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सिपाही-एसपीओ हत्याकांड : आरोपी बोले पता होता सिपाही ने हाथ पर लिखा है कार का नंबर तो उसे भी मिटाकर ही जाते

Sun, 12 Jul 2020 11:33 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jul 2020 11:33 PM IST
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police man murder case, accused on remand, car number, sonipat
गोहाना। बुटाना चौकी के पास सिपाही रविंद्र और एसपीओ कप्तान सिंह की हत्या में गिरफ्तार आरोपियों को अंदेशा तक नहीं था कि वह पकड़े जाएंगे। आरोपियों ने सीआईए की पूछताछ में कहा है कि अगर उनको पता होता कि सिपाही ने उनकी कार का नंबर हाथ पर लिख लिया है तो उसे मिटाकर ही जाते।
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आरोपियों ने बताया कि वह अपनी समझ में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं छोड़कर गए थे तो उनके लिए खतरा बन सकता था। वारदात के बाद उन्होंने देखा था कि कोई सामान तो नहीं रह गया है। उसके बाद कार की नंबर प्लेट हटाकर वहां से भागे थे। पुलिस आरोपी विकास और नीरज के मोबाइल नंबर की आईडी के बारे भी पता लगा रही है। उनके फर्जी आईडी पर जारी होने का अंदेशा है।
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बुटाना चौकी के दो पुलिसकर्मियों की हत्या 29 जून की रात को चाकू से गोदकर कर दी गई थी। पुलिस वारदात के कुछ घंटों ही हत्यारोपियों तक पहुंच गई थी। सीआईए-2 की टीम की उनसे जींद में मुठभेड़ की थी। मुठभेड़ में मुख्य आरोपी अमित मारा गया था और संदीप पकड़ा गया था। जबकि पुलिस टीम को घायल कर विकास फरार हो गया था। पुलिस ने मामले में आरोपी विकास व उसके साथी नीरज को एक सप्ताह के बाद पकड़ा। उससे घटना से लेकर फरार होने और पकड़े जाने तक की हर स्थिति पर पुलिस ने पूछताछ की। विकास ने पुलिस को बताया कि उनको कोई शक नहीं था कि पुलिस हम तक पहुंच सकती है। इसके लिए ही वारदात के बाद घटना स्थल पर अच्छी तरह चेक किया गया था कि कोई सामान तो नहीं गिर गया है, जिससे पुलिस तलाश कर सके। उसके बाद ही मौके से भागे थे। विकास ने बताया कि उन्हें अंदेशा नहीं हो सका था कि सिपाही ने अपने हाथ पर गाड़ी का नंबर लिख लिया है। इसकी आशंका होती तो सिपाही के हाथ से नंबर को मिटाकर ही जाते।
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वर्जन
सिपाही व एसपीओ की हत्या करने वाले सभी आरोपी शातिर हैं। हत्या करने के बावजूद वह किसी हड़बड़ी में नहीं भागे थे। उन्होंने पूरी जांच की थी कि कोई साक्ष्य पुलिस के हाथ न लगे। अगर उन्हें पता होता कि सिपाही के हाथ पर कार का नंबर है तो वह उसे भी मिटाकर ही जाते। पुलिस आरोपियों को जेल भेज चुकी है। मामले से जुड़े सभी साक्ष्य खंगाले जा रहे हैं।
- बिजेंद्र सिंह, जांच अधिकारी, सीआईए-2
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