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Sonipat News: प्रदूषण दमा और अस्थमा मरीजों का घोट रहा दम

Mon, 20 Nov 2023 12:55 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Mon, 20 Nov 2023 12:55 AM IST
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Pollution is suffocating asthma patients
सोनीपत। प्रदूषण का बढ़ा स्तर दमा और अस्थमा के मरीजों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना ओपीडी में दमा और अस्थमा के 100 से अधिक मरीज उपचार कराने के लिए पहुंच रहे हैं। ज्यादा गंभीर स्थिति वाले मरीजों को मेडिकल वार्ड में भर्ती किया जा रहा है। मेडिकल वार्ड में मरीजों के ऑक्सीजन तक की व्यवस्था करनी पड़ रही है। अगर उन्हें सांस लेने में किसी तरह की परेशानी होती है तो तुरंत ऑक्सीजन सिलिंडर लगा दिया जाता है। चिकित्सकों की ओर से उन्हें प्रदूषण से बचाव के लिए सलाह दी जा रही है।
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दिवाली पर्व के बाद प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे लोगों की सेहत खराब होने लगी है। खास तौर पर प्रदूषण की वजह से दमा, अस्थमा, सांस, खांसी, जुकाम और हृदय रोगियों की संख्या दोगुनी हो गई है। वाहनों से निकलने वाला धुआं और पराली व कूड़े की आग से निकलने वाला धुआं प्रदूषण का स्तर बढ़ा रहा है। शहर में शनिवार को औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 368 रहा था जो रविवार को बढ़कर 397 तक पहुुंच गया। शनिवार रात एक्यूआई बढ़कर 405 तक पहुंच गया था। रविवार दोपहर बाद तीन बजे तक एक्यूआई 407 पर था। लगातार बढ़ रहा एक्यूआई लोगों को बीमार कर रहा है। इससे कई मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ रहा है।
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जिला नागरिक अस्पताल के फिजीशियन डाॅ. शैलेंद्र राणा का कहना है कि सांस, दमा, अस्थमा, हृदय रोगियों की संख्या लगातार बढ़ी है। पहले अस्पताल में ओपीडी 1200 रहती थी, अब रोजाना 1800 से ज्यादा मरीज उपचार कराने के लिए पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल में फिजिशियन के पास दमा, सांस, अस्थमा और हृदय रोगी अधिक आ रहे हैं। वर्तमान में 15 मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा है। कई मरीजों की तो दवाइयां बढ़ानी पड़ रही हैं, ताकि संक्रमण से बचाया जा सके। हृदय रोग से पीड़ित मरीजों की संख्या अच्छी खासी हो गई है।
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दमा के लक्षण

दमा के मरीजों में हमेशा खांसी की शिकायत रहती है।

सफेद गाढ़ा बलगम आता है।
सांस लेने पर घर्र-घर्र की आवाज आती है।
सीने में हमेशा जकड़न सी महसूस होती है।
रात में, बात करते या व्यायाम के दौरान खांसी का आना आम होता है।
अस्थमा के मरीजों के लक्षण
सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।
सांस लेते समय सीटी की तरह आवाज आने लगती है।
सांस जल्दी फूलने लगे तो भी अस्थमा हो सकता है।
जरा सा काम करने पर थकान होना भी अस्थमा का लक्षण हो सकता है।
एक या दो महीने तक हर रोज खांसी आने लगती है।
हमेशा सर्दी और जुकाम रहने पर भी अस्थमा की दिक्कत हो सकती है।

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ऐसे करें बीमारियों से बचाव

-प्रदूषण बढ़ने पर घरों से कम निकलें।
-सुबह और शाम टहलने से बचें।
-बच्चों को घर के बाहर खेलने के लिए न जाने दें।
-घरों की खिड़कियां और दरवाजे खुला न छोड़ें।
-घर से निकलना पड़े तो ट्रिपल लेयर मास्क लगाकर निकलें।
-आंखों को सादा पानी से धोते रहें।
-परेशानी बढ़ने पर फौरन चिकित्सकों से सलाह लें।
-बिना चिकित्सक की सलाह के दवा मत लें।

वर्जन
प्रदूषण का स्तर बढ़ने के कारण दमा, सांस व अस्थमा के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। ज्यादा गंभीर स्थिति वाले मरीजों को बेहतर उपचार के लिए 10 दिन के लिए भर्ती किया जा रहा है। अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था है। साथ ही फिजिशियन को मरीजों के बेहतर उपचार के लिए निर्देश दिए गए हैं। -डॉ. लोकवीर सिंह, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, नागरिक अस्पताल।
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