{"_id":"5fcd6c6d8ebc3ecfdb093e9d","slug":"kisan-agitation-spread-over-10-states-in-10-days","type":"story","status":"publish","title_hn":"10 दिन में 10 से अधिक राज्यों में फैला किसान आंदोलन, लगातार बढ़ रहा है दायरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
10 दिन में 10 से अधिक राज्यों में फैला किसान आंदोलन, लगातार बढ़ रहा है दायरा
Mon, 07 Dec 2020 05:12 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अंकित चौहान, सोनीपत
अंकित चौहान, सोनीपत
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 07 Dec 2020 05:12 AM IST
सार
- 26 नवंबर को पंजाब के किसानों ने दिल्ली जाने के लिए किया था कूच, 28 नवंबर से बॉर्डर पर डेरा डाला
- पंजाब के बाद हरियाणा व यूपी में आंदोलन शुरू हुआ तो अन्य प्रदेशों में भी किसान आंदोलन के लिए खड़े हो रहे
- अब उत्तराखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक में भी आंदोलन
विज्ञापन
रांची में भी सड़कों पर उतरे किसान समर्थक...
- फोटो : amar ujala
विस्तार
कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए 10 दिन पहले पंजाब के किसानों के दिल्ली कूच करने पर आंदोलन शुरू हुआ तब शायद वहां के किसानों ने सोचा भी नहीं होगा कि यह इतना बड़ा आंदोलन बन जाएगा। किसानों के इस आंदोलन की आग केवल 10 दिन में 10 से ज्यादा राज्यों में फैल गई है और इन सभी राज्यों में भी आंदोलन शुरू हो गए हैं।
विज्ञापन
किसान केवल अपने राज्य के अंदर ही आंदोलन नहीं कर रहे हैं, बल्कि इन राज्यों से सिंघु बॉर्डर पर भी किसान पहुंच रहे हैं। इस तरह समय बीतता जा रहा है और इस किसान आंदोलन का दायरा बढ़ता जा रहा है।
विज्ञापन
कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए दिल्ली कूच की हुंकार दस दिन पहले पंजाब के किसानों ने भरी थी और वह दिल्ली के लिए निकल पड़े थे। उस समय आंदोलन में केवल पंजाब का किसान ही दिख रहा था। जब पंजाब के किसान हरियाणा में आए तो यहां के किसान भी उनके साथ जुड़ गए।
विज्ञापन
किसानों के जत्थे दिल्ली के लिए चलते रहे तो 28 नवंबर को सिंघु बॉर्डर पर रोक लिया गया और किसान वहां धरना देकर बैठ गए। जिसके बाद नए आंदोलन की नींव रखी गई और आंदोलन धीरे-धीरे बढ़ना शुरू हो गया। हरियाणा के किसान भी खूब बढ़-चढ़ कर आंदोलन में शामिल होने लगे तो यूपी के किसानों ने भी हुंकार भरकर आंदोलन शुरू कर दिया।
अब यह आंदोलन पंजाब व हरियाणा के अलावा यूपी, उत्तराखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक, झारखंड, बिहार तक पहुंच गया है।
आंदोलन की आवाज...
कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब से आंदोलन शुरू हुआ था तो उस समय यह सोचकर नहीं चले थे कि यह आंदोलन इतना बड़ा हो जाएगा। आंदोलन हर दिन बढ़ता जा रहा है और यह देशभर में शुरू हो गया है। हर किसी की एक ही मांग है कि कृषि कानूनों को रद्द किया जाए। कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए डटे हुए है और आंदोलन को इस तरह ही बढ़ाते रहेंगे। सरकार चाहे गोली मारे या लाठी, हम मांग पूरी हुए बिना नहीं हटेंगे।
- हरेंद्र सिंह लखोवाल, महासचिव भाकियू पंजाब
हमारे कुछ किसान यहां धरने पर आए हुए हैं, क्योंकि सभी किसान इतनी दूर से नहीं आ सकते हैं। लेकिन ओडिशा में एक बड़ा आंदोलन नव निर्माण किसान संगठन ने किसानों के साथ मिलकर राज्य के अंदर खड़ा किया है, जिसमें विरोध प्रदर्शन हो रहा है।
- अक्षय कुमार, अध्यक्ष नव निर्माण किसान संगठन उड़ीसा
कृषि कानूनों के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन केवल इन कानूनों को रद्द कराकर ही खत्म कराया जा सकता है। अब यह किसी एक राज्य का आंदोलन नहीं है, बल्कि पूरे देश के किसानों का आंदोलन हो गया है।
- योगेंद्र यादव, संस्थापक, जय किसान आंदोलन