में उपायुक्त ने अब जांच रिपोर्ट के आधार पर विकास एवं पंचायत विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव नवराज संधु को पत्र लिखकर पांचों ब्लाकों के तत्कालीन बीडीपीओ के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज करवाने व विभागीय कार्रवाई बकिए जाने की अनुशंसा की है।
इन पर साबित हुए आरोप
जांच में जिन अधिकारियों पर कार्रवाई की अनुशंसा की गई है, इनमें गन्नौर की मौजूदा बीडीपीओ पूनम चंदा का नाम भी शामिल है। जांच रिपोर्ट के अनुसार गन्नौर ब्लाक में 31 ग्राम पंचायतों के लिए 84 आरओ सिस्टम, वाटर कूलर व स्टेबलाइजर के सेट तथा 218 डस्टबिन खरीदे गए। ये सामान 99 लाख 78 हजार 255 रुपये में खरीदा गया बताया गया है। इस कीमत में टैक्स भी शामिल है, जबकि जांच में पाया गया इस सामान की बाजार में कीमत 59 लाख 72 हजार 736 रुपये है।
-खरखौदा ब्लॉक के तत्कालीन बीडीपीओ सुमित बख्शी पर ब्लाक की 19 ग्राम पंचायतों के लिए एक वाटर कूलर सैट व 833 डस्टबिन खरीदे थे। इनकी खरीद कीमत 62 लाख 98 हजार 277 रुपए बताई गई थी, जबकि बाजार में इनकी कीमत मात्र 34 लाख 24 हजार 549 रुपए मिली है।
-गोहाना के तत्कालीन बीडीपीओ इकबाल राठी ने गोहाना ब्लाक की 31 पंचायतों के लिए 39 वाटर कूलर सैट व 1871 डस्टबिनों की खरीद की। इनकी कीमत एक करोड़, आठ लाख 45 हजार 340 रुपये बताई गई थी, जबकि इनका बाजार भाव जांच में 72 लाख 14 हजार 27 रुपये मिला है।
-सोनीपत ब्लॉक के तत्कालीन बीडीपीओ राजेश कुमार पर 23 ग्राम पंचायतों के लिए 706 डस्टबिन खरीद थे। इनकी बाजार कीमत 55 लाख 77 हजार 237 रुपये पाई गई है, जबकि इनकी खरीद उस समय 66 लाख 64 हजार रुपये में बताई गई थी।
-राई के तत्कालीन बीडीपीओ राम सिंह ने एक पंचायत के लिए 70 डस्टबिन खरीदे और इनकी कीमत पांच लाख 74 हजार 700 रुपये बताई गई थी। इनकी वास्तविक कीमत पांच लाख 45 हजार रुपये मिली है।
जांच के बाद कार्रवाई के लिए लिखा पत्र
मामले में छह माह की जांच कर रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। रिपोर्ट में सोनीपत, राई, गोहाना, गन्नौर व खरखौदा के तत्कालीन बीडीपीओ को दोषी पाया गया है। बाजार भाव से कहीं अधिक कीमत पर सामान खरीदकर घोटाला किया गया है। इसके लिए पत्र लिखकर कार्रवाई की अनुशंसा की है।
-के मकरंद पांडुरंग, उपायुक्त सोनीपत।