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48 लाख की रेड लाइट डेढ़ साल से बंद, नाले भी लगे टूटने
Sonipat
Updated Sun, 28 Aug 2016 12:56 AM IST
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खराब पड़ीं रेड लाइट।
- फोटो : amar ujala
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प्रदेश की केबिनेट मंत्री कविता जैन के शहर सोनीपत में नौकरशाही हावी होती जा रही है। नगर निगम तीन गड़बड़ियों के मामले में अभी जांच पूरी भी नहीं कर सका है कि दो और नए मामले उजागर हो गए हैं। निगम की ओर से 48 लाख में खरीदी गई ट्रैफिक रेड लाइट बेदम निकली हैं। ट्रैफिक लाइट खरीद मामले में कमेटी से जांच कराने का निगम आयुक्त ने भरोसा दिया है, वहीं पब्लिक हेल्थ की ओर से ककरोई रोड पर बनाने गए बरसाती नाले टूटने लगे हैं। लगातार उजागर हो रही गड़बड़ियों से प्रशासन की भी किरकिरी हो रही है। ऐसे में डीसी ने निगम आयुक्त ने सोमवार तक जहां ई-टेंडरिंग मामले की रिपोर्ट मांगी हैं, वहीं सड़क सैंपल फेल होने के मामले में फोन कर पूछा कि जांच में देरी क्यों हो रही है।
रेड लाइट खरीद कमेटी को नोटिस तक नहीं
एक साल पांच माह पहले नगर निगम ने 48 लाख रुपये खर्च कर रेड लाइट लगवाई थीं। कुछ समय पहले ही ये बंद हो गईं। इसके बाद निगम के अधिकारी जल्द लाइटों को ठीक कराने की बात करने लगे, लेकिन केवल महाराजा अग्रसेन चौक को छोड़कर कहीं भी ढंग से रेड लाइटें चालू नहीं हो सकी। जांच का दावा करने वाले अधिकारियों ने अभी तक खरीद कमेटी में शामिल किसी अधिकारी को नोटिस देकर यह तक नहीं पूछा कि आखिर क्या गड़बड़ी है। अब पूछने पर निगम के आला अधिकारी कमेटी बनाकर जांच की बात कह रहे हैं।
ककरोई रोड पर पब्लिक के लाखों रुपये बह गए नाले में
पब्लिक हेल्थ की ओर से ककरोई रोड पर महज आठ माह पहले लाखों रुपये खर्च कर सड़क मार्ग के दोनों नाले तरफ बनवाए गए थे ताकि सड़क से बरसात के पानी को निकाला जा सकें। लेकिन कुछ समय के बाद ही नाले टूटना शुरू हो गए हैं। विकास नगर निवासी ओमप्रकाश ने बताया है कि इसकी शिकायत बार-बार अधिकारियों को देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई हैं। इसके बाद अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ सीएम विडो पर शिकायत दी गई है।
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तीन-तीन मामलों में चल रही जांच, कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं
नगर परिषद के समय में हुए घोटालों की जांच का जिम्मा मंत्रियों के द्वारा निगम के अधिकारियों को सौंपा गया हैं, लेकिन निगम अपने किसी भी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। ई-टेंडरिंग मामला हो या सड़क सैंपल फेल या फिर पार्कों के रखरखाव में गड़बड़ी का मामला, किसी भी केस में अभी तक किसी भी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई तो दूर, निगम नोटिस तक नहीं दे सका है। वह भी तब, जब जिला कष्ट निवारण कमेटी की मीटिंग में मंत्री नायब सैनी शाम तक रिपोर्ट मांग चुके हैं।
सड़क के सैंपल फेल होने के मामले में निगम अधिकारी गंभीर नहीं
नगर निगम सड़क सैंपल फेल होने के मामले में जांच को लेकर निगम गंभीर नहीं लग रहा। निगम के ईओ रोहताश बिश्नोई ने आप आदमी पार्टी के प्रदर्शन के दौरान कहा था कि मामले की जांच अकाउंट आफिसर संतलाल बतरा को सौंपी गई है। बतरा से पूछा गया तो उन्होंने साफ तौर पर मना कर दिया, कहां मेरे पास कोई जांच नहीं आई है। ऐसे में कार्रवाई का सवाल ही नहीं उठता।
सोमवार तक दें पूरी रिपोर्ट : डीसी
उपायुक्त केएम पांडुरंग ने कहा है कि निगम की लगातार उजागर हो रही गड़बड़ियों को गंभीरता से लिया गया है। निगम आयुक्त से पूछा है कि सड़क सैंपल फेल मामले में क्यों लापरवाही बरती जा रही है। साथ ही अभी तक ई-टेंडरिंग मामले की जांच रिपोर्ट उपायुक्त कार्यालय नहीं पहुंची। सोमवार तक डीसी ने निगम प्रशासन से मामले की पूरी रिपोर्ट तलब की है।
पंचायती राज एक्सईएन ने छोड़ दी जांच : आयुक्त
ई-टेंडरिंग मामले की जांच पंचायती राज विभाग के एक्सईएन को दी गई थी, लेकिन उन्होंने खुद को जांच से अलग कर लिया। अब नए सिरे से रिपोर्ट तैयार की डीसी कार्यालय भेजी जा रही है। सड़क सैंपल फेल मामले में रिकार्ड एकत्रित किया जा रहा है। वहीं, रेड लाइट खरीद मामले में एमई विवेक गिल, जेई व पुलिस अधिकारियों की कमेटी बनाकर जांच करवाई जाएगी।
अश्वनी मैंगी, आयुक्त नगर निगम
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रेड लाइट खरीद कमेटी को नोटिस तक नहीं
एक साल पांच माह पहले नगर निगम ने 48 लाख रुपये खर्च कर रेड लाइट लगवाई थीं। कुछ समय पहले ही ये बंद हो गईं। इसके बाद निगम के अधिकारी जल्द लाइटों को ठीक कराने की बात करने लगे, लेकिन केवल महाराजा अग्रसेन चौक को छोड़कर कहीं भी ढंग से रेड लाइटें चालू नहीं हो सकी। जांच का दावा करने वाले अधिकारियों ने अभी तक खरीद कमेटी में शामिल किसी अधिकारी को नोटिस देकर यह तक नहीं पूछा कि आखिर क्या गड़बड़ी है। अब पूछने पर निगम के आला अधिकारी कमेटी बनाकर जांच की बात कह रहे हैं।
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ककरोई रोड पर पब्लिक के लाखों रुपये बह गए नाले में
पब्लिक हेल्थ की ओर से ककरोई रोड पर महज आठ माह पहले लाखों रुपये खर्च कर सड़क मार्ग के दोनों नाले तरफ बनवाए गए थे ताकि सड़क से बरसात के पानी को निकाला जा सकें। लेकिन कुछ समय के बाद ही नाले टूटना शुरू हो गए हैं। विकास नगर निवासी ओमप्रकाश ने बताया है कि इसकी शिकायत बार-बार अधिकारियों को देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई हैं। इसके बाद अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ सीएम विडो पर शिकायत दी गई है।
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तीन-तीन मामलों में चल रही जांच, कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं
नगर परिषद के समय में हुए घोटालों की जांच का जिम्मा मंत्रियों के द्वारा निगम के अधिकारियों को सौंपा गया हैं, लेकिन निगम अपने किसी भी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। ई-टेंडरिंग मामला हो या सड़क सैंपल फेल या फिर पार्कों के रखरखाव में गड़बड़ी का मामला, किसी भी केस में अभी तक किसी भी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई तो दूर, निगम नोटिस तक नहीं दे सका है। वह भी तब, जब जिला कष्ट निवारण कमेटी की मीटिंग में मंत्री नायब सैनी शाम तक रिपोर्ट मांग चुके हैं।
सड़क के सैंपल फेल होने के मामले में निगम अधिकारी गंभीर नहीं
नगर निगम सड़क सैंपल फेल होने के मामले में जांच को लेकर निगम गंभीर नहीं लग रहा। निगम के ईओ रोहताश बिश्नोई ने आप आदमी पार्टी के प्रदर्शन के दौरान कहा था कि मामले की जांच अकाउंट आफिसर संतलाल बतरा को सौंपी गई है। बतरा से पूछा गया तो उन्होंने साफ तौर पर मना कर दिया, कहां मेरे पास कोई जांच नहीं आई है। ऐसे में कार्रवाई का सवाल ही नहीं उठता।
सोमवार तक दें पूरी रिपोर्ट : डीसी
उपायुक्त केएम पांडुरंग ने कहा है कि निगम की लगातार उजागर हो रही गड़बड़ियों को गंभीरता से लिया गया है। निगम आयुक्त से पूछा है कि सड़क सैंपल फेल मामले में क्यों लापरवाही बरती जा रही है। साथ ही अभी तक ई-टेंडरिंग मामले की जांच रिपोर्ट उपायुक्त कार्यालय नहीं पहुंची। सोमवार तक डीसी ने निगम प्रशासन से मामले की पूरी रिपोर्ट तलब की है।
पंचायती राज एक्सईएन ने छोड़ दी जांच : आयुक्त
ई-टेंडरिंग मामले की जांच पंचायती राज विभाग के एक्सईएन को दी गई थी, लेकिन उन्होंने खुद को जांच से अलग कर लिया। अब नए सिरे से रिपोर्ट तैयार की डीसी कार्यालय भेजी जा रही है। सड़क सैंपल फेल मामले में रिकार्ड एकत्रित किया जा रहा है। वहीं, रेड लाइट खरीद मामले में एमई विवेक गिल, जेई व पुलिस अधिकारियों की कमेटी बनाकर जांच करवाई जाएगी।
अश्वनी मैंगी, आयुक्त नगर निगम