केंद्र सरकार की ओर से रबी फसलों पर एमएसपी में बढ़ोतरी करने की घोषणा को संयुक्त किसान मोर्चा ने ढकोसला करार दिया है। मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि कानूनी गारंटी के बिना सरकार द्वारा घोषित एमएसपी किसानों के लिए कागज पर ही रहेगी। कमजोर मंडी प्रणाली वाले राज्यों में काफी संख्या में किसानों को अपनी फसलें एमएसपी से नीचे बेचनी पड़ती हैं।
बुधवार देर शाम कुंडली बॉर्डर पर हुई पंजाब की 32 जत्थेबंदियों की बैठक में केंद्र सरकार द्वारा घोषित एमएसपी पर चर्चा की गई। किसान नेताओं का कहना था कि सरकार ने वास्तविक रूप से रबी फसलों के एमएसपी को कम कर दिया। खुदरा मुद्रास्फीति छह प्रतिशत है, जबकि गेहूं और चने के एमएसपी में सिर्फ 2 प्रतिशत और 2.5 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। एक तरफ किसान डीजल, पेट्रोल, कृषि आदानों और दैनिक आवश्यकताओं की बढ़ीं कीमतों का खामियाजा भुगत रहे हैं, दूसरी ओर उनकी आय कम होने के कारण वह गरीब होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कि देश में भारत बंद की तैयारियां जोरों पर हैं। किसान संगठनों द्वारा बैठकें और सभाएं की जा रही हैं। 10 सितंबर को शाहजहांपुर बॉर्डर पर किसान संगठनों की बैठक होगी, जिसमें 33 जिलों के लोग शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि देश की प्रमुख ट्रेड यूनियनों द्वारा समर्थन दिए जाने से इस बार का भारत बंद ऐतिहासिक होगा।