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अंतरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस पर विशेष: विदेशी धरा पर हरियाणवी संस्कृति का दूत, नाम है रेडियो कसूत

Thu, 18 Dec 2025 04:06 PM IST
शाहिल शर्मा बलराज सिंह, रोहतक
बलराज सिंह, रोहतक Published by: शाहिल शर्मा Updated Thu, 18 Dec 2025 04:06 PM IST
सार

पहला हरियाणवी रेडियो स्टेशन चलाने का श्रेय भी अरुण मलिक को जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2017 में की गई। करीब 37 वर्षीय अरुण बताते हैं कि इसके पीछे भी एक कहानी

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International migrants day radio kasut Specail Story on Arun Malik
अरुण मलिक, रेडियो कसूत के संस्थापक - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

दिल को छू लेने वाला एक गाना है, ‘पंछी-नदिया, पवन के झोंके, कोई सरहद ना इन्हें रोके...’। ऑस्ट्रेलिया में रहकर हरियाणवियों के दिलों में धड़कते अरुण मलिक की सोच पर यह गाना एकदम फिट बैठता है। उनका लॉन्च किया गया कम्युनिटी रेडियो ऐप रेडियो कसूत विदेशी धरा पर आपणी बोली-आपणा बाणा के संदेश का दूत बना हुआ है। आज अंतरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस पर हम इसी कहानी से रू-ब-रू करा रहे हैं।

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सोनीपत में हुआ अरुण मलिक का जन्म 

अरुण मलिक का जन्म 29 अप्रैल 1989 को हरियाणा के सोनीपत में हुआ था। पेशे से वह एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। साल 2008 में उच्च शिक्षा के लिए ऑस्टेलिया के ब्रिस्बेन गए थे। दो बच्चों के पिता अरुण अब देश-विदेश में हेल्दी लाइफस्टाइल को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत हैं। अब तक 23 बार ब्लड डोनेट कर चुके हैं। उनके अपना जंक्शन फाउंडेशन के 'साइकल चलाओ-प्रदूषण भगाओ', 'मेरा पेड़-मेरी पहचान' और 'बाल विकास' अभियान चल रहे हैं। इसके अलावा होनहार बच्चों को समय-समय पर प्रोत्साहित भी करते रहते हैं। अरुण बताते हैं कि वह आने वाले कुछ बरसों में कार को सोशल स्टेटस सिंबल मानने की सोच को बदलना चाहते हैं। अरुण का सपना है कि स्कूलों और कॉलेजों के आस-पास के माहौल को कम ट्रैफिक वाले इलाकों में बदल दें। हर स्टूडेंट के लिए बाइक स्टैंड लगाएंगे।
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सोशल मीडिया कनेक्टिविटी के जरिये अरुण ने बताया कि बचपन में साइकिल सीखने की ललक जगी। न जाने कब शौक में बदल गई। उस वक्त देश में बच्चों के लिए साइकिल बहुत कम होती थी। इनके घर में भी सिर्फ इनके पिता जी के पास एक साइकिल थी। जी से लगाकर रखे जाने की वजह से उसका नाम 'महारानी' रख दिया गया। उस साइकिल को अरुण ने 19 साल तक चलाया। करीब 96 हजार किलोमीटर के सफर के बाद अरुण और इनके पिता जी की महारानी का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंटरनेशनल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया। कम्युनिटी ने साइकिल मैन नाम भी दे दिया। अब घर में तीन साइकिल हैं। एक पिता जी, दूसरी पत्नी की और तीसरी बेटे की। यही अपना जंक्शन की स्थापना का मूल प्रेरक बना।

पहला हरियाणवी रेडियो स्टेशन चलाने का श्रेय भी अरुण मलिक को जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2017 में की गई थी। करीब 37 वर्षीय अरुण बताते हैं कि आस्ट्रेलिया में उनकी रेडियो पर हरियाणवी गाना सुनने की तमन्ना हुई। आरजे ने गाना सुनाने से मना कर दिया। इसके बाद दिल की टीस को सकारात्मक दिशा में लगा अरुण ने करीब डेढ़ साल की मेहनत के बाद रेडियो कसूत नाम से हरियाणवी रेडियो ऐप बना लिया। इसके जरिये हरियाणवी गानों का खुमार लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। गूगल प्ले स्टोर पर से इस ऐप को अब तक 1 लाख से ज्यादा लोग डाउनलोड कर चुके हैं।
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