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कमेटी के साथ सदस्यों के नहीं हैं हस्ताक्षर, ऐसे में प्रश्नचिह्न उठना लाजिमी -रामबिलास शर्मा

Wed, 25 May 2016 12:12 AM IST
सोनीपत ब्यूरो/ अमर उजाला
सोनीपत ब्यूरो/ अमर उजाला Updated Wed, 25 May 2016 12:12 AM IST
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ram bilas sharma sonipat, prakash singh commitee
रामबिलास शर्मा - फोटो : file photo

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जाट आरक्षण के दौरान हुए दंगों पर सरकार को सौंपी गई प्रकाश आयोग की रिपोर्ट पर प्रदेश सरकार के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने ही सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार को जिंदल ग्लोबल विवि पहुंचे शर्मा ने कहा कि रिपोर्ट पर जांच कमेटी में शामिल सदस्य विजय वर्द्धन और केपी सिंह के हस्ताक्षर नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए शर्मा ने कहा कि प्रकाश सिंह वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं, उन पर कोई दबाव हो ही नहीं सकता। शर्मा ने पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ दर्ज केस के संदर्भ में कहा कि राजनीतिक व्यक्ति के लिए जेल और रेल की यात्रा करना जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास लगाने के लिए किसी तरह का आरोप नहीं बचा है। जबकि उनकी सरकार पिछली सरकार द्वारा लगाई गई एक ईंट भी उखाड़ते हैं तो बड़ा घोटाला उजागर होता है।
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हुड्डा के कार्यकाल में शिक्षा का बंटाधार हुआ
शिक्षा के स्तर के सवाल पर शर्मा ने कहा कि पिछली बार 12वीं का 53 प्रतिशत और 10वीं का 30 प्रतिशत रिजल्ट था। हमारे आने के बाद यह रिजल्ट क्रमश: 64 और 42 प्रतिशत पर पहुंचा है। ग्रेस मार्क्स खत्म करने के बाद भी रिजल्ट में सुधार है और हम और कोशिश कर रहे हैं। 95 प्रतिशत या इससे ज्यादा अंक लेने वाले मेधावी छात्रों को सरकार की ओर से सम्मानित किया जाएगा। शर्मा ने पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में शिक्षा का बंटाधार हुआ है। हम परफोरमेंस को लेकर काम कर रही हैं। इस दौरान उनके साथ उच्चतर शिक्षा विभाग के निदेशक विकास यादव, उच्चतर शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजय वर्धन, उपायुक्त के मकरंद पांडुरंग, रजिस्ट्रार प्रो. वाईएसआर मूर्ति भी मौजूद रहे।
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सरकारी स्कूलों में शिक्षक नहीं करते खुद पर भरोसा
राजकीय स्कूलों की स्थिति पर चर्चा करते हुए शिक्षामंत्री ने कहा कि आज प्रदेश के शिक्षा विभाग में नौकरी करने वाले एक लाख शिक्षक और अन्य कर्मचारियों में से मात्र 10 प्रतिशत के बच्चे ही राजकीय स्कूलों में पढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि अभिभावकों में यह धारणा बनी हुई है कि प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे ही सफल होते हैं। उन्होंने कहा कि 60 से 70 हजार रुपये वेतन लेने वाले शिक्षक अपने बच्चे को पढ़ाने का ही खुद पर भरोसा नहीं है तो दूसरे लोग उन पर कैसे विश्वास करेंगे। शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश के कुछ राजकीय स्कूल ऐसे भी है जो संघर्ष कर रहे हैं। इसके लिए पंचकुला के सार्थक राजकीय स्कूल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यहां दाखिले के लिए आज भी लंबी लाइन है।


प्रदेश के हर जिले में एक मॉडल राजकीय स्कूल विकसित किया गया है। इसके अलावा भी हम निजी संस्थाओं के साथ मिलकर राजकीय स्कूलों के स्तर में सुधार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फिक्की ने गुड़गांव में 40 स्कूलों को बदलने के लिए संस्था बनाई है और विद्या भारती ने 100 स्कूलों को विकसित करने के लिए आगे आने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि हाल ही में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सर्वे में हरियाणा स्कूली शिक्षा में टॉप तीन में हिस्सेदारी रखता है।
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