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Sonipat News: कपास का रकबा बढ़ाना चुनौती, कल से शुरू होगी बिजाई
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सोनीपत। लगातार घटते कपास के रकबे को बढ़ाना इस बार कृषि विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। पिछले वर्ष महज 1200 एकड़ में ही कपास की खेती हुई थी। ऐसे में विभाग ने किसानों को जागरूक करने के लिए विशेष टीमें गठित की हैं। टीमें गांव-गांव जाकर कपास की खेती के फायदे और रोग नियंत्रण के बारे में जानकारी देंगी।
कृषि विभाग के अनुसार खरीफ सीजन में कपास की बिजाई का उपयुक्त समय 15 अप्रैल से 15 मई तक है। पिछले दिनों हुई बूंदाबांदी व हल्की बारिश से खेतों में नमी बनी हुई है। इससे किसानों को सिंचाई की जरूरत कम पड़ेगी।
विभाग ने बीज उपचार के बाद ही बिजाई करने की सलाह दी है। आंकड़ों के मुताबिक जिले में कपास का रकबा तेजी से घटा है। वर्ष 2022 में 5400 एकड़ से घटकर 2023 में 4500 और 2024 में 2700 एकड़ रह गया जबकि पिछले साल यह घटकर 1200 एकड़ पर सिमट गया।
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किसान अब धान की फसल को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। कपास के रकबे में गिरावट के पीछे गुलाबी सुंडी का प्रकोप, फसल के समय बारिश, मजदूरों पर निर्भरता और कम बाजार भाव जैसे कारण प्रमुख हैं।
उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. संदीप वर्मा ने बताया कि विभाग ने रकबा बढ़ाने के लिए विशेष रणनीति तैयार की है। मौसम भी इस बार कपास की बिजाई के अनुकूल है।
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कृषि विभाग के अनुसार खरीफ सीजन में कपास की बिजाई का उपयुक्त समय 15 अप्रैल से 15 मई तक है। पिछले दिनों हुई बूंदाबांदी व हल्की बारिश से खेतों में नमी बनी हुई है। इससे किसानों को सिंचाई की जरूरत कम पड़ेगी।
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विभाग ने बीज उपचार के बाद ही बिजाई करने की सलाह दी है। आंकड़ों के मुताबिक जिले में कपास का रकबा तेजी से घटा है। वर्ष 2022 में 5400 एकड़ से घटकर 2023 में 4500 और 2024 में 2700 एकड़ रह गया जबकि पिछले साल यह घटकर 1200 एकड़ पर सिमट गया।
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किसान अब धान की फसल को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। कपास के रकबे में गिरावट के पीछे गुलाबी सुंडी का प्रकोप, फसल के समय बारिश, मजदूरों पर निर्भरता और कम बाजार भाव जैसे कारण प्रमुख हैं।
उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. संदीप वर्मा ने बताया कि विभाग ने रकबा बढ़ाने के लिए विशेष रणनीति तैयार की है। मौसम भी इस बार कपास की बिजाई के अनुकूल है।