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अंतरराज्यीय रूटों पर चलने वाली बसों के परिचालकों को मिलेगा ओवरटाइम

Sat, 11 Jun 2022 11:51 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 11 Jun 2022 11:51 PM IST
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Operators of buses running on interstate routes will get overtime
रोडवेज डिपो में खड़ी बसें। - फोटो : Sonipat
43 माह बाद रोडवेज ने एक बार फिर परिचालकों को ओवरटाइम देने का निर्णय लिया है। जिससे परिचालकों में खुशी की लहर है। परिचालकों के लिए ओवरटाइम शुरू करने से विभिन्न रूटों पर बसों के फेरे बढ़ाए जा सकेंगे। इससे बसों की कमी झेल रहे यात्रियों को भी राहत मिल सकेगी। सोनीपत डिपो में परिचालकों के लिए 10 जून से ओवरटाइम मिलना शुरू हो गया है। हालांकि शुरुआत में इसका लाभ केवल अंतर राज्यीय रूटों पर चलने वाले परिचालकों को ही मिलेगा। चालकों को भी इसका लाभ मिलेगा या नहीं, इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
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रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि सरकार के ओवरटाइम खत्म करने के बाद बसों के फेरे कम करने पड़े थे। डिपो में परिचालकों की कमी बनी है। चालक-परिचालक 8 घंटे की ड्यूटी देने के बाद बस को डिपो में खड़ी कर चले जाते हैं। परिचालक न होने के कारण चालक भी बस लेकर नहीं जा सकते। जिससे न सिर्फ रोडवेज को घाटा हो रहा है, बल्कि विभिन्न रूटों पर बसों के फेरे कम करने से यात्रियों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। इस स्थिति को देखते हुए परिचालकों के लिए एक बार फिर ओवरटाइम खोलने का निर्णय लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआत में अंतर राज्यीय रूट अजमेर, जम्मू, कटरा, लुधियाना, जयपुर, शिमला, सुजानपुर, हरिद्वार व आगरा जाने वाले परिचालकों के लिए ही ओवरटाइम खोला गया है।
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चालक सरप्लस, परिचालकों को दिया ओवरटाइम
सोनीपत डिपो की बात करें तो यहां चालक 325 हैं और परिचालकों की संख्या 275 हैं। इनमें से भी 42 परिचालकों की ड्यूटी किलोमीटर स्कीम के तहत चलने वाली बसों पर लगाई जा रही है। ऐसे में डिपो में जहां चालक सरप्लस हैं तो वहीं परिचालकों की लंबे समय से कमी बनी हुई है। अब परिचालकों को ओवरटाइम देकर बसों को डिपो में खड़ी करने की बजाए विभिन्न रूटों पर चलाया जाएगा। इस योजना से जहां रोडवेज की आमदनी बढ़ेगी वहीं विभिन्न रूटों पर बनी बसों की कमी को भी दूर किया जा सकेगा।
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20 नवंबर 2018 को बंद कर दिया था ओवरटाइम
रोडवेज में शुरू से ही चालक-परिचालकों को ओवरटाइम दिया जा रहा था। इसके कारण रोडवेज की बसें भी सही तरीके से चलती थी, वहीं चालक-परिचालक भी ड्यूटी के प्रति गंभीर रहते थे। प्रदेश सरकार ने 20 नवंबर 2018 को रोडवेज में ओवरटाइम खत्म कर दिया था और चालक-परिचालकों से प्रतिदिन 8 घंटे काम या पूरे सप्ताह में 48 घंटे ड्यूटी लेने के आदेश जारी किए थे। उसके बाद कर्मचारियों को आराम देने की बात कही थी। रोडवेज में ओवरटाइम खत्म होने का मुख्य असर ये हुआ था कि रोडवेज की आमदनी घट गई थी। इसके अलावा लंबे रूट भी प्रभावित हो गए थे। यही नहीं विभिन्न रूटों पर बसों के फेरे कम होने से यात्रियों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही थी।

बस डिपो में यह है स्थिति
सोनीपत बस अड्डे पर स्वीकृत बसें ऱ् 197
सोनीपत डिपो में रोडवेज बसें ऱ् 71
किलोमीटर स्कीम के तहत बसें ऱ् 42
रोडवेज डिपो में चालक ऱ् 325
रोडवेज डिपो में परिचालक ऱ् 275
गोहाना सब डिपो में रोडवेज बसें ऱ् 41
किलोमीटर स्कीम के तहत बसें ऱ् 21
विभिन्न रूटों पर बनी बसों की कमी और यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के उद्देश्य से परिचालकों के लिए ओवरटाइम खोला गया है। डिपो में चालक सरप्लस हैं, लेकिन परिचालकों की कमी बनी हुई है। जिस कारण ओवरटाइम अभी परिचालकों के लिए ही खोला गया है। शुरुआत में ओवरटाइम का लाभ केवल अंतरराज्यीय रूटों पर चलने वाले परिचालकों को ही मिलेगा।
राहुल जैन, महाप्रबंधक, रोडवेज डिपो, सोनीपत
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