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Sonipat News: लड़सौली की लाडो ने एशिया में लहराया परचम, निशा मोर ने जीता कांस्य पदक
Tue, 30 Jun 2026 03:02 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 30 Jun 2026 03:02 AM IST
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फोटो :22: अंडर-15 एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में बेटी के कांस्य पदक जीतने पर सोनीपत के गांव लड़सौ
सोनीपत। गांव लड़सौली की लाडो पहलवान निशा मोर ने थाईलैंड के पटाया में आयोजित अंडर-15 एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर देश व प्रदेश को गौरवान्वित किया है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाली निशा की उपलब्धि से गांव में उत्साह और गर्व का माहौल है।
निशा के पिता व सामाजिक कार्यकर्ता प्रियव्रत बताते हैं कि निशा मोर ने महज छह-सात वर्ष की आयु में गांव लड़सौली स्थित गुरु हनुमान द्रोणाचार्य कुश्ती एवं कबड्डी अकादमी से अपने खेल जीवन की शुरुआत की थी। भारत केसरी पहलवान नवीन मोर के सान्निध्य में उन्होंने कुश्ती के गुर सीखे और कठिन परिश्रम तथा अनुशासन के बल पर लगातार आगे बढ़ती चली गईं।
कुश्ती से पहले निशा भारतीय कबड्डी टीम के पूर्व कप्तान चांदराम मोर की धर्मपत्नी मीना मोर की अकादमी में छोटे बच्चों के साथ जाया करती थीं। वहीं खेलों के प्रति उनका रुझान विकसित हुआ और बाद में उन्होंने कुश्ती को अपने करियर का आधार बनाया। परिवार और प्रशिक्षकों के प्रोत्साहन ने उनकी प्रतिभा को नई दिशा दी।
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कम उम्र में हासिल किए कई स्वर्णिम मुकाम
प्रशिक्षक कुलबीर राणा ने बताया कि निशा ने छोटी उम्र में ही राष्ट्रीय स्तर पर कई उपलब्धियां अपने नाम दर्ज कराई हैं। उन्होंने अंडर-14 स्कूली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसके बाद अंडर-15 तमिलनाडु ओपन स्कूली प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल किया। अंडर-15 स्कूली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर अपने शानदार प्रदर्शन की निरंतरता बनाए रखी। अब अंडर-15 एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फलक पर भी अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज करा दी है।
युद्धवीर अखाड़ा में निखर रही प्रतिभा
वर्तमान में निशा मोर युद्धवीर अखाड़ा में नियमित अभ्यास कर रही हैं। उनका सपना भविष्य में देश के लिए विश्व और ओलंपिक स्तर पर पदक जीतकर तिरंगे का मान बढ़ाना है। उनकी मेहनत, समर्पण और संघर्ष को देखते हुए खेल प्रेमियों को उनसे बड़ी उम्मीदें हैं। प्रशिक्षक सीमा व समीक्षा ने बताया कि कांस्य पदक जीतने से पहले निशा ने कोरिया, कजाकिस्तान व जापान की पहलवानों को 10-0 से हराया था। उज्बेकिस्तान की पहलवान के साथ हुए मुकाबले में निशा विजयी रही और कांस्य जीता।
सरपंच मां करेंगी चूरमा और मक्खन से बेटी का स्वागत
निशा की माता सुशीला देवी गांव लड़सौली की सरपंच हैं। बेटी की उपलब्धि से पूरा परिवार गौरवान्वित महसूस कर रहा है। सुशीला देवी ने बताया कि निशा को चूरमा और मक्खन बेहद पसंद है। उसके घर लौटने पर उसकी पसंदीदा पारंपरिक व्यंजनों से स्वागत किया जाएगा। परिवार में बहन तमन्ना और भाई प्रयांशु मोर भी निशा की इस सफलता पर बेहद खुश हैं। पिता प्रियव्रत बेटी के लिए रोजाना दूध व फल लेकर अखाड़े में जाते हैं।
ग्रामीण बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा
निशा मोर की सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि गांवों की बेटियां भी कठिन परिश्रम, दृढ़ संकल्प और उचित मार्गदर्शन के बल पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का गौरव बढ़ा सकती हैं। लड़सौली की यह बेटी अब बड़े सपनों और नई तैयारियों के साथ भविष्य में देश के लिए और बड़े पदक जीतने के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है।
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निशा के पिता व सामाजिक कार्यकर्ता प्रियव्रत बताते हैं कि निशा मोर ने महज छह-सात वर्ष की आयु में गांव लड़सौली स्थित गुरु हनुमान द्रोणाचार्य कुश्ती एवं कबड्डी अकादमी से अपने खेल जीवन की शुरुआत की थी। भारत केसरी पहलवान नवीन मोर के सान्निध्य में उन्होंने कुश्ती के गुर सीखे और कठिन परिश्रम तथा अनुशासन के बल पर लगातार आगे बढ़ती चली गईं।
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कुश्ती से पहले निशा भारतीय कबड्डी टीम के पूर्व कप्तान चांदराम मोर की धर्मपत्नी मीना मोर की अकादमी में छोटे बच्चों के साथ जाया करती थीं। वहीं खेलों के प्रति उनका रुझान विकसित हुआ और बाद में उन्होंने कुश्ती को अपने करियर का आधार बनाया। परिवार और प्रशिक्षकों के प्रोत्साहन ने उनकी प्रतिभा को नई दिशा दी।
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कम उम्र में हासिल किए कई स्वर्णिम मुकाम
प्रशिक्षक कुलबीर राणा ने बताया कि निशा ने छोटी उम्र में ही राष्ट्रीय स्तर पर कई उपलब्धियां अपने नाम दर्ज कराई हैं। उन्होंने अंडर-14 स्कूली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसके बाद अंडर-15 तमिलनाडु ओपन स्कूली प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल किया। अंडर-15 स्कूली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर अपने शानदार प्रदर्शन की निरंतरता बनाए रखी। अब अंडर-15 एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फलक पर भी अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज करा दी है।
युद्धवीर अखाड़ा में निखर रही प्रतिभा
वर्तमान में निशा मोर युद्धवीर अखाड़ा में नियमित अभ्यास कर रही हैं। उनका सपना भविष्य में देश के लिए विश्व और ओलंपिक स्तर पर पदक जीतकर तिरंगे का मान बढ़ाना है। उनकी मेहनत, समर्पण और संघर्ष को देखते हुए खेल प्रेमियों को उनसे बड़ी उम्मीदें हैं। प्रशिक्षक सीमा व समीक्षा ने बताया कि कांस्य पदक जीतने से पहले निशा ने कोरिया, कजाकिस्तान व जापान की पहलवानों को 10-0 से हराया था। उज्बेकिस्तान की पहलवान के साथ हुए मुकाबले में निशा विजयी रही और कांस्य जीता।
सरपंच मां करेंगी चूरमा और मक्खन से बेटी का स्वागत
निशा की माता सुशीला देवी गांव लड़सौली की सरपंच हैं। बेटी की उपलब्धि से पूरा परिवार गौरवान्वित महसूस कर रहा है। सुशीला देवी ने बताया कि निशा को चूरमा और मक्खन बेहद पसंद है। उसके घर लौटने पर उसकी पसंदीदा पारंपरिक व्यंजनों से स्वागत किया जाएगा। परिवार में बहन तमन्ना और भाई प्रयांशु मोर भी निशा की इस सफलता पर बेहद खुश हैं। पिता प्रियव्रत बेटी के लिए रोजाना दूध व फल लेकर अखाड़े में जाते हैं।
ग्रामीण बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा
निशा मोर की सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि गांवों की बेटियां भी कठिन परिश्रम, दृढ़ संकल्प और उचित मार्गदर्शन के बल पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का गौरव बढ़ा सकती हैं। लड़सौली की यह बेटी अब बड़े सपनों और नई तैयारियों के साथ भविष्य में देश के लिए और बड़े पदक जीतने के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है।

फोटो :22: अंडर-15 एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में बेटी के कांस्य पदक जीतने पर सोनीपत के गांव लड़सौ