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Sonipat News: पर्याप्त उम्मीदवार नहीं होने पर एससी, एसटी या ओबीसी के पदों को घोषित किया जा सकता है अनारक्षित
Sun, 28 Jan 2024 11:04 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 28 Jan 2024 11:04 PM IST
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नई दिल्ली। अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) या अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित रिक्तियां इन श्रेणियों के पर्याप्त उम्मीदवारों के उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में अनारक्षित घोषित की जा सकती हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए मसौदा दिशानिर्देशों में यह सुझाव दिया गया है। वहीं जवाहर लाल नेहरू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) ने इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने और यूजीसी अध्यक्ष एम जगदीश कुमार का पुतला फूंकने का ऐलान किया है।
उच्च शिक्षा संस्थानों में केंद्र सरकार की आरक्षण नीति के कार्यान्वयन के लिए दिशानिर्देश हितधारकों की आपत्ति और सुझाव के लिए सार्वजनिक किए गए हैं। मसौदा दिशानिर्देश में कहा गया है कि एससी या एसटी या ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित रिक्तियां संबंधित उम्मीदवार के अलावा किसी अन्य उम्मीदवार से नहीं भरी जा सकती। हालांकि, एक आरक्षित रिक्ति को अनारक्षण की प्रक्रिया का पालन कर अनारक्षित घोषित किया जा सकता है, इसके बाद इसे अनारक्षित रिक्ति के रूप में भरा जा सकता है लेकिन साथ ही कहा गया है कि सीधी भर्ती के मामले में आरक्षित रिक्तियों को अनारक्षित घोषित करने पर पाबंदी है।
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आरक्षण रद्द का औचित्य बताना होगा
मसौदे के अनुसार, समूह ‘ए’ सेवा में कोई रिक्ति सार्वजनिक हित में खाली नहीं छोड़ी जा सकती, ऐसे में इस तरह के दुर्लभ और असाधारण मामलों में संबंधित विश्वविद्यालय रिक्ति के आरक्षण को रद्द करने का प्रस्ताव तैयार कर सकता है। अपने प्रस्ताव में उसे बताना होगा कि पद भरने के लिए कितनी बार प्रयास किए गए, रिक्ति को क्यों खाली नहीं रखा जा सकता और आरक्षण रद्द करने का औचित्य क्या है।
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समूह ए या बी के मामले शिक्षा मंत्रालय भेजे जाएंगे
यह भी सुझाव है कि समूह सी या डी के मामले में आरक्षण रद्द करने का प्रस्ताव विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद को भेजा जाना चाहिए और समूह ए या बी के मामले में प्रस्ताव आवश्यक मंजूरी के लिए पूर्ण विवरण के साथ शिक्षा मंत्रालय के समक्ष पेश किए जाने चाहिए। मंजूरी मिलने के बाद पद भरा जा सकता है और आरक्षण को आगे बढ़ाया जा सकता है।
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शिक्षा मंत्रालय की सफाई, किसी भी आरक्षित पद को अनारक्षित नहीं किया जा सकता
यूजीसी के मसौदा दिशानिर्देशों पर शिक्षा मंत्रालय ने अपनी सफाई में कहा कि किसी भी आरक्षित पद को अनारक्षित नहीं किया जा सकता है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर लिखा कि केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों (शिक्षक संवर्ग में आरक्षण) अधिनियम, 2019 के अनुसार शिक्षक संवर्ग में सीधी भर्ती के सभी पदों के लिए केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों (सीईआई) में आरक्षण प्रदान किया जाता है। इस अधिनियम के लागू होने के बाद किसी भी आरक्षित पद को अनारक्षित नहीं किया गया है। शिक्षा मंत्रालय ने सभी सीईआई को 2019 अधिनियम के अनुसार रिक्तियों को सख्ती से भरने का निर्देश दिया है।
वर्जन
अतीत में केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों (सीईआई) में आरक्षित श्रेणी के पदों का कोई आरक्षण रद्द नहीं किया गया है और ऐसा कोई आरक्षण रद्द होने वाला नहीं है। सभी उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए यह सुनिश्चित करना अहम है कि आरक्षित श्रेणी के सभी बैकलॉग पद ठोस प्रयासों के माध्यम से भरे जाएं। जगदीश कुमार, यूजीसी अध्यक्ष
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उच्च शिक्षा संस्थानों में आरक्षण को खत्म करने की साजिश : कांग्रेस
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उच्च शिक्षा संस्थानों में पदों पर एससी, एसटी और ओबीसी को दिए गए आरक्षण को समाप्त करने की यह एक साजिश है। मोदी सरकार दलितों, पिछड़े वर्गों और आदिवासियों के मुद्दों पर केवल प्रतीकवाद की राजनीति कर रही है।
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उच्च शिक्षा संस्थानों में केंद्र सरकार की आरक्षण नीति के कार्यान्वयन के लिए दिशानिर्देश हितधारकों की आपत्ति और सुझाव के लिए सार्वजनिक किए गए हैं। मसौदा दिशानिर्देश में कहा गया है कि एससी या एसटी या ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित रिक्तियां संबंधित उम्मीदवार के अलावा किसी अन्य उम्मीदवार से नहीं भरी जा सकती। हालांकि, एक आरक्षित रिक्ति को अनारक्षण की प्रक्रिया का पालन कर अनारक्षित घोषित किया जा सकता है, इसके बाद इसे अनारक्षित रिक्ति के रूप में भरा जा सकता है लेकिन साथ ही कहा गया है कि सीधी भर्ती के मामले में आरक्षित रिक्तियों को अनारक्षित घोषित करने पर पाबंदी है।
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आरक्षण रद्द का औचित्य बताना होगा
मसौदे के अनुसार, समूह ‘ए’ सेवा में कोई रिक्ति सार्वजनिक हित में खाली नहीं छोड़ी जा सकती, ऐसे में इस तरह के दुर्लभ और असाधारण मामलों में संबंधित विश्वविद्यालय रिक्ति के आरक्षण को रद्द करने का प्रस्ताव तैयार कर सकता है। अपने प्रस्ताव में उसे बताना होगा कि पद भरने के लिए कितनी बार प्रयास किए गए, रिक्ति को क्यों खाली नहीं रखा जा सकता और आरक्षण रद्द करने का औचित्य क्या है।
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समूह ए या बी के मामले शिक्षा मंत्रालय भेजे जाएंगे
यह भी सुझाव है कि समूह सी या डी के मामले में आरक्षण रद्द करने का प्रस्ताव विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद को भेजा जाना चाहिए और समूह ए या बी के मामले में प्रस्ताव आवश्यक मंजूरी के लिए पूर्ण विवरण के साथ शिक्षा मंत्रालय के समक्ष पेश किए जाने चाहिए। मंजूरी मिलने के बाद पद भरा जा सकता है और आरक्षण को आगे बढ़ाया जा सकता है।
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शिक्षा मंत्रालय की सफाई, किसी भी आरक्षित पद को अनारक्षित नहीं किया जा सकता
यूजीसी के मसौदा दिशानिर्देशों पर शिक्षा मंत्रालय ने अपनी सफाई में कहा कि किसी भी आरक्षित पद को अनारक्षित नहीं किया जा सकता है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर लिखा कि केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों (शिक्षक संवर्ग में आरक्षण) अधिनियम, 2019 के अनुसार शिक्षक संवर्ग में सीधी भर्ती के सभी पदों के लिए केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों (सीईआई) में आरक्षण प्रदान किया जाता है। इस अधिनियम के लागू होने के बाद किसी भी आरक्षित पद को अनारक्षित नहीं किया गया है। शिक्षा मंत्रालय ने सभी सीईआई को 2019 अधिनियम के अनुसार रिक्तियों को सख्ती से भरने का निर्देश दिया है।
वर्जन
अतीत में केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों (सीईआई) में आरक्षित श्रेणी के पदों का कोई आरक्षण रद्द नहीं किया गया है और ऐसा कोई आरक्षण रद्द होने वाला नहीं है। सभी उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए यह सुनिश्चित करना अहम है कि आरक्षित श्रेणी के सभी बैकलॉग पद ठोस प्रयासों के माध्यम से भरे जाएं। जगदीश कुमार, यूजीसी अध्यक्ष
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उच्च शिक्षा संस्थानों में आरक्षण को खत्म करने की साजिश : कांग्रेस
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उच्च शिक्षा संस्थानों में पदों पर एससी, एसटी और ओबीसी को दिए गए आरक्षण को समाप्त करने की यह एक साजिश है। मोदी सरकार दलितों, पिछड़े वर्गों और आदिवासियों के मुद्दों पर केवल प्रतीकवाद की राजनीति कर रही है।