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समाज सुधार के लिए काम करना हर किसी की नैतिक जिम्मेदारी: जस्टिस उदय उमेश ललित

Sun, 11 Aug 2019 01:42 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 11 Aug 2019 01:42 AM IST
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justice in university
विद्यार्थी विधिक साक्षरता मिशन के वार्षिक समारोह में संबोधित करते न्यायमूर्ति जस्टिस उदय उमेश ? - फोटो : Sonipat
सोनीपत। समाज सुधार के लिए काम करना हर किसी की नैतिक जिम्मेदारी है। जब हम पढ़ाई करते थे तो उस समय विधिक साक्षरता जैसी कोई सुविधा नहीं मिलती थी। युवाओं को मौलिक अधिकारों और कानूनों की जानकारी मिलने से समाज में जागरूकता आती है। ये बातें सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उदय उमेश ललित ने शनिवार को दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सभागार में हरियाणा राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण एवं शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित विद्यार्थी विधिक साक्षरता मिशन के वार्षिक समारोह को संबोधित करते हुए कहीं।
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जस्टिस उदय उमेश ललित ने कहा कि शैक्षणिक उपाधियां अलग-अलग हो सकती है, लेकिन भारत के संविधान में बनाए गए कानून एक हैं और उनका पालन सभी को करना होता है। कानून की अज्ञानता किसी के लिए कोई बहाना नहीं है, यह कानून की डिग्री के प्रथम वर्ष में पढ़ने पर मिलता है। अब स्कूलों से ही विद्यार्थियों को कानूनी साक्षरता के बारे में जानकारी होती है तो वे आगे चलकर कानून का पालन अवश्य करेंगे। समाज को उनके अधिकारों और कानून के बारे में जागरूक करेंगे।
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उन्होंने कहा कि विधिक साक्षरता मिशन से हम समाज को जागृत करने का कार्य करेंगे। यह न्यायपालिका लोकतंत्र और एक सभ्य समाज के लिए अच्छा है। उन्होंने कहा कि इससे युवा अपने कर्तव्यों व नैतिक मूल्यों को प्राप्त कर अपने आस पास के क्षेत्र में जागृति फैलाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब वह दीपावली पर अपने बेटे को पटाखे खरीदने के लिए बाजार लेकर गए थे तो बेटे ने यह कहकर मना कर दिया था कि पटाखे बनाने में शिवकाशी के बाल मजदूरों का शोषण होता है और उसके बाद से कभी दीपावली पर पटाखे नहीं खरीदे। उन्होंने हरियाणा राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर हरियाणा राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण ने लगातार पांच वर्षों से देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
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पानी को बचाएं, प्लास्टिक और पटाखों का इस्तेमाल न करें : जस्टिस हेमंत गुप्ता
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कहा कि हर किसी को पानी को बचाने और प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करने का संकल्प लेना चाहिए। पर्यावरण को बचाए रखने के लिए पटाखों का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए। उन्होंने सीएम मनोहर लाल की पानी बचाने के लिए प्रदेश के धान बाहुल्य जिलों में 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की जगह दलहन व तिलहन की फसलें उगाने के लिए चलाए गए जल ही जीवन अभियान की सराहना की। उन्होंने कहा कि पानी की किल्लत देश के समक्ष है और यह हाल रहा तो एक दिन ऐसा आएगा कि पानी के लिए ही युद्ध हो जाएगा। उन्होंने हरियाणा राज्य विधिक प्राधिकरण के सदस्यों से आग्रह किया कि जिस प्रकार से वह कन्या भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा व अन्य सामाजिक बुराइयों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाते हैं तो वे जल संरक्षण को भी इसमें शामिल करें।
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समाज में कानूनी जागरूकता फैलाना जरूरी : जस्टिस सूर्यकांत
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं शिक्षा विभाग द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जा रहा विधिक साक्षरता अभियान एक सराहनीय कदम है। इससे हम सशक्त एवं सभ्य समाज का निर्माण कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि जितने विद्यार्थी विधिक साक्षरता क्लबों से जुड़े हैं, वह निश्चित रूप से अपने अभिभावकों, बहन, भाइयों को अपराध का शिकार होने से बचाएंगे और इस प्रकार समाज में सुधार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में कानूनी जागरूकता फैलाने के लिए क्लब से जुड़े लोंगों को अपनी जीवन शैली का हिस्सा बनाना चाहिए।
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प्रदेश में 7101 विधिक साक्षरता क्लब चल रहे : जस्टिस कृष्ण मुरारी
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी ने कहा कि हरियाणा राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण प्रदेश के विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में 7101 विधिक साक्षरता क्लब चला रहा है, जिनमें 18 लाख से अधिक विद्यार्थी जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम जमीनी स्तर पर हमारे मौलिक अधिकारों एवं कानून की जानकारी देने के लिए एक जागरूकता मिशन के रूप में कार्य करते हैं। भावी पीढ़ी को दो तरह से हम तैयार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विधिक साक्षरता शिविरों के माध्यम से हम गरीब व कमजोर वर्ग के लोगों को उनके अधिकारों की जानकारी देते हैं और यही न्यायपालिका से जुड़े लोगों का उद्देश्य होना चाहिए। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं हरियाणा राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति राजीव शर्मा ने कहा कि प्राधिकरण नेे छठीं कक्षा से लेकर कॉलेज स्तर तक के लगभग 18 लाख विद्यार्थियों को विधिक साक्षरता अभियान से जोड़ा है। इस तरह आने वाले समय में वह निश्चित रूप से सशक्त मानव संसाधन उभर कर निकलेगा।

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ये रहे मौजूद
कार्यक्रम के दौरान पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस हरदीप सिंह सिद्धू, जस्टिस राज मोहन सिंह, जस्टिस हंस लाल सिंह गिल, जस्टिस दया चौधरी, पंजाब राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस आरके जैन, चंडीगढ़ विधिक सेवाएं प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस जसवंत सिंह, हरियाणा के महाधिवक्ता बीआर महाजन, पंजाब के महाधिवक्ता अतुल नंदा, सोनीपत के जिला एवं सत्र न्यायाधीश यशवीर सिंह राठौर, सीजेएम एवं जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव तैय्यब हुसैन के अलावा सभी जिलों के सत्र न्यायाधीश, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव, हरियाणा कारागार महानिदेशक के सेल्वराज, शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव डॉ. महावीर सिंह आदि मौजूद रहे।
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