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Sonipat News: नीरू झाझरिया ने बनाया अधिक ऊर्जा भंडारण का इलेक्ट्रोड मेटेरियल
Fri, 09 Feb 2024 10:34 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 09 Feb 2024 10:34 PM IST
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सोनीपत में डीसीआरयूएसटी की शोधार्थी नीरू झाझरिया कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह व अन्य के साथ प्र
सोनीपत। दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी) मुरथल की रसायन विभाग की शोधार्थी नीरू झाझरिया व टीम ने अधिक ऊर्जा भंडारण के लिए इलेक्ट्रोड मेटेरियल बनाया है। नीरू का शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय जर्नल में 9.4 इंपेक्ट फैक्टर के साथ प्रकाशित हुआ है।
नीरू रसायन विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. सुमनलता के निर्देशन में पीएचडी कर रही हैं। उन्होंने सुपर कैपेसिटर तैयार किया है, जिसमें तीन चीजों का कंपोजिट बनाकर प्रयोग किया है। उपकरण में ऊर्जा भंडारण की क्षमता बहुत ज्यादा है। इसकी पावर डायनेस्टी ज्यादा अच्छी होती है। अगर हमें एक साथ में ऊर्जा की ज्यादा आवश्यकता होती है तो यह एक साथ हमें आपूर्ति प्रदान करेगा।
विभागाध्यक्ष प्रो. सुमनलता ने कहा कि उपकरण का जीवन काल भी लंबा है। इस उपकरण पर 10 हजार लाइफ साइकिल लगाने पर भी इसकी ऊर्जा को स्टोर करने की क्षमता 1.44 फीसदी कम हुई है। इस डिवाइस का प्रयोग इलेक्ट्रिकल वाहन में ब्रेक लगाने में भी किया जा सकता है। इस उपकरण की एनर्जी डेनेस्टी 93.33 वाट प्रति घंटा प्रति किलोग्राम है। इसका प्रयोग अल्पकालिक ऊर्जा भंडारण या विस्फोट के लिए भी किया जा सकता है।
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शोध से ही शिक्षण संस्थान को मिलती है ख्याति
कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि वर्तमान में अपना देश समृद्ध देशों की श्रेणी में शामिल हैं, जिनमें शोध व तकनीक पर विशेष ध्यान दिया गया है। हम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होकर अपने देश को समृद्ध बना सकते हैं। कहा कि शोध किसी भी विश्वविद्यालय के लिए रीढ़ की हड्डी की तरह होता है। शोध से ही शिक्षण संस्थान को ख्याति मिलती है।
वर्जन
विश्वविद्यालय का मुख्य फोकस शोध की गुणवत्ता पर है। प्रयोगशालाओं के नवीनीकरण व आधुनिकीकरण को प्राथमिकता दी जा रही है। शोधार्थियों को विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं में दिन रात शोध कार्य करना चाहिए। जब लक्ष्य को निर्धारित करके अनुशासन में रहकर निरंतर शोध किया जाएगा तो सफलता निश्चित तौर पर मिलेगी। प्रो. श्रीप्रकाश सिंह, कुलपति, डीसीआरयूएसटी, मुरथल।
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नीरू रसायन विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. सुमनलता के निर्देशन में पीएचडी कर रही हैं। उन्होंने सुपर कैपेसिटर तैयार किया है, जिसमें तीन चीजों का कंपोजिट बनाकर प्रयोग किया है। उपकरण में ऊर्जा भंडारण की क्षमता बहुत ज्यादा है। इसकी पावर डायनेस्टी ज्यादा अच्छी होती है। अगर हमें एक साथ में ऊर्जा की ज्यादा आवश्यकता होती है तो यह एक साथ हमें आपूर्ति प्रदान करेगा।
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विभागाध्यक्ष प्रो. सुमनलता ने कहा कि उपकरण का जीवन काल भी लंबा है। इस उपकरण पर 10 हजार लाइफ साइकिल लगाने पर भी इसकी ऊर्जा को स्टोर करने की क्षमता 1.44 फीसदी कम हुई है। इस डिवाइस का प्रयोग इलेक्ट्रिकल वाहन में ब्रेक लगाने में भी किया जा सकता है। इस उपकरण की एनर्जी डेनेस्टी 93.33 वाट प्रति घंटा प्रति किलोग्राम है। इसका प्रयोग अल्पकालिक ऊर्जा भंडारण या विस्फोट के लिए भी किया जा सकता है।
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शोध से ही शिक्षण संस्थान को मिलती है ख्याति
कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि वर्तमान में अपना देश समृद्ध देशों की श्रेणी में शामिल हैं, जिनमें शोध व तकनीक पर विशेष ध्यान दिया गया है। हम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होकर अपने देश को समृद्ध बना सकते हैं। कहा कि शोध किसी भी विश्वविद्यालय के लिए रीढ़ की हड्डी की तरह होता है। शोध से ही शिक्षण संस्थान को ख्याति मिलती है।
वर्जन
विश्वविद्यालय का मुख्य फोकस शोध की गुणवत्ता पर है। प्रयोगशालाओं के नवीनीकरण व आधुनिकीकरण को प्राथमिकता दी जा रही है। शोधार्थियों को विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं में दिन रात शोध कार्य करना चाहिए। जब लक्ष्य को निर्धारित करके अनुशासन में रहकर निरंतर शोध किया जाएगा तो सफलता निश्चित तौर पर मिलेगी। प्रो. श्रीप्रकाश सिंह, कुलपति, डीसीआरयूएसटी, मुरथल।