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Sonipat News: बाबा खेतानाथ राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में प्रकृति परीक्षण अभियान शुरू
Fri, 29 Nov 2024 11:03 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 29 Nov 2024 11:03 PM IST
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फोटो नंबर-22डिजिटल परीक्षण एप के माध्यम से प्रकृति परीक्षण विधि के बारे में बताती निदेशक डॉ स
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नारनौल। बाबा खेतानाथ राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज और अस्पताल पटीकरा में शुक्रवार को प्रकृति परीक्षण अभियान की शुरुआत की गई। हरियाणा आयुष विभाग की निदेशक डॉ. संगीता नेहरा ने डिजिटल परीक्षण एप के माध्यम से संस्थान में आए रोगी का प्रकृति परीक्षण किया।
प्रकृति परीक्षण करने की विधि को सभी प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्रों को सिखाया। सभी छात्रों ने डिजिटल एप पर अपने आप को इस कार्य के लिए स्वयं को पंजीकृत किया। इसके पश्चात कॉलेज के प्राचार्य डॉ. श्रीनिवास गुज्जरवार ने एनसीआईएसएम के मानकों के विषय में जानकारी देते हुए संस्थान के सभी शिक्षकों व चिकित्सकों से आह्वान किया कि हम सभी को स्वयंसेवक के रूप में जिले के लगभग 25000 लोगों का प्रकृति परीक्षण एक माह में पूर्ण करना है।
प्राचार्य एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. श्रीनिवास गुज्जरवार ने बताया कि छात्रों ने क्लिनिकल अध्ययन के रूप में च्यवनप्राश बनाया। आचार्य भृगु पुत्र च्यवन ऋषि द्वारा निर्मित दिव्य औषधि च्यवनप्राश का निर्माण इस संस्थान के शिक्षकों डॉ. रचना मदान, डॉ. मुनेश यादव, डॉ. कुलभूषण शर्मा के निर्देशन में छात्रों के द्वारा महर्षि च्यवन की तपोभूमि में किया गया।च्यवनप्राश एक उत्तम रसायन औषधी है, जो शरीर के सूक्ष्मतम कोशिकाओं को पुनर्जीवन देने का कार्य करती है। च्यवनप्राश का मुख्य घटक आंवला स्वास्थ्य संरक्षण के साथ साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हुए शरीर का कायाकल्प करती है।
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उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पंकज कौशिक ने बताया कि इस अभियान का पहला चरण की शुरूआत राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू का प्रकृति परीक्षण करके की गई। यह अभियान का पहला चरण पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती 25 दिसंबर तक चलेगा। इसके लिए दिल्ली से ट्रेनिंग प्राप्त करके आए डॉ. रितेश को नोडल अधिकारी बनाया गया है। अब स्वस्थवृत व रस शास्त्र विभाग के शिक्षक व चिकित्सक छात्रों के सहयोग से जिला महेंद्रगढ़ व आस-पास के क्षेत्र के लोगों का प्रकृति परीक्षण करेंगे।
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प्रकृति परीक्षण करने की विधि को सभी प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्रों को सिखाया। सभी छात्रों ने डिजिटल एप पर अपने आप को इस कार्य के लिए स्वयं को पंजीकृत किया। इसके पश्चात कॉलेज के प्राचार्य डॉ. श्रीनिवास गुज्जरवार ने एनसीआईएसएम के मानकों के विषय में जानकारी देते हुए संस्थान के सभी शिक्षकों व चिकित्सकों से आह्वान किया कि हम सभी को स्वयंसेवक के रूप में जिले के लगभग 25000 लोगों का प्रकृति परीक्षण एक माह में पूर्ण करना है।
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प्राचार्य एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. श्रीनिवास गुज्जरवार ने बताया कि छात्रों ने क्लिनिकल अध्ययन के रूप में च्यवनप्राश बनाया। आचार्य भृगु पुत्र च्यवन ऋषि द्वारा निर्मित दिव्य औषधि च्यवनप्राश का निर्माण इस संस्थान के शिक्षकों डॉ. रचना मदान, डॉ. मुनेश यादव, डॉ. कुलभूषण शर्मा के निर्देशन में छात्रों के द्वारा महर्षि च्यवन की तपोभूमि में किया गया।च्यवनप्राश एक उत्तम रसायन औषधी है, जो शरीर के सूक्ष्मतम कोशिकाओं को पुनर्जीवन देने का कार्य करती है। च्यवनप्राश का मुख्य घटक आंवला स्वास्थ्य संरक्षण के साथ साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हुए शरीर का कायाकल्प करती है।
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उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पंकज कौशिक ने बताया कि इस अभियान का पहला चरण की शुरूआत राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू का प्रकृति परीक्षण करके की गई। यह अभियान का पहला चरण पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती 25 दिसंबर तक चलेगा। इसके लिए दिल्ली से ट्रेनिंग प्राप्त करके आए डॉ. रितेश को नोडल अधिकारी बनाया गया है। अब स्वस्थवृत व रस शास्त्र विभाग के शिक्षक व चिकित्सक छात्रों के सहयोग से जिला महेंद्रगढ़ व आस-पास के क्षेत्र के लोगों का प्रकृति परीक्षण करेंगे।