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Sonipat News: नेशनल हाईवे-44 पर सुरक्षा को लगाए स्प्रिंग पोस्ट तोड़े तो पत्थर के बैरिकेड लगाए
Tue, 30 Jan 2024 11:30 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 30 Jan 2024 11:30 PM IST
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फोटो :01: नेशनल हाईवे-44 पर बहालगढ़ के पास लगाए गए पत्थर के बेरिकेड। संवाद
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सोनीपत। नेशनल हाईवे (एनएच)-44 पर दुर्घटना रोकने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। कुंडली से पानीपत के हल्दाना बॉर्डर तक करीब 900 करोड़ रुपये खर्च कर हाईवे को 12 लेन का किया जा चुका है। हाईवे पर वाहनों की गति सीमा 100 किलोमीटर तक किए जाने के बाद चालक तेज गति से वाहन दौड़ा रहे हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से फ्लाईओवर शुरू होने पर वाहनों के सिर्फ संपर्क मार्ग पर उतरने और फ्लाईओवर को पूरा क्रॉस करने के बाद संपर्क मार्ग से हाईवे पर जाने के लिए स्प्रिंग पोस्ट लगाए गए थे। इसके बावजूद लोगों ने उन्हें तोड़कर एक ही स्थान से हाईवे पर चढ़ना और उतरना शुरू कर दिया। अब वहां पत्थर के बैरिकेड लगाए गए हैं।
एनएच-44 पर सोनीपत क्षेत्र में करीब 30 किलोमीटर क्षेत्र में हाईवे को आठ लेन व संपर्क मार्ग की चार लेन बनाकर इसे लोकार्पित किया जा चुका है। इस हिस्से पर करीब 900 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इसके बाद हाईवे पर कारों की गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक बढ़ाई जा चुकी है। इससे वाहन तेज गति से दौड़ते हैं। दिल्ली को हरियाणा के अलावा चंडीगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू व कश्मीर को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे-44 पर सुरक्षा को लेकर भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। पहले हाईवे पर बने फ्लाईओवर से पहले वाहनों के संपर्क मार्ग पर आने व संपर्क मार्ग से हाईवे पर जाने के लिए एक ही स्थान चिह्नित था। जिससे वहां हादसा होने का भय बना रहता था। जिस पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण व ट्रैफिक पुलिस ने मिलकर पहल करते हुए इसका हल निकाला था।
फ्लाईओवर के शुरू होने के दौरान सिर्फ वाहन हाईवे से नीचे संपर्क मार्ग पर आने की व्यवस्था की गई थी। किसी को हाईवे पर जाना होता तो उसे पहले फ्लाईओवर को संपर्क मार्ग पर चलकर क्रॉस करना होता है। उसके बाद ही वह नेशनल हाईवे पर चढ़ सकता था। जिसके लिए स्प्रिंग पोस्ट लगाए थे। इनके लचीले होने के चलते अक्सर वाहन चालक इन्हें तोड़कर हाईवे पर जाने व उतरे लगे। इससे स्प्रिंग पोस्ट वाहन चालकों को रोकने में सार्थक नहीं हुए। ऐसे में अब निर्माण कंपनी ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के निर्देश पर पत्थर के बैरिकेड रखवा दिए हैं।
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रोजाना गुजरते हैं एक लाख से अधिक वाहन
एनएच-44 पर वाहनों की कतार लगी रहती है। हाईवे से रोजाना एक लाख से अधिक वाहन गुजरते हैं। वाहन चालक भी मानते हैं कि हाईवे पर फ्लाईओवर के पास वाहन नीचे उतरने के साथ ही संपर्क मार्ग से हाईवे पर चढ़ने से हर समय खतरा बना रहता है। इससे हर समय दुर्घटना का भय बना रहता था। पत्थर के बेरिकेड लगाने से राहत मिल सकेगी।
हाईवे व संपर्क मार्ग के बीच लगाई लोहे की ग्रिल
नेशनल हाईवे-44 व संपर्क मार्ग के बीच लोहे की ग्रिल लगा दी गई है। जिससे वाहन चालक हाईवे की लेन से सीधे संपर्क मार्ग पर नहीं आ सकेंगे। इससे हादसे होने का डर नहीं रहेगा। इस ग्रिल को कुछ स्थानों पर तोड़ दिया गया था। अब इसे ठीक करा दिया गया है।
नहरों के बीच मोड़ पर लगाई गई रिफ्लेक्टर टेप
हाईवे के साथ ही करियर लिंक चैनल (सीएलसी) व पश्चिमी यमुना लिंक नहर के बीच बनाए गए हाईवे पर भी हादसों को रोकने की पहल शुरू कर दी है। इसके लिए आएटीए की तरफ से रिफ्लेक्टर टेप लगाई गई है। आरटीए विभाग के इंस्पेक्टर के मार्गदर्शन में टेप लगाए गए हैं। इससे रात के समय व कोहरे में वाहन चालकों को काफी हद तक राहत मिल सकेगी। वाहनों को दूर से मोड़ का पता लग सकेगा।
वर्जन
फ्लाईओवर पर चढ़ने और उतरने के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई थी। सुरक्षा के दृष्टिगत रिफ्लेक्टर स्प्रिंग पोस्ट लगाए गए थे। कई स्थानों पर इन्हें तोड़ दिया गया। अब उनके स्थान पर पत्थर के बैरिकेड लगाए गए हैं।-प्रांजल मिश्रा, सहायक प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई
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एनएच-44 पर सोनीपत क्षेत्र में करीब 30 किलोमीटर क्षेत्र में हाईवे को आठ लेन व संपर्क मार्ग की चार लेन बनाकर इसे लोकार्पित किया जा चुका है। इस हिस्से पर करीब 900 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इसके बाद हाईवे पर कारों की गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक बढ़ाई जा चुकी है। इससे वाहन तेज गति से दौड़ते हैं। दिल्ली को हरियाणा के अलावा चंडीगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू व कश्मीर को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे-44 पर सुरक्षा को लेकर भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। पहले हाईवे पर बने फ्लाईओवर से पहले वाहनों के संपर्क मार्ग पर आने व संपर्क मार्ग से हाईवे पर जाने के लिए एक ही स्थान चिह्नित था। जिससे वहां हादसा होने का भय बना रहता था। जिस पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण व ट्रैफिक पुलिस ने मिलकर पहल करते हुए इसका हल निकाला था।
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फ्लाईओवर के शुरू होने के दौरान सिर्फ वाहन हाईवे से नीचे संपर्क मार्ग पर आने की व्यवस्था की गई थी। किसी को हाईवे पर जाना होता तो उसे पहले फ्लाईओवर को संपर्क मार्ग पर चलकर क्रॉस करना होता है। उसके बाद ही वह नेशनल हाईवे पर चढ़ सकता था। जिसके लिए स्प्रिंग पोस्ट लगाए थे। इनके लचीले होने के चलते अक्सर वाहन चालक इन्हें तोड़कर हाईवे पर जाने व उतरे लगे। इससे स्प्रिंग पोस्ट वाहन चालकों को रोकने में सार्थक नहीं हुए। ऐसे में अब निर्माण कंपनी ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के निर्देश पर पत्थर के बैरिकेड रखवा दिए हैं।
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रोजाना गुजरते हैं एक लाख से अधिक वाहन
एनएच-44 पर वाहनों की कतार लगी रहती है। हाईवे से रोजाना एक लाख से अधिक वाहन गुजरते हैं। वाहन चालक भी मानते हैं कि हाईवे पर फ्लाईओवर के पास वाहन नीचे उतरने के साथ ही संपर्क मार्ग से हाईवे पर चढ़ने से हर समय खतरा बना रहता है। इससे हर समय दुर्घटना का भय बना रहता था। पत्थर के बेरिकेड लगाने से राहत मिल सकेगी।
हाईवे व संपर्क मार्ग के बीच लगाई लोहे की ग्रिल
नेशनल हाईवे-44 व संपर्क मार्ग के बीच लोहे की ग्रिल लगा दी गई है। जिससे वाहन चालक हाईवे की लेन से सीधे संपर्क मार्ग पर नहीं आ सकेंगे। इससे हादसे होने का डर नहीं रहेगा। इस ग्रिल को कुछ स्थानों पर तोड़ दिया गया था। अब इसे ठीक करा दिया गया है।
नहरों के बीच मोड़ पर लगाई गई रिफ्लेक्टर टेप
हाईवे के साथ ही करियर लिंक चैनल (सीएलसी) व पश्चिमी यमुना लिंक नहर के बीच बनाए गए हाईवे पर भी हादसों को रोकने की पहल शुरू कर दी है। इसके लिए आएटीए की तरफ से रिफ्लेक्टर टेप लगाई गई है। आरटीए विभाग के इंस्पेक्टर के मार्गदर्शन में टेप लगाए गए हैं। इससे रात के समय व कोहरे में वाहन चालकों को काफी हद तक राहत मिल सकेगी। वाहनों को दूर से मोड़ का पता लग सकेगा।
वर्जन
फ्लाईओवर पर चढ़ने और उतरने के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई थी। सुरक्षा के दृष्टिगत रिफ्लेक्टर स्प्रिंग पोस्ट लगाए गए थे। कई स्थानों पर इन्हें तोड़ दिया गया। अब उनके स्थान पर पत्थर के बैरिकेड लगाए गए हैं।-प्रांजल मिश्रा, सहायक प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई

फोटो :01: नेशनल हाईवे-44 पर बहालगढ़ के पास लगाए गए पत्थर के बेरिकेड। संवाद

फोटो :01: नेशनल हाईवे-44 पर बहालगढ़ के पास लगाए गए पत्थर के बेरिकेड। संवाद

फोटो :01: नेशनल हाईवे-44 पर बहालगढ़ के पास लगाए गए पत्थर के बेरिकेड। संवाद