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निजी खर्च पर संवार रहे गुमड़ गांव के राजकीय स्कूल की तस्वीर

Mon, 05 Sep 2022 12:18 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 05 Sep 2022 12:18 AM IST
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Picture of the government school of Gumad village being maintained at private expense
गांव गुमड़ निवासी राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य रमेश कुमार। संवाद - फोटो : Sonipat
गांव गुमड़ स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की तस्वीर अब बदल रही है। इस स्कूल को सजाने व संवारने के लिए भले ही सरकार की तरफ से बजट पास न किया गया हो, लेकिन स्कूल के प्राचार्य रमेश कुमार के दृढ़ निश्चय व शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए किए गए प्रयास आज सार्थक हो रहे हैं। प्राचार्य ने साथी अध्यापकों के सहयोग से धनराशि एकत्रित कर स्कूल के सुंदरीकरण पर खर्च की है। प्राचार्य के प्रयासों के परिणाम स्वरूप अब यह स्कूल जिले में सुर्खियों में बना हुआ है।
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रमेश कुमार 2 जनवरी 2017 को गुमड़ गांव के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य का पदभार ग्रहण किया था। प्राचार्य ने बताया कि उस समय स्कूल की स्थिति बहुत खराब थी। चहारदीवारी क्षतिग्रस्त थी, जिससे स्कूल में जानवर घुस जाते थे। यही नहीं स्कूल में विद्यार्थी संख्या भी बहुत कम थी। उन्होंने स्कूल में व्यवस्था बनाते हुए विद्यार्थी संख्या बढ़ाई। इसके लिए स्कूल में मिलने वाली सुविधाओं से बच्चों व अभिभावकों को अवगत कराया। गन्नौर शहर में रहने वाले बच्चों व अभिभावकों से मिले। उनके प्रयासों के बाद स्कूल में करीब 80 बच्चे शहर से पढ़ने आ रहे हैं।
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रमेश कुमार ने बताया कि बच्चों को शहर से गांव के स्कूल में आने-जाने के लिए एक निजी वाहन की व्यवस्था की है। इसका खर्च प्राचार्य व शिक्षक अपनी तनख्वाह से वहन करते हैं। प्राचार्य ने बताया कि वह 23 साल घसौली गांव के स्कूल में कार्यरत थे। जिसके बाद 9 महीने खुबडू स्कूल में कार्यरत रहे। फिर 2 जनवरी 2017 को गुमड़ गांव के स्कूल में प्राचार्य का पद ग्रहण किया। यहां स्कूल को संवारने के साथ ही विद्यार्थी संख्या बढ़ाना उनकी पहली प्राथमिकता रही। शहर से आने वाले बच्चों ने साधन न होने की बात कही तो इस बाधा को ऑटो लगाकर दूर किया। बच्चों को लाने-ले जाने के लिए लगाए ऑटो का किराया अपनी जेब व शिक्षकों के सहयोग से एकत्रित राशि से देते हैं। इस प्रयोग से स्कूल में विद्यार्थी संख्या बढ़ी है।
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विद्यार्थियों की जागरूकता के लिए लिखी पुस्तक उड़ान
रमेश कुमार ने बताया कि उन्हें पढ़ाने के साथ लिखने का भी शौक है। साल 2017 में ‘उड़ान’ नाम की पुस्तक लिखी थी। जिसके लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया है। इस पुस्तक में उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया है कि वह किस तरह मेहनत के दम पर आप अपने मुकाम तक पहुंच सकते हैं।
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