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जिले में 1100 फैक्टरियों में उत्पादन ठप, 140 करोड़ से ज्यादा का नुकसान

Sat, 02 Nov 2019 12:39 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 02 Nov 2019 12:39 AM IST
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production stopped at 1100 factory in sonipat due to pollution
औद्योगिक क्षेत्र में फैक्टरी से निकलता धुआं (फाइल फोटो) - फोटो : Sonipat
अंकित चौहान
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सोनीपत। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देश पर प्रशासन ने ऐसी फैक्टरियों के बॉयलर बंद करने के आदेश जारी किए हुए हैं, जिनसे प्रदूषण फैलता है। इसका जिले की फैक्टरियों पर बड़ा असर पड़ा है और यहां लगभग 1100 फैक्टरियों में उत्पादन पूरी तरह से ठप हो गया है। क्योंकि बड़ी औद्योगिक क्षेत्र में अधिकतर फैक्टरियों में कपड़ों पर डाई की जाती है तो कुंडली में बर्तन व कपड़ा बनाने की फैक्टरी चलती हैं। राई औद्योगिक क्षेत्र में जरूर गत्ते की पैकेजिंग का काम है, इसलिए वहां ज्यादा असर नहीं दिख रहा है। कुंडली में एक बड़ी परेशानी उद्योगपतियों के सामने यह भी आ रही है कि वहां दिन में लगातार कई घंटे बिजली गायब रहती है और जनरेटर को चलाने पर रोक है। इसलिए वहां की फैक्टरियों में अन्य काम भी बंद हो गया है। वहीं फैक्टरी बंद होने से एक दिन में लगभग 20 करोड़ रुपये का नुकसान उद्योगपतियों को हो रहा है और इस तरह अभी तक 140 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। यह नुकसान पांच नवंबर तक 200 करोड़ से ऊपर पहुंच जाएगा।
दिल्ली समेत एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने के कारण हर किसी को परेशानी झेलनी पड़ रही है, जिसको देखते हुए 5 नवंबर तक उन सभी फैक्टरियों को बंद कराने का आदेश है। जिनमें बॉयलर चलता है और उनसे प्रदूषण होता है। यहां बड़ी औद्योगिक क्षेत्र में लगभगत 500 फैक्टरी हैं, जिनमें लगभग 300 ऐसी फैक्टरियां हैं उनमें कपड़ों पर डाई होती है। इसके लिए फैक्टरियों में बॉयलर लगे हुए हैं। वहीं कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में लगभग 1700 फैक्टरियां हैं और उनमें से लगभग 800 फैक्टरी बर्तन व कपड़ा बनाने की हैं। उनमें भी बॉयलर से काम होता है और उनसे भी प्रदूषण निकलता है। इस तरह दोनों औद्योगिक क्षेत्र की इन लगभग 1100 फैक्टरियों के बॉयलर बंद करा दिए गए हैं, जिससे वहां उत्पादन पूरी तरह से बंद हो गया है। फैक्टरी में अन्य काम भी बिजली के कारण रुक गया है, क्योंकि बिजली निगम की ओर से पिछले कई दिनों से लाइन पर काम किया जा रहा है और उस दौरान बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाती है। वहीं फैक्टरी में जनरेटर चलाने पर पूरी तरह से रोक है और ऐसे में बिजली नहीं होने से फैक्ट्री के अंदर अन्य काम भी रुक जाते हैं। इस तरह जहां प्रशासन के आदेश से 1100 फैक्टरी में उत्पादन बंद हो गया है, वहीं बिजली निगम के कारण भी अधिकतर फैक्टरी में काम प्रभावित हो रहा है। इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार एक अनुमान के आधार पर रोजाना लगभग 20 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
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जिले के 50 से ज्यादा ईंट भट्ठे भी बंद
जिले में इस समय लगभग 50 से ज्यादा ईंट भट्ठे चल रहे हैं, जिनको पूरी तरह से फिलहाल बंद करा दिया गया है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम ने सभी ईंट भट्ठों को बंद करा दिया है। जिले में अधिकतर ईंट भट्ठों को जिग जैग कर दिया गया है। लेकिन इसके बावजूद 50 से ज्यादा ईंट भट्ठों में कोयले से ईंट तैयार की जा रही है। जिनको बंद करा दिया गया है।
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पराली जलाने वालों पर नजर
गांवों में पराली नहीं जलाई जाए, उसके लिए लोगों से अपील की जा रही है। इसके साथ ही लोगों से कहा जा रहा है कि वह पराली जलाने की जगह चारे के लिए गोशालाओं में दान करें। वहीं सरपंचों को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह खेतों में पराली जलाने वालों पर नजर रखें और इस बारे में प्रशासन को सूचित करें। प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारी भी औद्योगिक क्षेत्र व ईंट भट्ठों पर नजर रख रहे हैं।
कुंडली में बिजली कट, जनरेटर नहीं चल रहे
प्रदूषण को देखते हुए जनरेटर चलाने पर 11 अक्तूबर से रोक लगी हुई है। इस कारण भी कुंडली के फैक्टरी मालिकों को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। क्योंकि कुंडली में बिजली के सबसे ज्यादा कट लग रहे हैं और वहां इस दौरान फैक्टरियां ठप हो जाती हैं। फैक्टरी मालिक जनरेटर नहीं चल पाने के कारण भी काफी परेशान हैं।
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उन सभी फैक्टरियों को बंद करने के आदेश जारी किए गए हैं, जिनमें बॉयलर चलता है और उनसे प्रदूषण होता है। इसके लिए लगातार निगरानी की जा रही है। दवाई, दूध, ब्रैड आदि फैक्टरी को इसमें छूट दी गई है। यह आदेश 5 नवंबर तक जारी रहेगा।

-भूपेंद्र सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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प्रशासन के इस आदेश से कुंडली की अधिकतर फैक्टरी बंद हो गई हैं, जबकि अन्य फैक्टरी बिजली निगम के अधिकारियों ने बंद करा दीं। इस समय फैक्टरी में जनरेटर नहीं चलाने के आदेश हैं और उसके बावजूद बिजली लाइन पर काम करके कट लगाए जा रहे हैं। इससे जिन फैक्ट्रियों में बॉयलर नहीं हैं, वह भी बंद हो जाती हैं। इस तरह उद्योगपतियों को बड़ा नुकसान किया जा रहा है और इसके लिए बिजली निगम के अधिकारी सबसे बड़े जिम्मेदार हैं।
-सुभाष गुप्ता, अध्यक्ष कुंडली इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन

सोनीपत में आसमान में छाया स्मॉग

सोनीपत में आसमान में छाया स्मॉग- फोटो : Sonipat

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